आपने खबर पढ़ी होगी भारत सरकार ने अपने 16.68 लाख सरकारी ईमेल अकाउंट •ाोहो पर शिफ्ट कर लिए है। सिक्यॉरिटी, डेटा सॉवरेनिटी (देश का डेटा देश में) और इंडियन टेक को सपोर्ट करने के लिए उठाए गए इस कदम पर भारत सरकार हर साल 180 करोड़ रुपये खर्च करेगी। भारत की ही तरह फ्रांस ने भी डिजिटल सॉवरेनिटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने लगभग 25 लाख सरकारी कंप्यूटर सिस्टम्स को माइक्रोसॉफ्ट विंडोज से हटाकर लाइनक्स पर माइग्रेट करने की घोषणा की है। इसे केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि स्ट्रेटेजिक और जियो-पॉलिटिकल संकेत माना जा रहा है। फ्रांस के बजट मंत्री डेविड एमीएल ने कहा कि हम अपने डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत फैसलों के लिए ऐसे प्लेटफॉम्र्स पर निर्भर नहीं रह सकते जिनके नियम, कॉस्ट और रिस्क हमारे कंट्रोल में नहीं है। इस कदम को अमेरिकी टेक कंपनियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में डिजिटल विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है।अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर चल रहे तनाव के दौर में भारत सरकार ने भी •ाोहो का स्ट्रेटेजिक तरीके से इस्तेमाल किया था। विलेज आंत्रप्रेन्यॉर श्रीधर वेंबू की 12 बिलियन डॉलर वेल्यूएशन वाली कंपनी •ाोहो कॉर्पोरेशन अपना ज्यादातर बिजनस भारत के बजाय विदेशों में करती है। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को घटाने के लिए विचार करने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने अकेले 2025 में विदेशी (ज्यादातर अमेरिकी) सॉफ्टवेयर लाइसेंस पर करीब 1,200 करोड़ खर्च किए। फरवरी में फ्रांस ने सरकारी कर्मचारियों के लिए •ाूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम की जगह घरेलू सिस्टम को लागू किया था। ऑस्ट्रिया की सेना ने भी माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इसी तरह जर्मनी की एक बड़ी कंपनी ने अपने 44 हजार ईमेल अकाउंट्स को माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स ईमेल सिस्टम पर माइग्रेट किया है।