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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

01-05-2026

गल्फ वॉर से सीवी सेल्स पर पड़ेगी मार!

  •  गल्फ (खाड़ी) के वॉर ने भारत की इकोनॉमी के ग्रोथ मोमेंटम को खड्डे में उतार दिया। सेंटिमेंट कमजोर पड़ रहा है, इंफ्लेशन 5 परसेंट तक पहुंचने की चिंता सताने लगी है, फ्यूल और कुकिंग गैस प्राइस और सप्लाई में दिक्कत है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ तो डिसरप्ट हो ही चुकी है यदि ईरान वॉर का कंज्यूमर डिमांड पर असर पड़ा तो खेल खराब हो जाएगा। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की सीवी इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2026 में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ के बाद अब वित्त वर्ष 2027 में सेल्स वॉल्यूम के नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है। कुल सेल्स लगभग 12.4 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2019 के पिछले पीक से भी ज्यादा है। लेकिन  वित्त वर्ष 26 में 10-13 परसेंट की तेज ग्रोथ के बाद वित्त वर्ष 27 में ग्रोथ घटकर 5-6 परसेंट रह जाने की संभावना है। वित्त वर्ष 26 में इंडस्ट्री ने लगभग 10-11 परसेंट की स्ट्रॉन्ग ग्रोथ दर्ज की, और इस ग्रोथ की कमान लाइट कमर्शियल वेहीकल (एलसीवी) सेगमेंट के हाथ में थी। स्मॉल डिलीवरी वैन जैसे एलसीवी में 11-13 परसेंट की ग्रोथ देखी गई, जबकि मीडियम और हेवी कमर्शियल वेहीकल (एमएचसीवी) सेगमेंट ने 8-10 परसेंट की ग्रोथ हुई। इस तेजी का बड़ा कारण जीएसटी दर में कटौती था, जिसे 28 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया। इससे सीवी की प्राइस कम हुई और कई सालों से टली रही मांग (डेफर्ड डिमांड) बाजार में वापस आई। साथ ही, सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और माइनिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी ने भी मांग को मजबूत किया। वित्त वर्ष 27 में इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट में थोड़ा करेक्शन आने की आशंका है। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान वॉर है, जिसे एनेलिस्ट शॉर्ट-टर्म रिस्क मानते हैं। वॉर के कारण फ्यूल प्राइस में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्ट कंपनियों की प्रोफिटेबिलिटी प्रेशर में आ सकती है। नतीजा ट्रांसपोर्टर परचेज टाल सकते हैं और खासकर पहली तिमाही में डिमंाड कमजोर रह सकती है।  हालांकि, सीवी इंडस्ट्री के लिए फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, एक्टिव माइनिंग साइट्स और रिप्लेसमेंट की जरूरत जैसे सभी ग्रोथ फैक्टर कायम हैं। एनेलिस्ट्स का मानना है कि जैसे ही ग्लोबल शिपिंग पटरी पर लौटेगी और फ्यूल प्राइस पर प्रेशर घटेगा साल की बाद की तिमाहियों में सीवी की डिमांड में रिकवरी देखने को मिलेगी।  क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 27 में डोमेस्टिक डिमांड बड़ी ग्रोथ ड्राइवर बनी रहेगी और सीवी इंडस्ट्री के सेल्स वॉल्यूम में डोमेस्टिक डिमांड का शेयर 92 परसेंट रहेगा। सीवी के कुल वॉल्यूम में एलसीवी सेगमेंट का शेयर लगभग 60 परसेंट है और  वित्त वर्ष 27 में इसमें 5-6 परसेंट की ग्रोथ दर्ज होने की उम्मीद है। इसमें ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग प्रमुख भूमिका निभाएगी।

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गल्फ वॉर से सीवी सेल्स पर पड़ेगी मार!

 गल्फ (खाड़ी) के वॉर ने भारत की इकोनॉमी के ग्रोथ मोमेंटम को खड्डे में उतार दिया। सेंटिमेंट कमजोर पड़ रहा है, इंफ्लेशन 5 परसेंट तक पहुंचने की चिंता सताने लगी है, फ्यूल और कुकिंग गैस प्राइस और सप्लाई में दिक्कत है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ तो डिसरप्ट हो ही चुकी है यदि ईरान वॉर का कंज्यूमर डिमांड पर असर पड़ा तो खेल खराब हो जाएगा। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की सीवी इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2026 में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ के बाद अब वित्त वर्ष 2027 में सेल्स वॉल्यूम के नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है। कुल सेल्स लगभग 12.4 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2019 के पिछले पीक से भी ज्यादा है। लेकिन  वित्त वर्ष 26 में 10-13 परसेंट की तेज ग्रोथ के बाद वित्त वर्ष 27 में ग्रोथ घटकर 5-6 परसेंट रह जाने की संभावना है। वित्त वर्ष 26 में इंडस्ट्री ने लगभग 10-11 परसेंट की स्ट्रॉन्ग ग्रोथ दर्ज की, और इस ग्रोथ की कमान लाइट कमर्शियल वेहीकल (एलसीवी) सेगमेंट के हाथ में थी। स्मॉल डिलीवरी वैन जैसे एलसीवी में 11-13 परसेंट की ग्रोथ देखी गई, जबकि मीडियम और हेवी कमर्शियल वेहीकल (एमएचसीवी) सेगमेंट ने 8-10 परसेंट की ग्रोथ हुई। इस तेजी का बड़ा कारण जीएसटी दर में कटौती था, जिसे 28 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया। इससे सीवी की प्राइस कम हुई और कई सालों से टली रही मांग (डेफर्ड डिमांड) बाजार में वापस आई। साथ ही, सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और माइनिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी ने भी मांग को मजबूत किया। वित्त वर्ष 27 में इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट में थोड़ा करेक्शन आने की आशंका है। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान वॉर है, जिसे एनेलिस्ट शॉर्ट-टर्म रिस्क मानते हैं। वॉर के कारण फ्यूल प्राइस में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्ट कंपनियों की प्रोफिटेबिलिटी प्रेशर में आ सकती है। नतीजा ट्रांसपोर्टर परचेज टाल सकते हैं और खासकर पहली तिमाही में डिमंाड कमजोर रह सकती है।  हालांकि, सीवी इंडस्ट्री के लिए फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, एक्टिव माइनिंग साइट्स और रिप्लेसमेंट की जरूरत जैसे सभी ग्रोथ फैक्टर कायम हैं। एनेलिस्ट्स का मानना है कि जैसे ही ग्लोबल शिपिंग पटरी पर लौटेगी और फ्यूल प्राइस पर प्रेशर घटेगा साल की बाद की तिमाहियों में सीवी की डिमांड में रिकवरी देखने को मिलेगी।  क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 27 में डोमेस्टिक डिमांड बड़ी ग्रोथ ड्राइवर बनी रहेगी और सीवी इंडस्ट्री के सेल्स वॉल्यूम में डोमेस्टिक डिमांड का शेयर 92 परसेंट रहेगा। सीवी के कुल वॉल्यूम में एलसीवी सेगमेंट का शेयर लगभग 60 परसेंट है और  वित्त वर्ष 27 में इसमें 5-6 परसेंट की ग्रोथ दर्ज होने की उम्मीद है। इसमें ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग प्रमुख भूमिका निभाएगी।


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