ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध के चलते खाद्य तेलों में 28-30 रुपए प्रति किलो की उल्लेखनीय तेजी आ गई थी। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी 175/200 डॉलर प्रति टन का पाम ऑयल में भारी तेजी आ गई थी। इधर क्रूड ऑयल भी जो 62-63 डॉलर चल रहा था, उसके भाव 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा सीज फायर का एलान से तीन दिनों में सभी तरह खाद्य तेलों में मंदे का माहौल बन गया। दूसरी तरफ लिवाल पूरी तरह पीछे हट गए। विदेशी सभी खाद्य तेल भी टूट गए। उधर मलेशिया में भी 35-40 डॉलर प्रति टन की गिरावट आ गई। यही कारण है कि यहां सभी खाद्य तेलों में चार-पांच रुपए किलो की एक झटके में गिरावट आ गई है। दूसरी ओर तिलहनों में भी बिकवाली से भाव नीचे आ गए हैं। गौरतलब है कि पिछले 38-39 दिनों में जो अनावश्यक मानसिकता की तेजी बन गई थी, वह अब एक बार फिर मंदे में बदलने लगी है तथा आगे सीज फायर का ऐलान किया गया है, आगे ट्रंप सरकार उस पर कायम रहती है तो, खाद्य तेलों में तीन चार रूपए किलो की शीघ्र और गिरावट आ जाएगी। वर्तमान भाव पर सरसों सोयाबीन सीड एवं तेल की बिकवाली करते रहना चाहिए, जबकि नीचे वाले भाव में डीओसी का व्यापार करना चाहिए। गौरतलब है कि जयपुर में 42 प्रतिशत कंडीशन की सरसों 67 रुपए प्रति किलो मार्च में नीचे में अखिल भारतीय सेमिनार के बाद बन गई थी, उसके भाव पिछले सप्ताह 74.75 ऊपर में 42 प्रतिशत कंडीशन के बन गए थे, जो 2 दिन के अंतराल पुन: घटकर 73 रह गया है। तेल भी 152/153 रुपए बनने के बाद आज 147 रुपए प्रति किलो रह गया है। इसी तरह तेल सोया रिफाइंड 131 से उछल कर 153 रुपए प्रति किलो बनने के बाद 148149 रुपए इटारसी लाइन में हो गया है। इंदौर लाइन में भी इसी अनुपात में गिरावट आई है तथा इसी लाइन पर 3-4 रुपए प्रति किलो की और गिरावट इसी सप्ताह दिखाई दे रही है।