मकई में बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक रबी व खरीफ सीजन की सभी फसलें पिछले वर्ष नुकसानदायक रही हैं। इसी कारण से इस बार बिहार में किसानों ने बिजाई कम किया है तथा सकल उत्पादन में कमी होने से मंडियों में नीचे भाव से 200/250 रुपए प्रति क्विंटल की एक पखवाड़े में तेजी आ गई है तथा 300 रुपए और बढऩे के आसार दिखाई दे रहे हैं। बिहार के मानसी गुलाब बाग दरभंगा खगडिय़ा बिहारीगंज सेमापुर बेगूसराय पानीपतरा पूर्णिया आदि सभी क्षेत्रों में मक्की आने लगी है, लेकिन पुराना स्टॉक अधिक होने एवं पिछले वर्ष के घाटे से किसानों द्वारा बिजाई कम किया गया था। यही कारण है कि उत्पादन कम होने से मंडियों में आवक का प्रेशर नहीं बन पा रहा है। जो माल आ रहा है, वह हाथों-हाथ बिकता जा रहा है। गुलाब बाग दरभंगा एवं पूर्णिया लाइन में मक्की 1650/1700 रुपए प्रति कुंतल एक पखवाड़े पहले नीचे में बिकने के बाद वर्तमान में छलांग लगाकर 1850/1900 रुपए हो गई है तथा गोदाम पहुंच में 1950 रुपए तक सूखी मकई के लिवाल आ गए हैं। हरियाणा पंजाब पहुंच में भी सूखी मक्की 2250/2300 रुपए तक बोलने लगे हैं। मक्की का उत्पादन बिहार में गत वर्ष 85 लाख मीट्रिक टन के करीब हो गया था, जो इस बार घटकर 70-71 लाख मीट्रिक टन रह जाने का अनुमान आ रहा है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश की मकई 90 प्रतिशत निपट चुकी है, चावल टुकड़ा एवं मोटा चावल नीचे के भाव से काफी बढ़ गया है, जिससे एथेनॉल कंपनियों को वर्तमान भाव की मक्की के पड़ते लग रहे हैं, इन परिस्थितियों में आगे मक्की में 300 रुपए प्रति कुंतल की जल्दी और तेजी लग रही है। गौरतलब है कि यूपी में भी मक्की की बिजाई ज्यादा नहीं हुई है। दूसरी ओर प्रांतवार सभी मक्की निबत चुकी है। हम मानते हैं कि बिहार में पिछले वर्ष की भी मक्की, कुछ स्टाक में गुलाब बाग दरभंगा पूर्णिया आदि मंडियों में पड़ी है, लेकिन उत्पादन में भारी कमी को देखते हुए वर्तमान भाव की मक्की में आगे चलकर भरपूर लाभ मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। अत: अभी हर भाव में मक्की की लिवाली करते रहनी चाहिए। अभी मक्की की खरीद बड़ी कंपनियां कम कर रही हैं, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि बाजार नीचे आएगा, लेकिन यह उल्टा चल पड़ा है। अत: नीचे वाले भाव अब सपने लग रहे हैं।