जून, साल 2025 में भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल को “Some ASEAN countries are acting like a B-team of China.” तक कहना पड़ गया। वैसे तो यह डिप्लोमेसी की भाषा नहीं है लेकिन इस स्टेटमेंट से आसियान देशों के साथ भारत के ट्रेड रिलेशन का सही अंदाजा हो जाता है। अब सवाल है गोयल को ...बी टीम...क्यों कहना पड़ा। तो जबाव है 1 जनवरी 2010 को लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद आसियान से भारत का इंपोर्ट 82' बढ़ गया। वित्त वर्ष 2016-17 में आसियान के साथ इंडिया का ट्रेड डेफिसिट (एक्सपोर्ट से ज्यादा इंपोर्ट) केवल 9.6 बिलियन डॉलर था जो वित्त वर्ष 25 में 49 बिलियन डॉलर यानी पांच गुना हो गया। गोयल ने आसियान देशों को चायना की बी टीम इसलिए कहा क्योंकि आसियान के देश चीन के फ्रंट की तरह काम कर रहे हैं और अपना ठप्पा लगाकर चीन का माल इंडिया में झोंक रहे हैं। कंट्री ऑफ ओरिजिन का नियम भारत ने बहुत देर से लागू किया। भारत व आसियान के बीच इन दिनों एफटीए को रिव्यू करने की बातचीत चल रही है। वित्त वर्ष 26 में भारत का कुल गुड्स ट्रेड डेफिसिट 333.2 बिलियन डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष25 में 283.5 बिलियन डॉलर ही था। जबकि गुड्स के उलट सर्विसेस एक्सपोर्ट में भारत 213.9 बिलियन डॉलर के ट्रेड सरप्लस पर बैठा है। फिर भी कुल ट्रेड (गुड्स + सर्विसेस) डेफिसिट 119.3 बिलियन डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 25 में 94.7 बिलियन डॉलर था। हालांकि इस ट्रेजिक फिल्म में भी एक रोशनी की किरण नजर आ रही है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक इंपोर्ट पहली बार 100 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। मशीनरी का इंपोर्ट भी वित्त वर्ष 15 के 73 बिलियन डॉलर से बढक़र वित्त वर्ष 26 में करीब 130 बिलियन डॉलर रहा। रोशनी की किरण इसलिए क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए क्रिटिकल इनपुट हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स इंपोर्ट में ये जो तेजी दिख रही है इसका सीधा फायदा इंडिया के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में हो रहा है और वित्त वर्ष 26 में 47.96 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत सरकार वित्त वर्ष 2031-32 तक कुल (गुड्स और सर्विसेस मिलाकर) 2 ट्रिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट टार्गेट लेकर चल रही है। वित्त वर्ष 26 में चीन और अमेरिका से इंडिया का इंपोर्ट बहुत तेजी से बढ़ा है। जबकि यूएई और रूस से इंपोर्ट घटा। दूसरी ओर, यूएई और अमेरिका को एक्सपोर्ट में भी कमी आई है जबकि चीन को एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 26 में 36 परसेंट बढक़र 19.50 बिलियन डॉलर हो गया। जबकि अमेरिका के इंपोर्ट करीब 16 परसेंट बढक़र 52.90 बिलियन डॉलर हो गया। नतीजा अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 25 के 43 बिलियन डॉलर के मुकाबले 34.4 बिलियन डॉलर रह गया।

