TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

09-05-2026

आधे दिन में 1 गीगावॉट! दुनिया में Solar Energy की Superfast क्रांति

  •  दुनिया में सोलर एनर्जी की रफ्तार अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है। ताजा ग्लोबल डेटा के मुताबिक, दुनिया अब हर आधे दिन में 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जोड़ रही है। यानी जितनी सोलर पावर 2004 में पूरे साल में जुड़ती थी, उतनी अब सिर्फ 12 घंटे में तैयार हो रही है। सोलरपावर यूरोप ग्लोबल मार्केट आउटलुक 2025 के अनुसार, साल 2004 में दुनिया भर में केवल 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जुड़ी थी, जबकि 2025 तक यह आंकड़ा बढक़र 650 गीगावॉट प्रति वर्ष पहुंच गया है। यह बदलाव दिखाता है कि रिन्यूएबल एनर्जी अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि ग्लोबल एनर्जी सिस्टम का मुख्य हिस्सा बन चुकी है। पहले 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जोडऩे में पूरा एक साल लगता था। इसके बाद यह समय घटकर एक महीना, फिर एक हफ्ता और अब सिर्फ आधा दिन रह गया है। सोलर इंडस्ट्री की यह ग्रोथ दुनिया की सबसे तेज औद्योगिक प्रगति में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। बढ़ती ऑयल प्राइस, मिडिल ईस्ट जियोपॉलिटिकल टेंशन, क्लाइमेट चेंज का दबाव और एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरत ने देशों को तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ धकेला है। साथ ही सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी पहले की तुलना में काफी सस्ती और ज्यादा एफिशिएंट हो चुकी है। भारत समेत कई बड़े देश अब सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रहे हैं। रूफटॉप सोलर, मेगा सोलर पार्क और ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम जैसी योजनाएं आने वाले वर्षों में एनर्जी सेक्टर को पूरी तरह बदल सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला दशक सोलर, बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट एनर्जी ग्रिड्स का दशक होगा।

Share
आधे दिन में 1 गीगावॉट! दुनिया में Solar Energy की Superfast क्रांति

 दुनिया में सोलर एनर्जी की रफ्तार अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है। ताजा ग्लोबल डेटा के मुताबिक, दुनिया अब हर आधे दिन में 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जोड़ रही है। यानी जितनी सोलर पावर 2004 में पूरे साल में जुड़ती थी, उतनी अब सिर्फ 12 घंटे में तैयार हो रही है। सोलरपावर यूरोप ग्लोबल मार्केट आउटलुक 2025 के अनुसार, साल 2004 में दुनिया भर में केवल 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जुड़ी थी, जबकि 2025 तक यह आंकड़ा बढक़र 650 गीगावॉट प्रति वर्ष पहुंच गया है। यह बदलाव दिखाता है कि रिन्यूएबल एनर्जी अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि ग्लोबल एनर्जी सिस्टम का मुख्य हिस्सा बन चुकी है। पहले 1 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी जोडऩे में पूरा एक साल लगता था। इसके बाद यह समय घटकर एक महीना, फिर एक हफ्ता और अब सिर्फ आधा दिन रह गया है। सोलर इंडस्ट्री की यह ग्रोथ दुनिया की सबसे तेज औद्योगिक प्रगति में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। बढ़ती ऑयल प्राइस, मिडिल ईस्ट जियोपॉलिटिकल टेंशन, क्लाइमेट चेंज का दबाव और एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरत ने देशों को तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ धकेला है। साथ ही सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी पहले की तुलना में काफी सस्ती और ज्यादा एफिशिएंट हो चुकी है। भारत समेत कई बड़े देश अब सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रहे हैं। रूफटॉप सोलर, मेगा सोलर पार्क और ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम जैसी योजनाएं आने वाले वर्षों में एनर्जी सेक्टर को पूरी तरह बदल सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला दशक सोलर, बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट एनर्जी ग्रिड्स का दशक होगा।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news