जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन (जेआईए) ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (RIIPS) के अंतर्गत वर्तमान में केवल राजसिको कंटेनर डिपो के माध्यम से किए जाने वाले एक्सपोर्ट पर उपलब्ध कंटेनर फ्रेट सब्सिडी का लाभ राज्य के सभी पात्र इनलैंड कंटेनर डिपो (ICDs) एवं कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFSs) के माध्यम से किए जाने वाले एक्सपोर्ट पर भी उपलब्ध कराया जाए। जेआईए अध्यक्ष अनुराग लोहिया ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के कारण एक्सपोर्टर की लॉजिस्टिक विकल्प चुनने की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है तथा विभिन्न पात्र कंटेनर डिपो के बीच असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति उत्पन्न होती है। यदि कंटेनर फ्रेट सब्सिडी सभी पात्र आईसीडी एवं सीएफएस पर लागू की जाती है, तो एक्सपोर्टर अपनी आवश्यकता के अनुसार कम परिवहन लागत, बेहतर कनेक्टिविटी, उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं एवं समयबद्ध डिलीवरी के आधार पर लॉजिस्टिक सेवा प्रदाता का चयन कर सकेंगे। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, लॉजिस्टिक व्यवस्था अधिक दक्ष बनेगी तथा एक्सपोर्ट कॉस्टिंग में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर सैंपल, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट, टेक्सटाइल, मेडिकल डिवाइस तथा अन्य उच्च मूल्य एवं समय-संवेदनशील एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स का परिवहन बड़ी मात्रा में एयर कार्गो के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को RIIPS के अंतर्गत पात्र निर्यातकों के लिए एयर कार्गो फ्रेट सब्सिडी प्रारम्भ करनी चाहिए। इससे विशेष रूप से एमएसएमई इकाइयों की लॉजिस्टिक लागत कम होगी, समयबद्ध एक्सपोर्ट सुनिश्चित होगा और इंटरनेशनल मार्केट में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा राजस्थान से मूल्यवर्धित एक्सपोर्ट को प्रोत्साहन मिलेगा। जेआईए सचिव सोनू भार्गव ने बताया कि RIIPS के अंतर्गत देय कैपिटल इन्वेस्टमेंट (कैपेक्स) सब्सिडी का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। वर्तमान में सब्सिडी जारी होने में होने वाली अनावश्यक देरी से उद्योगों की कार्यशील पूंजी एवं नकदी प्रवाह प्रभावित होता है।