भारतीय शेयर बाजार इस समय अजीब दौर से गुजर रहा है। टीवी चैनलों पर हर दिन गिरते बाजार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगे होते कच्चे तेल और ग्लोबल तनाव की खबरें दिखाई दे रही हैं। छोटे निवेशक डरे हुए हैं और कई लोग यह मानने लगे हैं कि 2026 बाजार के लिए मुश्किल साल साबित होगा। लेकिन इसी डर और अनिश्चितता के बीच बाजार के एक छोटे हिस्से में ऐसी तेज़ी आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। जहां एक तरफ आधे से ज्यादा शेयर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ कंपनियों के शेयर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। खास बात यह है कि यह तेजी आईटी या बैंकिंग जैसे ट्रेडिशनल सेक्टर्स में नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल और कमोडिटी से जुड़े शेयरों में दिखाई दे रही है। एक विश्लेषण के अनुसार, बीएसई में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के मार्केट कैप वाली लिस्टेड 1,431 कंपनियों में करीब 47 प्रतिशत शेयर इस साल अब तक नुकसान में हैं। यानी बाजार का बड़ा हिस्सा अभी भी दबाव में है। लेकिन इसी दौरान 57 कंपनियों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देकर निवेशकों को शानदार कमाई कराई है। यह आंकड़ा एक बेहद दिलचस्प कहानी बताता है। बाजार अब हर कंपनी को इनाम नहीं दे रहा। अब निवेशक केवल उन्हीं कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जिनकी कमाई मजबूत है, ऑर्डर बुक लंबी है और आने वाले वर्षों की ग्रोथ साफ दिखाई देती है। इसी माहौल में कुछ कंपनियां बाजार की नई स्टार बनकर उभरी हैं। Schneider Electric के शेयर इस साल 70 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुके हैं। कंपनी ने अपना कर्ज कम किया है और बिजनेस की स्थिति पहले से मजबूत हुई है। कमोडिटी सेक्टर में भी जबरदस्त हलचल देखने को मिली। Welspun Corp और Gallantt Ispa जैसे शेयरों ने लगभग 60 प्रतिशत तक की तेजी दिखाई। घरेलू मांग मजबूत रहने और कीमतों में स्थिरता ने इन कंपनियों को बड़ा सहारा दिया। 2026 का बाजार एक नई सीख दे रहा है। अब केवल लोकप्रिय नामों में पैसा लगाने से काम नहीं चलेगा। निवेशकों को उन कंपनियों की पहचान करनी होगी जिनकी बुनियाद मजबूत है, कर्ज कम है और जिनके पास आने वाले वर्षों के लिए स्पष्ट ग्रोथ प्लान है। शायद यही वजह है कि बाजार में कमजोरी के बीच भी कुछ शेयर लगातार उड़ान भर रहे हैं।
