अमेरिका में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को बड़ा झटका देते हुए न्यूयॉर्क के यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 10 परसेंट विशेष अस्थायी ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले को केवल दो इंपोर्टर और केवल वॉशिंगटन राज्य तक लिमिट कर दिया है। अदालत के 2-1 फैसले का मतलब है कि बाकी सभी इंपोर्टर के लिए ये 10 परसेंट टैरिफ फिलहाल पहले की जारी रहेगा, जब तक ट्रंप प्रशासन की अपील प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। ये अस्थायी शुल्क जुलाई में समाप्त होने वाले हैं। अदालत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया। यह प्रावधान गंभीर बैलेंस ऑफ पेमेंट्स संकट या डॉलर में तेज गिरावट की स्थिति में अधिकतम 150 दिनों तक 15' शुल्क लगाने की अनुमति देता है। लेकिन अदालत का मत था कि अभी अमेरिका का जो व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) है वो इतना नहीं है कि आपातकालीन विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए टैरिफ लगाया जाए। यह फैसला ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ स्ट्रेटेजी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब अगले सप्ताह ट्रंप की चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ व्यापार तनाव पर चर्चा होने वाली है। इससे पहले भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के 2025 के व्यापक टैरिफ को नेशनल एमरजेंसी एक्ट के तहत असंवैधानिक ठहरा चुका है। उसके बाद ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 122 का सहारा लिया था। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अदालत के दो न्यायाधीशों को ...कट्टर वामपंथी... बताया और कहा कि अदालतों के फैसलों से उन्हें अब कोई आश्चर्य नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन अन्य कानूनी रास्तों से फिर टैरिफ लागू कर सकता है। ट्रंप प्रशासन अब 1974 के ट्रेड एक्ट की ही धारा 301 के तहत स्थायी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। यह प्रावधान ...अनुचित व्यापार प्रथाओं... के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है। फिलहाल सेक्शन 301 के तहत तीन जांच चल रही हैं, जिनके जुलाई तक पूरा होने की संभावना है। यह मुकदमा टॉय कंपनी बेसिक फन और मसाला इंपोर्टर बरलैप एंड बैरेल ने दायर किया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश अमेरिकी राज्यों को इस टैरिफ को रिजेक्ट करने की मांग करने का अधिकार नहीं है क्योंकि क्योंकि वे सीधे इंपोर्टर नहीं थे। केवल वॉशिंगटन राज्य ने यह साबित किया कि उसकी कंपनियों ने वास्तव में ये टैरिफ चुकाए हैं। एक्सपर्ट्स का का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा और तब तक अधिकतर 10 परसेंट टैरिफ वसूले जाते रहेंगे। हालांकि आने वाले महीनों में यह कानूनी लड़ाई और लंबी हो सकती है।