भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स जहां 1,456 पाइंट टूटकर 74,559 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 23,400 के नीचे फिसल गया। सिर्फ एक दिन में निवेशकों की करीब 11 लाख करोड़ रुपए की वैल्थ साफ हो गई। शेयर बाजारों में मंगलवार को आई गिरावट काफी व्यापक रही व बीएसई पर ट्रेड हुए 4410 शेयरों में से 77% या 3412 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए जबकि 20' शेयर ही बढ़त के साथ बंद हुए। उल्लेखनीय है कि पिछले चार कारोबारी सत्रों में बीएसई सेंसेक्स करीब 3,400 पाइंट लुढक़ चुका है। मार्केट में डर इतना बढ़ गया कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। सवाल यही है-आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया?
मोदी सरकार की ‘सादगी अपील’ से बाजार में बेचैनी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल, डीजल, गैस और सोने के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील ने बाजार की धारणा पर बड़ा असर डाला। निवेशकों को डर है कि अगर लोग खर्च कम करेंगे तो कई सेक्टरों की कमाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से ज्वेलरी, ट्रैवल, होटल और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार को लगने लगा कि आने वाले समय में कंज्यूमर स्पेंडिंग कमजोर पड़ सकता है और इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाया ग्लोबल डर : दुनिया भर के बाजार इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर नजर टिकाए हुए हैं। सीजफायर और बातचीत की खबरों के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान और ईरान की चेतावनियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्लोबल तनाव बढ़ते ही निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।
100 डॉलर के पार कच्चा तेल बना सबसे बड़ा विलेन : ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बेहद चिंताजनक संकेत माना जाता है। महंगा तेल मतलब महंगाई का खतरा, रुपये पर दबाव और सरकार की वित्तीय चुनौती। विशेषज्ञों का मानना है अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो भारत की आर्थिक ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। यही डर बाजार में लगातार बिकवाली को बढ़ा रहा है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, विदेशी निवेशक भागे : भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। साल की शुरुआत में रुपया करीब 90 के आसपास था, यानी कुछ ही महीनों में इसमें 6%से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। यही वजह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मई में ही विदेशी निवेशक करीब 19,500 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं।
