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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

02-06-2026

आयात महंगा होने से देसी चना 6500 रुपए बिकने की उम्मीद

  • देसी चने का उत्पादन, खपत के अनुरूप न होने तथा डॉलर, रुपया की तुलना में काफी तेज हो जाने से आयात महंगा हो गया है। इन परिस्थितियों में आयात महंगा होने से देसी चने की जड़ में मंदा नहीं है। अत: जून में राजस्थानी चना 6500 रुपए तथा जुलाई में 7000 रुपए प्रति कुंतल बिकने की संभावना बन गई है। देसी चने की फसल फरवरी से चल रही है मध्य प्रदेश कर्नाटक महाराष्ट्र के बाद अब राजस्थान की फसल भी निपट चुकी है तथा किसी भी मंडी में आवक का प्रेशर नहीं है इसका मुख्य कारण यह है कि अक्टूबर माह में देसी चने की बिजाई के समय ही प्रतिकूल मौसम होने से बोई हुई फसल को व्यापक नुकसान हुआ था इसके अलावा पिछले तीन वर्षों से देसी चने में करो किसानों को भारी नुकसान लगने से बजाई में भी इंटरेस्टेड कम थे। जिस कारण उत्पादन प्रांतवार कम हुआ है, बल्कि बाद में प्रतिकूल मौसम होने से उत्पादकता भी घटी है। हम मानते हैं कि अक्टूबर में बरसात से देसी चने की बिजाई राजस्थान महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में 10-15 प्रतिशत अधिक ही हुई थी, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में बिजाई के बाद ही उत्तर भारत में लगातार बरसात होने से बोई हुई फसल को 26-27 प्रतिशत नुकसान हुआ था। महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश यूपी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका ज्यादा प्रकोप रहा। इसके साथ-साथ मटर की फसल भी 50-55 प्रतिशत नुकसान हो गई थी, क्योंकि बिजाई के तुरंत बाद ही लगातार अधिक बरसात से खेतों में पानी लग गया। यही कारण है कि उत्पादन में जबरदस्त कमी रही है। दूसरी ओर देसी चने का स्टॉक पुराना माल 90 प्रतिशत नई फसल आने पर समाप्त हो गया था, केवल ऑस्ट्रेलिया के उतरे हुए माल ही मिलिंग में जा रहे थे। राजस्थानी माल का प्रेशर किसी भी मंडी में ज्यादा नहीं है। उधर पाइपलाइन में माल की कमी है, ऑस्ट्रेलिया से पहले वाले सौदे आकर निबट चुके हैं, इस वजह से राजस्थानी चने के भाव बढ़ाकर बोले जाने से यहां राजस्थानी चने का भाव 100 रुपए बढक़र आज 6075 रुपए प्रति क्विंटल लॉरेंस रोड पर हो गया है। दाल के भाव भी एवरेज क्वालिटी के 100 रुपए बढक़र 6900/7300 रुपए हो गए हैं, बढिय़ा सिलेक्टेड माल क्वालिटी एवं नमी के हिसाब से ऊपर बिक रहे हैं। वास्तविकता यह है कि ऑस्ट्रेलिया का काला चना मुंदड़ा व मुंबई पोर्ट पर काफी निपट चुका है, घरेलू चने की खपत की तुलना में उपलब्धि कम है।, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव का राजस्थानी चना जून में ही 6500 रुपए हो जाएगा। राजस्थानी चना थोड़ा भी ऑस्ट्रेलिया की बिकवाली कम होते ही छलांग लगा जाएगा तथा यह नये ऑस्ट्रेलिया के माल से पहले 7000 रुपए बन जाएगा। देसी चने का उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन के करीब हुआ है, जबकि हमारी खपत 130 लाख मीट्रिक टन की है।

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आयात महंगा होने से देसी चना 6500 रुपए बिकने की उम्मीद

देसी चने का उत्पादन, खपत के अनुरूप न होने तथा डॉलर, रुपया की तुलना में काफी तेज हो जाने से आयात महंगा हो गया है। इन परिस्थितियों में आयात महंगा होने से देसी चने की जड़ में मंदा नहीं है। अत: जून में राजस्थानी चना 6500 रुपए तथा जुलाई में 7000 रुपए प्रति कुंतल बिकने की संभावना बन गई है। देसी चने की फसल फरवरी से चल रही है मध्य प्रदेश कर्नाटक महाराष्ट्र के बाद अब राजस्थान की फसल भी निपट चुकी है तथा किसी भी मंडी में आवक का प्रेशर नहीं है इसका मुख्य कारण यह है कि अक्टूबर माह में देसी चने की बिजाई के समय ही प्रतिकूल मौसम होने से बोई हुई फसल को व्यापक नुकसान हुआ था इसके अलावा पिछले तीन वर्षों से देसी चने में करो किसानों को भारी नुकसान लगने से बजाई में भी इंटरेस्टेड कम थे। जिस कारण उत्पादन प्रांतवार कम हुआ है, बल्कि बाद में प्रतिकूल मौसम होने से उत्पादकता भी घटी है। हम मानते हैं कि अक्टूबर में बरसात से देसी चने की बिजाई राजस्थान महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में 10-15 प्रतिशत अधिक ही हुई थी, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में बिजाई के बाद ही उत्तर भारत में लगातार बरसात होने से बोई हुई फसल को 26-27 प्रतिशत नुकसान हुआ था। महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश यूपी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका ज्यादा प्रकोप रहा। इसके साथ-साथ मटर की फसल भी 50-55 प्रतिशत नुकसान हो गई थी, क्योंकि बिजाई के तुरंत बाद ही लगातार अधिक बरसात से खेतों में पानी लग गया। यही कारण है कि उत्पादन में जबरदस्त कमी रही है। दूसरी ओर देसी चने का स्टॉक पुराना माल 90 प्रतिशत नई फसल आने पर समाप्त हो गया था, केवल ऑस्ट्रेलिया के उतरे हुए माल ही मिलिंग में जा रहे थे। राजस्थानी माल का प्रेशर किसी भी मंडी में ज्यादा नहीं है। उधर पाइपलाइन में माल की कमी है, ऑस्ट्रेलिया से पहले वाले सौदे आकर निबट चुके हैं, इस वजह से राजस्थानी चने के भाव बढ़ाकर बोले जाने से यहां राजस्थानी चने का भाव 100 रुपए बढक़र आज 6075 रुपए प्रति क्विंटल लॉरेंस रोड पर हो गया है। दाल के भाव भी एवरेज क्वालिटी के 100 रुपए बढक़र 6900/7300 रुपए हो गए हैं, बढिय़ा सिलेक्टेड माल क्वालिटी एवं नमी के हिसाब से ऊपर बिक रहे हैं। वास्तविकता यह है कि ऑस्ट्रेलिया का काला चना मुंदड़ा व मुंबई पोर्ट पर काफी निपट चुका है, घरेलू चने की खपत की तुलना में उपलब्धि कम है।, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव का राजस्थानी चना जून में ही 6500 रुपए हो जाएगा। राजस्थानी चना थोड़ा भी ऑस्ट्रेलिया की बिकवाली कम होते ही छलांग लगा जाएगा तथा यह नये ऑस्ट्रेलिया के माल से पहले 7000 रुपए बन जाएगा। देसी चने का उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन के करीब हुआ है, जबकि हमारी खपत 130 लाख मीट्रिक टन की है।


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