बासमती चावल में 5/7 रुपए प्रति किलो की गिरावट का 10 दिनों के अंदर आ चुकी है, क्योंकि 30-35 रुपए की भारी भारी तेजी के बाद ऊंचे भावों में निर्यातकों द्वारा बंद कर दिए जाने से घरेलू लिवाल भी पीछे हट गए थे। अब वर्तमान भाव पर राइस मिलें ज्यादा माल नहीं दे रही है। उधर मंडी में धान की आपूर्ति लगभग समाप्त हो गई है, जिससे फिर बाजार 10 रुपए प्रति किलो तेज लग रहा है। बासमती चावल का उत्पादन इस बार देश में 40-42 प्रतिशत औसतन कम हुआ था। वर्ष 2025 में बिजाई से लेकर फसल पकने तक बासमती चावल पर प्रकृति की मार पड़ती रही, जिससे उत्पादन में भारी कमी आ गई। अक्टूबर नवंबर की बरसात से धान की कटाई में जबरदस्त मशक्कत करनी पड़ी थी। दूसरी ओर जनवरी माह में भी कुछ दिनों के लिए वर्ल्ड ट्रेड वार शुरू हो गया था तथा 28 फरवरी से लेकर अब तक इजरायल ईरान अमेरिका का जबरदस्त युद्ध चलने से व्यापार पूरी तरह चौपट हो गया तथा कंटेनरों के भाड़े भी 35-40 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। वास्तविकता यह है कि जो 1509 सेला चावल सीजन पर नीचे में 53 रुपए प्रति किलो देख आया था, उसके भाव अभी हाल ही में 85-86 बन गए थे, जो ऊंचे भाव में निर्यातको की मांग ठंडी पड़ जाने से घटकर 79/80 रुपए प्रति किलो रह गया है। इसी तरह 1718 सेला चावल भी 87/87.5 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद घटकर 83 रुपए पर आ गया है। इधर 1401 सेल स्टीम चावल भी सीजन पर नीचे में 68 रुपए बनने के बाद छलांग लगाकर 98 रुपए प्रति किलो तक बिक गया था, वैसे बोलने वाले कारोबारी 100-102 रुपए भी बोलने लगे थे, अब इसके भाव 92/93 रुपए प्रति किलो का पक्का भाव रह गया है। अब यहां से आज की तारीख में धान की मिलिंग करने पर राइस मिलों को साढे चार-पांच रुपए का नुकसान जा रहा है तथा हरियाणा के टोहाना करनाल कुरुक्षेत्र चीका सफींदों तरावड़ी एवं पंजाब के अमृतसर तरणतारन जंडियाला गुरु लाइन में धान की आपूर्ति पूरी तरह समाप्त हो गई है। जो भी धान है, वह राइस मिलों एवं बड़े स्टॉकिस्टों के पास थोड़ा बहुत पड़ा हुआ है। नई फसल आने में लंबा समय बाकी है, यूपी के दनकौर बहजोई दादरी जहांगीराबाद आदि राइस मिलों में धान का स्टॉक खपत के अनुरूप नहीं है। इधर रामपुर टांडा लाइन में नूरी चावल व बासमती धान का स्टॉक बहुत ही कम बचा है।, जबकि कुछ बड़े निर्यातक माल झटकने के लिए साठी धान की बंपर क्रॉप बताने लगे हैं, जो निराधार है। इसकी फसल आने में अभी 2 महीने का पूरा समय बाकी है, उससे पहले निर्यातकों के शिपमेंट 7-8 होने बाकी है, ऐसी बाजारों में विश्वास सूत्रों का कहना है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए जो बाजार 10 दिनों के अंतराल 5/7 रुपए प्रति किलो टूट गया है, इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यहां शरबती चावल स्टीम भी 74.5 रुपए तक बिकी थी, बोलने के लिए 76 रुपए तक बोलने लगे थे, उसका पक्का भाव आज 72 रुपए का है, इसमें माल मिलना मुश्किल है, इन सारी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद वर्तमान में अब मंदे को विराम लग रहा है तथा थोड़ा ठहर कर इसमें फिर से 8-10 किलो की तेजी के आसार बन गए हैं, क्योंकि खाड़ी देशों में तबाही है तथा वहां की मांग रुक-रुक कर बनी हुई है, इन सारी परिस्थितियों में अब व्यापार करना चाहिए।