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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

01-05-2026

उत्पादन घटने से जीरे के भावों में तेजी के आसार

  •  जीरे का उत्पादन विगत दो वर्षों से धीरे-धीरे लगातार घटने से अब ज्यादा मंदे की गुंजाइश नहीं लग रही है। अभी निर्यात अनुकूल नहीं है, लेकिन ईरान इजरायल अमेरिका के समझौता होने के बाद ही निर्यात के आसार दिखाई दे रहे हैं, इस स्थिति में वर्तमान भाव का जीरा आगे चलकर लाभदायक रहेगा। फिलहाल ग्राहकी कमजोर होने से 7/8 किलो की गिरावट आ गई है तथा टेंपरेरी 5/6 रुपए और घट सकता है, लेकिन इन घटे भाव में व्यापार में रिस्क समाप्त हो जाएगा। जीरे की फसल गुजरात की फरवरी माह से आ रही है तथा मंडियों में माल का प्रेशर सीजन से लेकर के अब तक कोई विशेष नहीं रहा है, लेकिन संयोग ऐसा रहा कि फसल जब से आ रही है, तब से ईरान इजरायल अमेरिका का युद्ध चलने से निर्यात में काफी निराशा रही है, इसके अलावा राजस्थान के बाड़मेर जोधपुर लाइन का जीरा आने लगा है, वहां फसल बढिय़ा है, लेकिन पिछले एक पखवाड़े के अंतराल मौसम काफी गरम हो जाने से सात-आठ प्रतिशत यील्ड कम बता रहे हैं। देश में इस बार जीरे की बिजाई 4.08 लाख हैक्टेयर भूमि में हुई है, जो 4.40 लाख हेक्टेयर में सामान्यत: होती है। वर्ष 2023-24 के बाद लगातार दो वर्षों से बिजाई में कमी होने से कुछ ना कुछ उत्पादन लगातार कम रहा है। गत वर्ष जीरे का उत्पादन 5.39 लाख मीट्रिक टन यानी सवा करोड़ गोरी के करीब हुआ था, जबकि वर्तमान में आई हुई फसल का उत्पादन 5.14 लाख मीट्रिक टन यानी 90-92 लाख बोरी के करीब उतारने का अनुमान लगा रहे हैं। गौरतलब है कि गत वर्ष अप्रैल से नवंबर तक जीरे के निर्यात में औसतन 10-12 प्रतिशत की कमी रही है, उसके बाद 28 फरवरी से ईरान इजरायल अमेरिका के युद्ध से जो कुछ रही सही कसर समुद्री मार्ग अवरुद्ध होने तथा खाड़ी देशों पर जबरदस्त संकट पडऩे से पूरी हो गई, इसलिए नई फसल आने पर लगभग 5.50 लाख बोरी पुराना जीरे का स्टॉक बचा था, जबकि गत वर्ष यह स्टाक सीजन पर 13 लाख बोरी के करीब बचा था। अभी हाल ही में पिछले 10 दिन के अंतराल सात-आठ रूपए प्रति किलो की गिरावट पर नीचे चलनसार क्वालिटी का जीरा 228/232 रुपए प्रति किलो के बीच रह गया है तथा एवरेज क्वालिटी का जरा 256-257 से घटकर 246 247 रुपए प्रति किलो लूज में रह गया है, जबकि एक किलो पैकिंग में थोक में इसी माल के भाव 259/260 रुपए प्रति किलो बोल रहे हैं। आगे की तेजी मंदी निर्यात पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि हॉरमुज का समझौता सुचारू रूप से हो जाने पर चीन सहित अन्य देशों के लिए निर्यात अधिक होने की संभावना है।, क्योंकि इस बार अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में जीरे के भाव ऊंचे चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जॉर्डन तुर्की सीरिया आदि सभी खाड़ी के जीरा उत्पादक देशों में फसल नष्ट हो गई है, वहां की स्थिति खराब हो गई है, इसलिए हमारा निर्यात चीन सहित अन्य देशों के लिए भरपूर होने की संभावना है, इन परिस्थितियों में 5-7 रुपए प्रति किलो का मंदा आना तो कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन नीचे वाले भावों में खरीद करना चाहिए, थोड़ा करेक्शन आने के बाद बाजार निर्यात मांग निकलते ही उछल जाएगा। हम मानते हैं कि गर्मी बढऩे से ए टू जेड सभी मार्केट में ग्राहकी का पूरी तरह पलायन दिखाई दे रहा है। अत: धैर्य रखने की बात है, जीरे का भविष्य इस बार बढिय़ा दिखाई दे रहा है। इधर बाड़मेर जोधपुर लाइन में भी जो फसल आ रही है, उस पर  ‘हीट वेव्स’ का प्रभाव दिखाई दे रहा है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव की जीरे में अब घबराने की बिलकुल जरुरत नहीं है, जो जीरा 258-260 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वह 300 रुपए को छू सकता है।

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उत्पादन घटने से जीरे के भावों में तेजी के आसार

 जीरे का उत्पादन विगत दो वर्षों से धीरे-धीरे लगातार घटने से अब ज्यादा मंदे की गुंजाइश नहीं लग रही है। अभी निर्यात अनुकूल नहीं है, लेकिन ईरान इजरायल अमेरिका के समझौता होने के बाद ही निर्यात के आसार दिखाई दे रहे हैं, इस स्थिति में वर्तमान भाव का जीरा आगे चलकर लाभदायक रहेगा। फिलहाल ग्राहकी कमजोर होने से 7/8 किलो की गिरावट आ गई है तथा टेंपरेरी 5/6 रुपए और घट सकता है, लेकिन इन घटे भाव में व्यापार में रिस्क समाप्त हो जाएगा। जीरे की फसल गुजरात की फरवरी माह से आ रही है तथा मंडियों में माल का प्रेशर सीजन से लेकर के अब तक कोई विशेष नहीं रहा है, लेकिन संयोग ऐसा रहा कि फसल जब से आ रही है, तब से ईरान इजरायल अमेरिका का युद्ध चलने से निर्यात में काफी निराशा रही है, इसके अलावा राजस्थान के बाड़मेर जोधपुर लाइन का जीरा आने लगा है, वहां फसल बढिय़ा है, लेकिन पिछले एक पखवाड़े के अंतराल मौसम काफी गरम हो जाने से सात-आठ प्रतिशत यील्ड कम बता रहे हैं। देश में इस बार जीरे की बिजाई 4.08 लाख हैक्टेयर भूमि में हुई है, जो 4.40 लाख हेक्टेयर में सामान्यत: होती है। वर्ष 2023-24 के बाद लगातार दो वर्षों से बिजाई में कमी होने से कुछ ना कुछ उत्पादन लगातार कम रहा है। गत वर्ष जीरे का उत्पादन 5.39 लाख मीट्रिक टन यानी सवा करोड़ गोरी के करीब हुआ था, जबकि वर्तमान में आई हुई फसल का उत्पादन 5.14 लाख मीट्रिक टन यानी 90-92 लाख बोरी के करीब उतारने का अनुमान लगा रहे हैं। गौरतलब है कि गत वर्ष अप्रैल से नवंबर तक जीरे के निर्यात में औसतन 10-12 प्रतिशत की कमी रही है, उसके बाद 28 फरवरी से ईरान इजरायल अमेरिका के युद्ध से जो कुछ रही सही कसर समुद्री मार्ग अवरुद्ध होने तथा खाड़ी देशों पर जबरदस्त संकट पडऩे से पूरी हो गई, इसलिए नई फसल आने पर लगभग 5.50 लाख बोरी पुराना जीरे का स्टॉक बचा था, जबकि गत वर्ष यह स्टाक सीजन पर 13 लाख बोरी के करीब बचा था। अभी हाल ही में पिछले 10 दिन के अंतराल सात-आठ रूपए प्रति किलो की गिरावट पर नीचे चलनसार क्वालिटी का जीरा 228/232 रुपए प्रति किलो के बीच रह गया है तथा एवरेज क्वालिटी का जरा 256-257 से घटकर 246 247 रुपए प्रति किलो लूज में रह गया है, जबकि एक किलो पैकिंग में थोक में इसी माल के भाव 259/260 रुपए प्रति किलो बोल रहे हैं। आगे की तेजी मंदी निर्यात पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि हॉरमुज का समझौता सुचारू रूप से हो जाने पर चीन सहित अन्य देशों के लिए निर्यात अधिक होने की संभावना है।, क्योंकि इस बार अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में जीरे के भाव ऊंचे चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जॉर्डन तुर्की सीरिया आदि सभी खाड़ी के जीरा उत्पादक देशों में फसल नष्ट हो गई है, वहां की स्थिति खराब हो गई है, इसलिए हमारा निर्यात चीन सहित अन्य देशों के लिए भरपूर होने की संभावना है, इन परिस्थितियों में 5-7 रुपए प्रति किलो का मंदा आना तो कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन नीचे वाले भावों में खरीद करना चाहिए, थोड़ा करेक्शन आने के बाद बाजार निर्यात मांग निकलते ही उछल जाएगा। हम मानते हैं कि गर्मी बढऩे से ए टू जेड सभी मार्केट में ग्राहकी का पूरी तरह पलायन दिखाई दे रहा है। अत: धैर्य रखने की बात है, जीरे का भविष्य इस बार बढिय़ा दिखाई दे रहा है। इधर बाड़मेर जोधपुर लाइन में भी जो फसल आ रही है, उस पर  ‘हीट वेव्स’ का प्रभाव दिखाई दे रहा है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव की जीरे में अब घबराने की बिलकुल जरुरत नहीं है, जो जीरा 258-260 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वह 300 रुपए को छू सकता है।

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