भारत में कैश (सीआईसी) अप्रैल के पहले 15 दिनों में 610 बिलियन रुपये (लगभग 6.40 बिलियन डॉलर) से अधिक बढक़र सर्कुलेशन में कुल कैश रिकॉर्ड 42.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इकोनॉमिस्ट्स के अनुसार, यदि यह ट्रेंड जारी जारी रहता है तो बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। आरबीआई के डेटा के अनुसार, कैश इन सर्कुलेशन में साल-दर-साल आधार पर 11.8 परसेंट की ग्रोथ हुई है और यह 2017 की शुरुआत (नोटबंदी के बाद) के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इकोनॉमिस्ट्स के अनुसार हाल के वर्षों में जीडीपी ग्रोथ की तुलना में करेंसी डिमांड कुछ हद तक दबाव में थी, जिससे अब तेज रिकवरी की स्थिति बनी। इस उछाल को मजबूत ग्रामीण मांग से सपोर्ट मिल रहा है। सितंबर में जीएसटी कटौती से भी मांग बढ़ी है। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष के अनुसार ब्याज सस्ता होने के कारण खासकर रूरल इंडिया में कैश कंजम्पशन बढ़ा है। साथ ही गोल्ड और सिल्वर की प्राइस में तेजी के कारण भी फैमिली ज्यूलरी की री-साइकलिंग बढ़ी है जिससे करेंसी इन सर्कुलेशन में तेजी आई है। एचडीएफसी बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में लिक्विडिटी सरप्लस जमा (डिपॉजिट्स) का लगभग 1% रहेगा, जो दूसरी छमाही में घटकर 0.5% तक आ सकता है। हालांकि यदि महंगाई बढ़ती है, ग्रामीण डिमांड तेज होती है तो कैश इन सर्कुलेशन ऊंचा बना रह सकता है और लिक्विडिटी में अनुमान से भी ज्यादा कमी आ सकती है।
