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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-05-2026

मांग बढऩे से मखाने में तेजी की संभावना

  •  मखाने की फसल आए लंबे समय हो चुके हैं तथा सीजन से अब तक इस बार कारोबारियों को मखाने में विशेष लाभ नहीं मिला है। अब इसके भाव निचले स्तर पर भाव आ चुके हैं तथा फोड़ी वाले अपने गांव चले गए हैं, इसे देखते हुए वर्तमान भाव के मखाने में ग्राहकी निकलते ही बढ़ जाने की संभावना है। मखाने का उत्पादन दरभंगा गुलाब बाग पूर्णिया गेरा बाड़ी हरिशचंद्रपुर उत्तर दिनाजपुर मालदा आदि उत्पादक क्षेत्रों में होता है इस बार उत्पादन अधिक हुआ था, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन सीजन में ही बाजार ऊंचे हो गए थे तथा बाद में रुपए की तंगी होने के साथ ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध के चलते घरेलू एवं निर्यात का सपोर्ट नहीं मिल पाया। यही कारण है कि बाजार टूटते चले गए थे। अब छोटे स्टॉक के 90 प्रतिशत माल कट चुके हैं। चालू माह के अंतराल दरभंगा गुलाब बाग गेरा बाड़ी लाइन में 650/660 रुपए हो गए हैं। इसके अलावा पूर्णिया में  670/690 रुपए एवं हरदा मंडी में 765/770 रुपए प्रति किलो का व्यापार होने लगा है, जो नीचे में 700 रुपए तक बन गया था। मखाने का स्टॉक बंदरगाहों पर जो पहले फंसा हुआ था, अब वह निकल चुके हैं तथा नए शिपमेंट का व्यापार होने लगा है। दूसरी ओर बाजारों में रुपए की तंगी होने तथा उत्तर भारत की मांग कमजोर होने से बाजार लगातार टूटता चला गया था, वह मजबूत हो गया है। अब उत्पादक मंडियों में गुडिय़ा नहीं है तथा फोड़ी वाले घटाकर माल बेचने से पीछे हट गए हैं। दूसरी ओर समुद्री मार्ग भी निर्यात हेतु सामान्य होने लगे हैं तथा अब नए सौदे सभी खाद्य पदार्थों के आयातक देशों के लिए होने लगे हैं। स्नैक्स के भी पहले के कंटेनर बंदरगाहों से शिपमेंट होकर निकल गए हैं। दूसरी ओर अब फोड़ी किसी भी मंडी में नहीं है। इधर मंदे में काफी माल दिल्ली कानपुर ग्वालियर जयपुर सहारनपुर लखनऊ आदि मंडियों में काफी कट चुके हैं तथा उत्पादक मंडियों की तुलना में काफी भाव नीचे चल रहे हैं।  वर्तमान में शादियां शुरू हो गई है तथा यह जुलाई के प्रथम सप्ताह तक लगातार होंगी, क्योंकि इस बार साए ज्यादा है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव के मखाने में किसी भी मंडी में रिस्क नहीं है। दिल्ली में, उत्पादक मंडियों की अपेक्षा काफी नीचे आ गया है तथा जयपुर मंडी में भी काफी नीचे व्यापार पिछले दिनों हो गया है, अब इन भाव में  रिस्क नहीं है तथा धैर्य रखने पर मई के अंत तक थोड़ी सी ग्राहकी निकलते ही मखाने में 200 रुपए प्रति किलो का उछाल आ जाएगा।

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मांग बढऩे से मखाने में तेजी की संभावना

 मखाने की फसल आए लंबे समय हो चुके हैं तथा सीजन से अब तक इस बार कारोबारियों को मखाने में विशेष लाभ नहीं मिला है। अब इसके भाव निचले स्तर पर भाव आ चुके हैं तथा फोड़ी वाले अपने गांव चले गए हैं, इसे देखते हुए वर्तमान भाव के मखाने में ग्राहकी निकलते ही बढ़ जाने की संभावना है। मखाने का उत्पादन दरभंगा गुलाब बाग पूर्णिया गेरा बाड़ी हरिशचंद्रपुर उत्तर दिनाजपुर मालदा आदि उत्पादक क्षेत्रों में होता है इस बार उत्पादन अधिक हुआ था, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन सीजन में ही बाजार ऊंचे हो गए थे तथा बाद में रुपए की तंगी होने के साथ ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध के चलते घरेलू एवं निर्यात का सपोर्ट नहीं मिल पाया। यही कारण है कि बाजार टूटते चले गए थे। अब छोटे स्टॉक के 90 प्रतिशत माल कट चुके हैं। चालू माह के अंतराल दरभंगा गुलाब बाग गेरा बाड़ी लाइन में 650/660 रुपए हो गए हैं। इसके अलावा पूर्णिया में  670/690 रुपए एवं हरदा मंडी में 765/770 रुपए प्रति किलो का व्यापार होने लगा है, जो नीचे में 700 रुपए तक बन गया था। मखाने का स्टॉक बंदरगाहों पर जो पहले फंसा हुआ था, अब वह निकल चुके हैं तथा नए शिपमेंट का व्यापार होने लगा है। दूसरी ओर बाजारों में रुपए की तंगी होने तथा उत्तर भारत की मांग कमजोर होने से बाजार लगातार टूटता चला गया था, वह मजबूत हो गया है। अब उत्पादक मंडियों में गुडिय़ा नहीं है तथा फोड़ी वाले घटाकर माल बेचने से पीछे हट गए हैं। दूसरी ओर समुद्री मार्ग भी निर्यात हेतु सामान्य होने लगे हैं तथा अब नए सौदे सभी खाद्य पदार्थों के आयातक देशों के लिए होने लगे हैं। स्नैक्स के भी पहले के कंटेनर बंदरगाहों से शिपमेंट होकर निकल गए हैं। दूसरी ओर अब फोड़ी किसी भी मंडी में नहीं है। इधर मंदे में काफी माल दिल्ली कानपुर ग्वालियर जयपुर सहारनपुर लखनऊ आदि मंडियों में काफी कट चुके हैं तथा उत्पादक मंडियों की तुलना में काफी भाव नीचे चल रहे हैं।  वर्तमान में शादियां शुरू हो गई है तथा यह जुलाई के प्रथम सप्ताह तक लगातार होंगी, क्योंकि इस बार साए ज्यादा है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव के मखाने में किसी भी मंडी में रिस्क नहीं है। दिल्ली में, उत्पादक मंडियों की अपेक्षा काफी नीचे आ गया है तथा जयपुर मंडी में भी काफी नीचे व्यापार पिछले दिनों हो गया है, अब इन भाव में  रिस्क नहीं है तथा धैर्य रखने पर मई के अंत तक थोड़ी सी ग्राहकी निकलते ही मखाने में 200 रुपए प्रति किलो का उछाल आ जाएगा।


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