अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोया डीओसी के ऊंचे भाव होने तथा सीड की भारी कमी होने से नीचे के भाव से काफी बाजार बढ़ गए हैं तथा भविष्य में डीसी कोटा एक्सप्लांट में 60 हजार रुपए प्रति टन पारे की संभावना दिखाई दे रही है। सोयाबीन भी 75 रुपए प्रति किलो बन सकती है। सोयाबीन की फसल आए सात महीने हो चुके हैं। शिवपुरी दतिया सुजालपुर नीमच दाहोद के साथ-साथ कोटा अकोला जलगांव आदि उत्पादक क्षेत्रों में फसल की बिजाई के बाद से ही पिछले सीजन में लगातार बरसात होने एवं तैयार होने के समय में भी बेमौसमी बरसात से फसल को भारी नुकसान हुआ है। विगत तीन वर्षों से 130-135 लाख मीट्रिक टन के बीच सोयाबीन का उत्पादन देश में हो रहा था, जो इस बार 90-92 लाख मीट्रिक टन के करीब ही रह गया था। यही कारण है कि जो मंडियों में लूज बढिय़ा सोयाबीन 3700/3800 रुपए प्रति क्विंटल बिक गई थी, उसके भाव 6400/6450 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं तथा प्लांट पहुंच में 6550/6650 रुपए प्रति कुंतल राजस्थान व एमपी में हो गए हैं। गौरतलब है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी किया गया था, क्योंकि उस समय मंडियों के भाव से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1300/1400 रुपए प्रति कुंतल ऊंचा था, जो इस समय 200/250 रुपए ऊंचा हो गया है। वर्ष 2024-25 में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपए प्रति क्विंटल था, जो वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा 436 रुपए बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति कुंतल कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर काफी खरीद की गई है, जिससे किसानों के माल, गत वर्ष की अपेक्षा काफी बिक चुके हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोया डीओसी के भाव काफी ऊंचे होने से राजस्थान मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के प्लांटों से निर्यात में गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ सीजन में 28-29 प्रतिशत निर्यात अधिक हो गया है। यही कारण है कि नीमच लाइन में 27500/28000 रुपए सोया डीओसी नीचे में बिकने के बाद इस समय 51500/52000 रुपए प्रति टन हो गया है। इधर दतिया नीमच लाइन में 50500/51000 रुपए प्रति टन का व्यापार एक्सप्लांट में होने लगा है। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच में 55000-55500 रुपए प्रति टन तक निर्यातकों ने खरीद किया है, जिसमें 45-48 प्रतिशत प्रोटीन है, ऐसी चर्चा है। गौरतलब है कि दो महीने से ईरान इजरायल अमेरिका के युद्ध से समुद्री मार्ग से शिपमेंट में थोड़ा रिस्क बढ़ गया है, लेकिन नई फसल आने में अभी 4 महीने से अधिक का समय बाकी है तथा उस हिसाब से एमपी राजस्थान महाराष्ट्र की मंडियों में माल नहीं है।नीमच लाइन में भी इस बार गत वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत सोयाबीन कम आई हैं। इधर दतिया सुजालपुर लाइन में भी सोयाबीन का स्टॉक 40 प्रतिशत कम है। दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र में 35-36 प्रतिशत अलग-अलग मंडियों में स्टॉक कम है। यही कारण है कि सॉल्वेंट प्लांटों को डीओसी बनाने के लिए सोयाबीन सीड महंगा खरीदना पड़ रहा है। वर्तमान में कोटा लाइन के प्लांटों में जो 51000 रुपए प्रति टन की सोया डीओसी एक्सप्लांट में बिक रही है, उसके भाव भविष्य में 60 हजार रुपए प्रति टन बन सकते हैं। सोयाबीन भी 6650 रुपए जो प्लांट पहुंच में बिक रही है, उसके भाव 7000 रुपए तक पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही है। इससे अधिक की तेजी आगे के मौसम एवं बिजाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव को देखते हुए थोड़ा करेक्शन के बाद 10 हजार रुपए प्रति टन उछल जाएगी।