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14-05-2026

Agriculture से Service Economy की ओर बढ़ रहा इंडिया

  •  इंडिया की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ खेतों की कहानी नहीं रही। देश धीरे-धीरे उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां सर्विस सेक्टर रोजगार का नया इंजन बनता दिख रहा है। कभी खेती इंडिया की पहचान थी, लेकिन अब IT, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल सेवाएं लाखों लोगों के लिए नई नौकरी का आधार बन रही हैं। PLFS 2025 रिपोर्ट बताती है कि इंडिया की वर्कफोर्स अब एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रांजिशन से गुजर रही है। 1987-88 में जहां देश की 66' आबादी एग्रीकल्चर सेक्टर में काम करती थी, वहीं 2025 तक यह हिस्सा घटकर 43% रह गया है। दूसरी तरफ सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार बढ़ते हुए लगभग 44% तक पहुंच चुकी है। यानी इंडिया अब Agriculture Economy से Service Economy की ओर तेजी से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया। पिछले तीन दशकों में इंडिया की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे खेती आधारित मॉडल से निकलकर सर्विसेज और शहरी रोजगार की तरफ शिफ्ट हुई है। गांवों से शहरों की ओर पलायन, इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी का विस्तार, स्टार्टअप कल्चर और सर्विस इंडस्ट्री का तेजी से बढऩा इसकी बड़ी वजहें हैं। हालांकि एग्रीकल्चर की भूमिका अभी भी खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक आज भी देश की 43% वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है। महामारी के बाद ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने कृषि रोजगार में गिरावट की रफ्तार को और धीमा किया है। यानी खेती अब भी इंडिया की सामाजिक और आर्थिक रीढ़ बनी हुई है।  लेकिन असली बदलाव नॉन-एग्री सेक्टर में दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार छोटे और मझोले नॉन-एग्री उद्यमों में बड़ी संख्या में लोग काम कर रहे हैं। 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों में 38.4% लोग रोजगार पा रहे हैं, जबकि 20 से ज्यादा कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनियों में रोजगार हिस्सेदारी बढक़र 13.7% तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा 2024 में सिर्फ 10.8% था।  लेकिन इस बदलाव की सबसे बड़ी चुनौती Quality Employment है। सिर्फ खेती से बाहर निकलना काफी नहीं होगा, बल्कि लोगों को बेहतर वेतन, सोशल सिक्योरिटी और स्टेबल नॉकरियां भी देनी होंगी। क्योंकि अगर रोजगार इनफार्मल ही रहा, तो इकोनॉमिक ट्रांजीशन अधूरा रह जाएगा। इंडिया की नई कहानी अब सिर्फ ‘खेती प्रधान देश’ की नहीं है। अब यह एक ऐसे देश की कहानी है जो खेतों से निकलकर सर्विस इकॉनमी की तरफ बढ़ रहा है- और यही बदलाव आने वाले इंडिया की सबसे बड़ी आर्थिक पहचान बन सकता है।

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Agriculture से Service Economy की ओर बढ़ रहा इंडिया

 इंडिया की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ खेतों की कहानी नहीं रही। देश धीरे-धीरे उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां सर्विस सेक्टर रोजगार का नया इंजन बनता दिख रहा है। कभी खेती इंडिया की पहचान थी, लेकिन अब IT, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल सेवाएं लाखों लोगों के लिए नई नौकरी का आधार बन रही हैं। PLFS 2025 रिपोर्ट बताती है कि इंडिया की वर्कफोर्स अब एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रांजिशन से गुजर रही है। 1987-88 में जहां देश की 66' आबादी एग्रीकल्चर सेक्टर में काम करती थी, वहीं 2025 तक यह हिस्सा घटकर 43% रह गया है। दूसरी तरफ सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार बढ़ते हुए लगभग 44% तक पहुंच चुकी है। यानी इंडिया अब Agriculture Economy से Service Economy की ओर तेजी से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया। पिछले तीन दशकों में इंडिया की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे खेती आधारित मॉडल से निकलकर सर्विसेज और शहरी रोजगार की तरफ शिफ्ट हुई है। गांवों से शहरों की ओर पलायन, इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी का विस्तार, स्टार्टअप कल्चर और सर्विस इंडस्ट्री का तेजी से बढऩा इसकी बड़ी वजहें हैं। हालांकि एग्रीकल्चर की भूमिका अभी भी खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक आज भी देश की 43% वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है। महामारी के बाद ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने कृषि रोजगार में गिरावट की रफ्तार को और धीमा किया है। यानी खेती अब भी इंडिया की सामाजिक और आर्थिक रीढ़ बनी हुई है।  लेकिन असली बदलाव नॉन-एग्री सेक्टर में दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार छोटे और मझोले नॉन-एग्री उद्यमों में बड़ी संख्या में लोग काम कर रहे हैं। 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों में 38.4% लोग रोजगार पा रहे हैं, जबकि 20 से ज्यादा कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनियों में रोजगार हिस्सेदारी बढक़र 13.7% तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा 2024 में सिर्फ 10.8% था।  लेकिन इस बदलाव की सबसे बड़ी चुनौती Quality Employment है। सिर्फ खेती से बाहर निकलना काफी नहीं होगा, बल्कि लोगों को बेहतर वेतन, सोशल सिक्योरिटी और स्टेबल नॉकरियां भी देनी होंगी। क्योंकि अगर रोजगार इनफार्मल ही रहा, तो इकोनॉमिक ट्रांजीशन अधूरा रह जाएगा। इंडिया की नई कहानी अब सिर्फ ‘खेती प्रधान देश’ की नहीं है। अब यह एक ऐसे देश की कहानी है जो खेतों से निकलकर सर्विस इकॉनमी की तरफ बढ़ रहा है- और यही बदलाव आने वाले इंडिया की सबसे बड़ी आर्थिक पहचान बन सकता है।


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