भारत सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर दी है। नई व्यवस्था के तहत सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर 10 परसेंट बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 परसेंट एग्रीकल्चर सैस लगाया है। इस तरह कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 15 परसेंट हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का मकसद भारत में गोल्ड और सिल्वर की डिमांड को कमजोर करना है। इससे व्यापार घाटा कम करने और कमजोर होते रुपये को सहारा देने में मदद मिलेगी। हाल के महीनों में बढ़ते आयात और महंगे तेल के कारण भारत के चालू खाते तथा विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से एक वर्ष तक गोल्ड परचेज को टालने की अपील की थी। भारत अपनी लगभग पूरी सोने की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार मार्च तिमाही में भारत के गोल्ड ईटीएफ में निवेश 186 परसेंट बढक़र रिकॉर्ड 20 टन तक पहुंच गया। इससे पहले सरकार ने गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट पर 3 परसेंट आईजीएसटी लगाया गया था, जिसके बाद बैंकों ने एक महीने से अधिक समय तक इंपोर्ट रोक दिया था। इसकी वजह से अप्रैल में गोल्ड का इंपोर्ट लगभग 30 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंपोर्ट ड्यूटी बढऩे से सोना 8550 रुपये और चांदी 20500 रुपये महंगी, बाजार में अफरातफरी इंपोर्ट ड्यूटी बढऩे से गोल्ड और सिल्वर में तेजी सरकार द्वारा ने कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। गोल्ड का दाम 8,550 रुपये बढक़र 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक हो गया। वहीं, सिल्वर 20,500 रुपये प्रति किलोग्राम की जबरदस्त वृद्धि हुई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सिल्वर 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम से बढक़र 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। वहीं गोल्ड 8,550 रुपये बढक़र 1,65,350 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। प्लेटिनम पर भी इंपोर्ट ड्यूटी 6.4 से बढ़ाकर 15.4 परसेंट कर दिया। दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.80 के नए लो लेवल पर पहुंच गया। जबकि क्रूड ऑइल की प्राइस एक बार फिर 100 डॉलर के लेवल को पार करते हुए 101.79 डॉलर के लेवल पर पहुंच गई।