देसी चने की बिजाई इस बार बिजाई सामान्य हुई थी, जमीन से निकलते हुए पौधे भी बढिय़ा थे, लेकिन अक्टूबर-नवंबर की हुई बरसात से अधिकतर उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ था, जिससे मंडियों में माल का प्रेशर नहीं है। अत: तेजी के लिए कुछ दिन प्रतीक्षा करना पड़ेगा। बीते वर्ष सभी क्षेत्रों में अच्छी बरसात होने से देसी चने की बिजाई राजस्थान महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में वर्ष 2024 की अपेक्षा 10-15 प्रतिशत अधिक ही हुई थी, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में राजस्थान को छोडक़र अधिकतर राज्यों में लगातार बरसात होने से बोई हुई फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश यूपी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका ज्यादा प्रकोप रहा, जिस लगातार बरसात से फसल में 25-30 प्रतिशत नष्ट हो गई थी। इसके साथ-साथ मटर की फसल भी 50-55 प्रतिशत नुकसान हो गई थी, क्योंकि अभी पौधे पूरा निकल भी नहीं पाए थे। इसलिए अधिक बरसात एवं पानी लगने से खेतों में फसल कम रह गई है, सकल उत्पादन में जबरदस्त कमी देखने को मिल रही है। इस वजह से देसी चने एवं मटर दोनों की आई हुई फसल बिजाई अधिक होने के बावजूद कम ही आई है। इधर देसी चने का स्टॉक राजस्थान मध्य प्रदेश महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक किसी भी राज्य में ज्यादा नहीं है। उधर पाइपलाइन में माल की कमी है, ऑस्ट्रेलिया से पहले वाले सौदे आ चुके हैं, इस वजह से राजस्थानी चने के भाव बढ़ाकर बोले जाने से यहां राजस्थानी चने का आज 5600 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। दाल के भाव भी एवरेज क्वालिटी के 6300/6500 रुपए हो गए हैं, बढिय़ा सिलेक्टेड माल क्वालिटी एवं नमी के हिसाब से ऊपर बिक रहे हैं। वास्तविकता यह है कि ऑस्ट्रेलिया का काला चना मुंदड़ा व मुंबई पोर्ट पर काफी निपट चुका है, घरेलू चने की खपत की तुलना में उपलब्धि कम है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव का राजस्थानी चना जून में ही लाभ दे जाएगा। एक बार राजस्थानी चना थोड़ा भी ऑस्ट्रेलिया की बिकवाली कम होते ही छलांग लगा जाएगा तथा यह नये ऑस्ट्रेलिया के माल से पहले 6200 रुपए को पार कर जाएगा। देसी चने का उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन के करीब होने का व्यापारिक अनुमान आ रहा है, जबकि हमारी खपत 130 लाख मीट्रिक टन की है। अत: यहां से खरीद कर एक बार प्रतीक्षा करना चाहिए।