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12-05-2026

मंडियों में मोठ की आवक टूटी, फिर तेजी की संभावना प्रबल हुई

  •  मोठ का पुराना स्टाक अधिक बचने से उत्पादन में पोल के बावजूद अपेक्षित तेजी नहीं बन पाई है। अब नमकीन निर्माताओं की पकड़ मजबूत होने के साथ-साथ स्टॉकिस्ट भी लिवाली में आ गए हैं, जिस कारण नीचे के भाव से बाजार बढ़ गए हैं तथा आगे 8-10 रुपए प्रति किलो की तेजी की संभावना प्रबल हो गई हैं। मोठ की फसल गत सितंबर अक्टूबर में आई थी। इसका उत्पादन केवल राजस्थान में होता है, लेकिन मौसम प्रतिकूल होने से बिजाई के अनुरूप फसल नहीं उतरी थी। दूसरी ओर नई फसल आने में अभी 6 महीने का समय बाकी है। इसकी फसल मेड़ता बीकानेर बाड़मेर नागौर दौसा डीडवाना लाइन में मुख्य रूप से होता है। गत वर्ष सीजन में ही स्टाकिस्टों की लिवाली के चलते पूरे वर्ष बाजार ज्यादा नहीं बढ़ पाए, जिस कारण कारोबारियों को भारी नुकसान लगा था। दूसरी ओर किसानों ने बिजाई ज्यादा नहीं किया। इन सब के बावजूद भी गत वर्ष घाटा लगने से सितंबर से नवंबर तक पुराने माल कारोबारी घटाकर बेचने लगे तथा नए स्टॉकिस्ट मैदान में नहीं आने से बाजार उत्पादक मंडियों में लुढक़ कर 40/42 रुपए लूज में रह गया। यहां भी 46 रुपए प्रति किलो नीचे में रह गया था, जो वर्तमान में 51/51.5 रुपए प्रति किलो हो गया है। इस समय निचले भाव पर बीकानेर एवं नोहर लाइन के कंपनियों की चौतरफा लिवाली बढ़ गई, जिससे राजस्थान के कारोबारी बिकवाल कम आ रहे हैं। उत्पादक मंडियों में पुराने माल औने-पौने भाव में कट चुके हैं तथा नया माल बढिय़ा कम मिल रहा है, जिस कारण लूज में ही वहां भाव 46.5/47 रुपए बोलने लगे हैं। वास्तविकता यह है कि बैसाखी के बाद से भुजिया नमकीन में चालानी मांग और बढऩे वाली है, क्योंकि अप्रैल से जुलाई तक जबरदस्त शादियां हैं तथा खपत वाले उद्योग भी पिछले साल की आई भारी गिरावट के बाद माल खरीद नहीं पाए थे, उनकी अब हर भाव में पकड़ मजबूत हो गई है। धोया मिलें भी खाली चल रही है, जिस कारण मोठ में मांग चौतरफा बढ़ गई है। ऐसा आभास हो रहा है कि मई-जून में मोठ 60 रुपए प्रति किलो बन जाएगी। गौरतलब है कि इसकी फसल सितंबर से चल रही है, इसलिए अभी खपत के लिए लंबा समय बाकी है तथा मंडियों में आपूर्ति टूटने लगी है। हल्की भारी मूंग निपट चुकी हैं, इसलिए सिलेक्टेड मूंग 85/90 रुपए प्रति किलो के बीच बिक रही है, हल्के मालों में धोया बनाने वाली मिलों की खपत अच्छी चल रही है, जिस कारण काफी माल निपट चुका है। इसका प्रभाव मोठ के व्यापार पर भी पडऩे लगा है।

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मंडियों में मोठ की आवक टूटी, फिर तेजी की संभावना प्रबल हुई

 मोठ का पुराना स्टाक अधिक बचने से उत्पादन में पोल के बावजूद अपेक्षित तेजी नहीं बन पाई है। अब नमकीन निर्माताओं की पकड़ मजबूत होने के साथ-साथ स्टॉकिस्ट भी लिवाली में आ गए हैं, जिस कारण नीचे के भाव से बाजार बढ़ गए हैं तथा आगे 8-10 रुपए प्रति किलो की तेजी की संभावना प्रबल हो गई हैं। मोठ की फसल गत सितंबर अक्टूबर में आई थी। इसका उत्पादन केवल राजस्थान में होता है, लेकिन मौसम प्रतिकूल होने से बिजाई के अनुरूप फसल नहीं उतरी थी। दूसरी ओर नई फसल आने में अभी 6 महीने का समय बाकी है। इसकी फसल मेड़ता बीकानेर बाड़मेर नागौर दौसा डीडवाना लाइन में मुख्य रूप से होता है। गत वर्ष सीजन में ही स्टाकिस्टों की लिवाली के चलते पूरे वर्ष बाजार ज्यादा नहीं बढ़ पाए, जिस कारण कारोबारियों को भारी नुकसान लगा था। दूसरी ओर किसानों ने बिजाई ज्यादा नहीं किया। इन सब के बावजूद भी गत वर्ष घाटा लगने से सितंबर से नवंबर तक पुराने माल कारोबारी घटाकर बेचने लगे तथा नए स्टॉकिस्ट मैदान में नहीं आने से बाजार उत्पादक मंडियों में लुढक़ कर 40/42 रुपए लूज में रह गया। यहां भी 46 रुपए प्रति किलो नीचे में रह गया था, जो वर्तमान में 51/51.5 रुपए प्रति किलो हो गया है। इस समय निचले भाव पर बीकानेर एवं नोहर लाइन के कंपनियों की चौतरफा लिवाली बढ़ गई, जिससे राजस्थान के कारोबारी बिकवाल कम आ रहे हैं। उत्पादक मंडियों में पुराने माल औने-पौने भाव में कट चुके हैं तथा नया माल बढिय़ा कम मिल रहा है, जिस कारण लूज में ही वहां भाव 46.5/47 रुपए बोलने लगे हैं। वास्तविकता यह है कि बैसाखी के बाद से भुजिया नमकीन में चालानी मांग और बढऩे वाली है, क्योंकि अप्रैल से जुलाई तक जबरदस्त शादियां हैं तथा खपत वाले उद्योग भी पिछले साल की आई भारी गिरावट के बाद माल खरीद नहीं पाए थे, उनकी अब हर भाव में पकड़ मजबूत हो गई है। धोया मिलें भी खाली चल रही है, जिस कारण मोठ में मांग चौतरफा बढ़ गई है। ऐसा आभास हो रहा है कि मई-जून में मोठ 60 रुपए प्रति किलो बन जाएगी। गौरतलब है कि इसकी फसल सितंबर से चल रही है, इसलिए अभी खपत के लिए लंबा समय बाकी है तथा मंडियों में आपूर्ति टूटने लगी है। हल्की भारी मूंग निपट चुकी हैं, इसलिए सिलेक्टेड मूंग 85/90 रुपए प्रति किलो के बीच बिक रही है, हल्के मालों में धोया बनाने वाली मिलों की खपत अच्छी चल रही है, जिस कारण काफी माल निपट चुका है। इसका प्रभाव मोठ के व्यापार पर भी पडऩे लगा है।


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