नया जायफल चारों तरफ मंडियों में आ रहा है। दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव होने के बावजूद पिछले एक सप्ताह से ग्राहकी कमजोर होने से 15/20 रुपए प्रति किलो नीचे आ गया है। अब इन भावों में उत्पादक मंडियों से निर्यातकों की पूछ परख आने लगी है तथा उत्पादक मंडियों में आवक हैं, जिसकारण डिलीवरी के लिए पीछे से माल महंगा मिल रहा है, इसे देखते हुए इसमें करेक्शन के बाद फिर तेजी लग रही है। जायफल की फसल एर्नाकुलम लाइन में आ चुकी है, प्रतिकूल मौसम होने से कच्चे माल ज्यादा नुकसान हो गए थे, इस वजह से मंडियों में माल की आपूर्ति कम हो रही है। हम मानते हैं कि इस बार पुराना जायफल का स्टॉक अधिक बचा था, नये माल की दहशत से बाजार घट गया है। विदेशों में माल की कमी से भाव वहां 50-60 डॉलर प्रति टन बढ़ाकर बोल रहे हैं। पिछले दिनों इसके भाव 780 रुपए प्रति किलो हो गए थे, लेकिन ग्राहकी कमजोर होने से बाजार घटकर 750 रुपए रह गया है। नीचे के भाव से बाजार अभी भी ऊंचा चल रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इंडोनेशिया एवं श्रीलंका में ऊंचे भाव होने से हमारा निर्यात अधिक होने की संभावना है। इस समय निर्यातक एर्नाकुलम लाइन से पूछपरख करने लगे हैं। नई माल आने से अभी हाल ही में 100-125 डॉलर घटकर श्रीलंका में 7600 डॉलर एवं इंडोनेशिया में 7800 डॉलर प्रति टन के आसपास बढिय़ा जायफल रह गया है। अभी भी भारतीय जायफल सबसे सस्ता खपत वाले देशों में पड़ रहा है, जिससे यूएसए यूएई चीन सहित मेडलिस्ट देशों की पूछ परख आ रही है। एर्नाकुलम ऑनलाइन की तैयार फसल का प्रेशर नहीं बन रहा है, इसे देखते हुए थोड़ा ठहर कर फिर तेजी लग रही है। यहां भी इसके भाव दब गए है। आगे माल का दबाव बनना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि प्रतिकूल मौसम से फसल को व्यापक नुकसान का आभास हो रहा है। गौरतलब है कि जावित्री एवं जायफल एक ही वृक्ष पर होने वाले फूल एवं फल हैं। नयी जावित्री वर्तमान सीजन में 2250/2600 रुपए बोल रहे हैं। उत्पादक मंडियों से आज की तारीख में जावित्री यहां मंगाने पर पड़ता नहीं आ रहा है। दूसरी ओर इस बार चूरा माल कम निकल रहा है तथा सिंगापुरी पहले से ही नीचे भाव में बिक रही है, इन परिस्थितियों में एक बार नए माल का दबाव बनने पर बाजार ऊपर वाले माल के 200/300 रुपए घट सकते हैं, जबकि जायफल में और मंदा नहीं लग रहा है।