गत सप्ताह ग्राहकी का समर्थन न मिलने से बड़ी छोटी इलायची, जायफल, जावित्री, हल्दी, जीरा, धनिया, राई, मगज तरबूज, साबूदाना, गोंद कतीरा, किशमिश, बादाम, अंजीर, आबजोश, छुहारा, काजू, चिलगोजा के भाव मंदे बोले गए। वहीं दूसरी ओर मांग निकलने से कलौंजी, सौंठ, अनारदाना, चिरौंजी, इसबगोल भूसी, सिंघाड़ा, में तेजी दर्ज की गई। आलोच्य सप्ताह नेपाल में बड़ी इलायची में जो सट्टेबाजी से कीमतों में वृद्धि हुई थी, अब वह स्थिति सामान्य होने से आपूर्ति में सुधार हुआ है, जिससे कैंचीकट 15 रुपए घटकर 1625/1635 रुपए प्रति किलो रह गया। छोटी इलायची के उत्पादक केंद्रों जैसे केरल और तमिलनाडु की मंडियों में आवक बढऩे से आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे मुंहखुला के भाव 1000 रुपए गिरकर 24000/25000 रुपए रह गए। नये माल की दहशत से जायफल के भाव भी 20 रुपए घटकर 760/770 रुपए रह गए। मांग कमजोर होने से जावित्री के भाव 50 रुपए गिरकर लाल क्वालिटी 2100/2350 रुपए रह गई। हल्दी के ऊंचे भावों के कारण विदेशी खरीदार कम हो गए हैं, जिससे निर्यात कमजोर पड़ा है। पिछले साल के स्टॉक के साथ ही नई फसल का दबाव भी बाजार पर है, जिससे सट्टेबाजी की खबरें भी हैं। इरोड गट्टा के भाव 400 रुपए घटकर 15100/15200 रुपए प्रति क्विंटल रह गई। जीरे के उत्पादक क्षेत्रों जैसे ऊंझा और राजस्थान की मंडियों में रोजाना करीब 30,000 बोरी से अधिक आवक हो रही है। जिससे एवरेज क्वालिटी का भाव 500/600 रुपए घटकर 22700/23200 रुपए रह गए। मंडियों में राई की नई फसल की आवक लगातार बढ़ रही है जिससे इसके भाव 600 रुपए घटकर 12800/13000 रुपए रह गई। मगज तरबूज में सटोरियों द्वारा ऊंचे भाव पर माल बेचने के बाद अब डिलीवरी पूरी की जा रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसकी कीमतें 15 रुपए घटकर 525/530 रुपए रह गई। ग्राहकी के अभाव में साबूदाना के भाव भी 300/400 रुपए घटकर 5400/5500 रुपए रह गए।
गोंद कतीरा मांग कमजोर होने से 25 रुपए घटकर 325/375 रुपये पर आ गया। उधर मेवा में मांग कमजोर होने से किशमिश के भाव 500 रुपए घटकर इंडियन पीली 19000/20000 रुपए तथा आयातकों की बिकवाली आने से बादाम कैलिर्फोनिया भी 600 रुपए गिरकर 22000/22200 रुपए प्रति 40 किलो रह गया। अंजीर भी 500 रुपए घटकर 26500/28500 रुपए प्रति 40 किलो बोला गया। आबजोश की कीमतें 500 मंदा होकर 27000/35000 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।उधर छुहारा में मांग कमजोर होने से लाल क्वालिटी 500/1500 रुपए घटकर 10500/24000 रुपए बोला गया। गर्मी बढऩे के कारण मांग की कमी से काजू 20/30 रुपए नरम होकर 180 नंबर 1100/1130 रुपए प्रति किलो रह गया। चिलगोजा भी मांग कमज़ोर होने से 100 रुपए घटकर 3400/3700 रुपए प्रति किलो रह गया। वहीं दूसरी ओर कलौंजी के उत्पादक क्षेत्र राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों में कलौंजी का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में कम हुआ है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई है। मंडियों में इसकी नई फसल की आवक कम हो रही है, विशेषकर गुजरात और एमपी की प्रमुख मंडियों में, जो कीमतों को ऊपर धकेल रही है। इसके भाव भाव 1000 रुपए उछलकर 21000/21500 रुपए प्रति क्विंटल जा पहुंचे। उधर अदरक का उत्पादन कम होने से सौंठ बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ताज़ी अदरक उपलब्ध नहीं है, जिससे आपूर्ति कम हो रही है। मंडियों में आवक कम होने के कारण थोक व्यापारियों को ऊंचे दामों पर खरीदारी करनी पड़ रही है। जिससे एवरेज क्वालिटी के भाव 2000 रुपए तेज होकर 29500/30000 रुपए हो गए। हिमाचल प्रदेश के जंगलों में अनारदाना का उत्पादन इस साल पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम हुआ है। खपत वाली मंडियों से मांग बढऩे से शिमला क्वालिटी 20 रुपए बढक़र 840/860 रुपए प्रति किलो हो गया। चिरौंजी भी बिकवाली कमजोर होने से 50 रुपए बढक़र 1550/1650 रुपए तथा इसबगोल भूसी का उत्पादन कम होने से 30 रुपए तेज होकर 550/580 रुपए तथा सिंघाड़ा का भी उत्पादन कम होने से इसके भाव 5/10 रुपए बढक़र 150/160 रुपए हो गए।