अनारदाना का उत्पादन कम होने तथा मांग बढऩे से इसकी कीमतों में तेजी के आसार बने हुए हैं। मंडियो में अच्छी क्वालिटी वाले अनारदाना की कमी बनी हुई है, हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में अनारदाना की फसल इस साल पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। आगामी दिनों में 30/40 रुपए प्रति किलो की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। स्थानीय थोक किराना बाजार में अनारदाना की कीमतों में उत्पादन में भारी गिरावट आने से तेजी देखने की मिल रही है। जानकारों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस सीजन में कम बारिश और बेमौसम गर्मी के कारण अनार की फसल पर बुरा असर पड़ा है। हिमाचल के जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने भी जंगली अनार के पेड़ों को काफी नुकसान पहुँचाया है, जिससे उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रह गया है। आजादपुर मंडी में अनार की आवक गुजरात से हो रही है। आज वहां पर आवक 14 गाड़ी के आसपास बताई जा रही है। गुजरात का भाव 1200 रुपए प्रति 9 किलो बिक रहा है। हाल ही में अनारदाना की कीमतों में 20 रुपए की तेजी आने से शिमला क्वालिटी के भाव बढक़र 850/870 रुपए सोलन 500/510 रुपए सांगली 220/230 रुपए प्रति किलो हो गए। व्यापारियों का कहना है कि, अनारदाना का उत्पादन करीब 50 प्रतिशत कम हुआ है। पाकिस्तान से अनारदाने का आयात बंद होने के कारण भी घरेलू बाजार में आपूर्ति कम हो गई है और स्थानीय मांग बढ़ गई है। मसाला, एवं आयुर्वेदिक कपनियां जैसे पतंजलि, एमडीए, एवरेस्ट और रुचि जैसी बड़ी मसाला कंपनियों द्वारा स्थानीय कारोबारियों से सीधे खरीद के कारण भी दाम ऊंचे बने हुए हैं। हिमाचल के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी पानी की कमी से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे स्थानीय मंडियों में माल की आवक कम हो रही है। एक अन्य ने बताया कि, इस साल अनार की प्रमुख खेती वाले क्षेत्रों जैसे महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में मौसम की अनिश्चितता रही है। कुछ क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे अच्छी गुणवत्ता वाले अनारदाना की आवक मंडियों में कम रही है। भारतीय अनार और इसके उत्पादों जैसे अनारदाना की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग काफी बढ़ी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अनार के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। घरेलू माल का बड़ा हिस्सा निर्यात होने के कारण स्थानीय बाजारों में स्टॉक की कमी हो गई है, जो कीमतों को ऊपर ले जा रहा है।