आरबीआई द्वारा जारी किए गए विदेशी मुद्रा भंडार (फोरेक्स रिजर्व) की अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में ही सुरक्षित रखे गए गोल्ड की मात्रा सितंबर 2025 के अंत में 575.8 टन से बढक़र मार्च 2026 के अंत में 680 टन हो गई। इसका सीधा अर्थ है कि आरबीआई छह महीने में 104.2 टन गोल्ड देश में लाया। बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास सुरक्षित रखे गए गोल्ड की मात्रा 290.4 टन से घटकर 197.7 टन रह गई। आरबीआई के पास कुल गोल्ड होल्डिंग की वेल्यू सितंबर 2025 के अंत में (880.2 टन) 97.4 बिलियन डॉलर से मामूली बढक़र मार्च 2026 के अंत में (880.5 टन) 115.4 बिलियन डॉलर हो गई। कुल फोरेक्स रिजर्व में गोल्ड का शेयर (वेल्यू के आधार पर) 13.9 से बढक़र 16.7 परसेंट हो गया। जियो-पॉलिटिकल तनाव बढऩे के बीच, कई केंद्रीय बैंक संप्रभुता को बढ़ावा देने और फोरेन असैट्स के सीज हो जाने की रिस्क को कम करने के लिए अपने गोल्ड असैट्स वापस देश में ला रहे हैं। फ्रांस के बैंके डी फ्रांस ने 2026 की शुरुआत में न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व से पेरिस के वॉल्ट में 129 टन गोल्ड को अपने यहां ट्रांसफर किया है। आरबीआई ने पहले 2023 से 2025 के दौरान 274 से 280 टन गोल्ड वापस मंगाया था। सर्बिया के नेशनल बैंक ने जुलाई 2025 में लगभग $6 बिलियन डॉलर के गोल्ड का पूरा स्टॉक अपने कब्जे में ले लिया है। जर्मनी के ड्यूश बुंडेसबैंक न्यूयॉर्क में अपने 1,236 टन के लिए विकल्पों पर विचार कर रहा है। जर्मनी में तो विदेशों में रखा गोल्ड राजनीतिक बहस का कारण बन गया है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के अनुसार 2025 तक 59 परसेंट केंद्रीय बैंकों ने 2020 में 50 परसेंट से अधिक गोल्ड वापस मंगाया जिनमें से ज्यादातर विकासशील देश हैं। आरबीआई के फोरेन करेंसी असैट्स सितंबर 2025 के 579.2 बिलियन डॉलर से घटकर मार्च 2026 के अंत में 552.3 बिलियन डॉलर के रह गए। इनमें सिक्यॉरिटीज में इंवेस्टमेंट 489.5 बिलियन डॉलर से घटकर 465.6 बिलियन डॉलर रह गया। अन्य केंद्रीय बैंकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स में डिपॉजिट्स 46.1 बिलियन डॉलर से मामूली बढक़र 46.8 बिलियन डॉलर हो गये। जबकि फोरेन कमर्शियल बैंकों में डिपॉजिट्स 43.5 बिलियन डॉलर से घटकर 39.8 बिलियन डॉलर रह गए।