उत्तर भारत में शादियों की खपत बढऩे एवं प्लास्टिक, पेट्रोलियम उत्पाद, गैस आदि की किल्लत से डेयरी उद्योग में लागत महंगी हो गई है। निर्यात किए हुए काफी कंटेनर लोडिंग में आ गए हैं, जिससे नए सौदे हो रहे हैं। वहीं मौसम की प्रतिकूलता से लिक्विड दूध की उपलब्धि काफी कम हो गई है, जिससे मंदे का तेजी का रुख बना हुआ है तथा आगे भी तेजी भरपूर दिखाई दे रही है। उत्तर भारत में इस समय जबरदस्त शादियों में लिक्विड दूध एवं दूध पाउडर की खपत बढ़ गई है। दूसरी ओर कंपनियों को लिक्विड दूध के कलेक्शन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, इंसेंटिव देने पर भी लिक्विड प्रोसेसिंग के लिए मिलना मुश्किल हो गया है। लिक्विड दूध की आपूर्ति 80 लाख मीट्रिक टन के करीब हो रही है, जिसमें 650-700 मेट्रिक टन दूध पाउडर एवं 500-550 मीट्रिक टन देसी घी बना रहा है। दूसरी ओर अधिकतर प्लांटों के माल आगे के बिके हुए हैं, क्योंकि पहले कंपनियां काफी मंदे में आ गई थी। इस तरह डेयरी उद्योग इस समय एक बार फिर लिक्विड दूध की परचेजिंग में संकट के दौर से गुजर रहा है। ग्राहकी का देसी घी दूध पाउडर में अपेक्षाकृत व्यापार कम जरूर चल रहा है, घरेलू खपत के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्लांटों से निर्यात व्यापार अच्छा हो रहा है। हम मानते हैं कि मिलावट करने वाले किसी भी भाव में प्रतिष्ठित ब्रांडों को भरकर बेच जा रहे हैं, जिस कारण बढिय़ा देसी घी की बिक्री ठप पड़ गई है। लिक्विड दूध की उपलब्धि एक बार फिर घटकर 80 लाख लीटर दैनिक उत्तर भारत के प्लांटों में रह गई है, जिस कारण इसके भाव बढ़ कर 59/60 रुपए प्रति लीटर के बीच हो गए हैं। इधर फैट की निर्यात में मांग बढ़ गई है। दूध पाउडर में भी 15 अप्रैल के बाद से शादियां होने से खपत बढ़ गई है, जिस कारण 10 रुपए प्रति किलो उक्त दोनों उत्पादों में हाल ही में तेजी आ गई है। यहां प्रीमियम क्वालिटी के देसी घी 9400/9600 रुपए प्रति टीन के बीच चल रहे हैं। दूध पाउडर भी 305/318 रुपए प्रति किलो पर नीचे के भाव से 10 रुपए एक पखवाड़े के अंतराल बढ़ गया है। आगे अमेरिका ईरान व इजरायल युद्ध के चलते पेट्रोलियम एवं प्लास्टिक उद्योग काफी महंगा हो गया है तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कील्लत होने से इंडस्ट्रीज नहीं चल पा रही है, इन परिस्थितियों में उक्त दोनों उत्पादों में अभी बाजार देसी घी का 150 रुपए प्रति टीन एवं दूध पाउडर का 10 रुपए प्रति किलो फिर बढ़ सकता है।