आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंड़ी में लालमिर्च की आवक में कमी आई है। साथ ही फिलहाल इसकी क्वालिटी भी हल्की आने लगी है। इसकी वजह से निर्यातक भी बाजार से दूरी बनाने लगे हैं। आगामी समय में लालमिर्च में तेजी की उम्मीद अब कमजोर पडऩे लगी है। लालमिर्च की तेजी-मंदी के सम्बन्ध में नवीनतम जानकारियां मिलती रहती हैं और उन्हें इससे लाभ भी होता है। आंध्र प्रदेश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में नई फसल की लालमिर्च की आवक में हाल ही में कमी आई है। अंतिम सूचना के समय राज्य की गुंटूर मंड़ी में इस प्रमुख किराना जिंस की आवक द्वारा 1.50 लाख बोरियों के ऊंचे स्तर को छूने के बाद फिलहाल इसकी आवक घटकर करीब 70 हजार बोरियों की होने की जानकारी मिली हैं। आवक में कमी आने के साथ-साथ इसकी क्वालिटी भी हल्की आनी शुरू हो गई है। इसकी वजह से निर्यातकों ने भी बाजार से दूरी बनानी आरंभ कर दी है। तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी आवक द्वारा करीब 40 हजार बोरियों का स्तर छूने के बाद फिलहाल वहां इसकी करीब 25-30 हजार बोरियों की आवक की हो रही है। इस बार लालमिर्च का उत्पादन करीब 25-30 प्रतिशत नीचा होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। इधर, स्थानीय थोक किराना बाजार में 334 नंबर लालमिर्च में हाल ही में 500 रुपए तेज होकर फिलहाल 23,000/25,000 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर बनी हुई है। इससे पूर्व हाल ही में इसमें इतनी ही तेजी आई थी। बहरहाल, बढ़ी कीमत पर भी लिवाली का समर्थन बना होने से गुंटूर में 334 नंबर लालमिर्च फिलहाल 20,000/22,500 रुपए प्रति क्विंटल पर 1000-1500 रुपए मंदी हुई। 341 नंबर 18,000/21,500 रुपए पर एक हजार रुपए मंदी हो गई। फटकी लालमिर्च 12/15 हजार रुपए के पूर्वस्तर पर जमी रही। अन्य किस्मों की लालमिर्च में भी ऐसी ही मंदी आने की सूचना मिली। इसी प्रकार, तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी फटकी लालमिर्च फिलहाल 12,500/15,500 रुपए प्रति क्विंटल के बनी होने की जानकारी मिली। 341 नंबर 19/22 हजार रुपए पर डटी हुई है। उधर, मसाला बोर्ड के आंकड़ो के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष दस महीनों यानी अप्रैल-जनवरी, 2025-26 में लालमिर्च का मात्रात्मक निर्यात तुलनात्मक रूप से 18 प्रतिशत बढक़र 5,72,757 क्विंटल हो गया। आय भी 3 प्रतिशत बढक़र 8150.34 करोड़ रुपए हुई। एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में देश से 7889.78 करोड़ रुपए कीमत की 4,84,219 टन लालमिर्च का निर्यात हुआ था।