कई साल तक इंडिया इंक को प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री की न•ा यानी झिडक़ी मिलने के बाद आखिर प्राइवेट कैपेक्स की गाड़ी सरपट होने के संकेत मिलने लगे हैं। सीआईआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत का प्राइवेट कैपेक्स सितंबर 2025 में 67 परसेंट बढक़र 7.7 लाख करोड़ हो गया। बड़ी बात यह है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस दोनों बड़े सैक्टर में अब नया प्राइवेट इंवेस्टमेंट तेज हो रहा है। सीआईआई ने कहा है कि ईरान वॉर के कारण इंडस्ट्री पर कॉस्ट प्रेशर बढ़ रहे हैं ऐसे में सरकार को फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी को रोलबैक करना चाहिए। साथ ही सीआईआई ने सरकार को फाइव-पॉइंट प्लान भी सौंपा है। सीआईआई के अनुसार सितंबर 2025 (वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही) में प्राइवेट कैपेक्स सालाना आधार पर 67 परसेंट बढक़र 7.7 लाख करोड़ हो गया, जो एक साल पहले 4.6 लाख करोड़ था। प्राइवेट कैपेक्स में इस तेज ग्रोथ से ब्रॉडबेस्ड रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। सीआईआई ने ईरान वॉर के झटके से उबरने के लिए जो फाइव-पॉइंट प्रपोजल दिया है उसमें फ्यूल पर से एक्साइज ड्यूटी को घटाने के साथ ही कंपनियों द्वारा एनर्जी सेविंग, एमएसएमई के पेमेंट्स को फास्ट्रेक करना, सप्लाई चेन को मजबूत करना और प्राइवेट कैपेक्स बढ़ाना शामिल है। ट्रेड फोरम सीआईआई ने सीएमआईई (सेंटर फोर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी) प्रोवेस डेटाबेस से लगभग 1,200 कंपनियों का एनेलिसिस किया है और नेट फिक्स्ड असैट्स और कैपिटल वर्क के आधार पर यह डेटा रिपोर्ट तैयार की है। सीआईआई के अनुसार इसमें मैन्युफैक्चरिंग का शेयर 3.8 लाख करोड़, या कुल प्राइवेट कैपेक्स का लगभग आधा था और इसमें भी सबसे ज्यादा योगदान मेटल, ऑटोमोबाइल व केमिकल सैक्टर का रहा। वहीं सर्विसेस सैक्टर का कुल प्राइवेट कैपेक्स 3.1 लाख करोड़ था जिसमें ज्यादातर योगदान ट्रेड, कम्यूनिकेशन व आईटी/आईटीईएस का था। सीआईआई के अनुसार प्राइवेट कैपेक्स के साथ ही अन्य इकोनॉमिक इंडिकेटर में भी बेहतर गतिविधि का संकेत मिल रहा है। जैसे मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पिछली तिमाही में 74.3% से बढक़र वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में 75.6' हो गया। न्यू ऑर्डर बुक में 10.3% की ग्रोथ हुई, जबकि वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में बैंक क्रेडिट ग्रोथ औसत 14% रही जो पहली छमाही में यह लगभग 10% थी। सआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, प्राइवेट कैपेक्स का 67% ग्रोथ के साथ 7.7 लाख करोड़ तक पहुंचना, अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है कि भारत का इंवेस्टमेंट साइकल अब ऊपर की ओर मुड़ गया है। अपने फाइव-पॉइंट एजेंडे में सीआईआई ने क्रूड ऑइल की प्राइस स्थिर होने पर पेट्रोल और डीजल पर 10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी को छह से नौ महीनों में चरणबद्ध तरीके से वापस लेने का प्रस्ताव रखा। बनर्जी के अनुसार इससे इकोनॉमी को मल्टीप्लायर इफेक्ट का फायदा मिलेगा। साथ ही अगली दो तिमाहियों में कंपनियों से फ्यूल और बिजली खपत को 3-5% तक कम करने के लिए भी कहा। साथ ही एमएसएमई को 45-दिन में पेमेंट करने की मांग की है। भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ पिछले तीन वर्ष में औसत 7.3% रही और वित्त वर्ष 26 में 7.6% से अधिक होने की उम्मीद है। इस दौरान राजकोषीय घाटा कोविड काल के 9.2% से घटकर वित्त वर्ष25 में जीडीपी का 4.5% हो गया। सीआईआई ने कहा है कि वित्त वर्ष26 में एक्सपोर्ट $863 बिलियन के रिकॉर्ड लेवल पर रहा और विदेशी मुद्रा भंडार $700 बिलियन को पार कर गया।
