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07-05-2026

राशन के बदले अब मिलेंगे डिजिटल कूपन

  •  सरकार अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित राशन योजना को जून तक चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, तथा दमन और दीव जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में विस्तार देने की तैयारी कर रही है। यह कदम गुजरात और पुडुचेरी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसके सफल क्रियान्वयन के बाद उठाया जा रहा है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को राशन अब सीधे अनाज के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल टोकन के रूप में दिया जाता है। यह टोकन आरबीआई के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) फ्रेमवर्क के तहत जारी डिजिटल वॉलेट में जमा होता है। सूत्रों के अनुसार, यदि इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह लगभग 4-5 परसेंट तक सब्सिडी बचत कर सकती है और राशन के सिस्टम को अधिक पारदर्शी, लक्षित और कुशल बना सकती है। यह खाद्य सब्सिडी वितरण के तरीके में एक क्रांतिकारी सुधार साबित हो सकता है। यह कदम वर्तमान वितरण प्रणाली की एक पुरानी समस्या को हल करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जहां लाभार्थियों को अक्सर राशन दुकानों पर स्टॉक की कमी का सामना करना पड़ता है या महीने के अंत में पहुंचने पर उन्हें पूरा कोटा नहीं मिल पाता। इससे वे दुकानदारों पर निर्भर हो जाते हैं और उनके पास शिकायत का सीमित विकल्प होता है। नेशनल फूड सेफ्टी एक्ट की धारा 12 में भी अधिक कुशल वितरण प्रणाली का प्रावधान किया गया है जिसमें कैश ट्रांसफर और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे विकल्प शामिल हैं।  हालांकि, सीधे नकद या डीबीटी के अपने जोखिम हैं क्योंकि इसमें नकद पैसा कहीं और खर्च हो जाने का खतरा हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो खाद्य सुरक्षा का एजेंडा फेल हो सकता है। ऐसे में डिजिटल कूपन को एक बीच का रास्ता रास्ता माना जा रहा है। चूंकि यह आरबीआई द्वारा जारी सोवरीन डिजिटल करेंसी है इसलिए इसका कानूनी दर्जा सामान्य मुद्रा जैसा ही है। लेकिन इसका इस्तेमाल केवल गेहूं और चावल जैसी खाद्यान्न खरीद के लिए ही प्रोग्राम किया जा सकता है। यह डिजिटल टोकन एक तरह के डिजिटल कूपन की तरह काम करता है। लाभार्थी इसका राशन दुकान या किसी अधिकृत केंद्र पर सामान्य रुपये की तरह पेमेंट करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। यह टोकन केवल तय वस्तु खरीदने के लिए ही मान्य होता है और इसका कहीं अन्य इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जिन लाभार्थियों के पास स्मार्टफोन हैं वे डिजिटल वॉलेट का उपयोग कर सकते हैं, फीचर फोन उपयोगकर्ताओं को रिडेम्प्शन कोड दिया जा सकता है, जबकि जिनके पास कोई डिजिटल डिवाइस नहीं है, वे पुराने सिस्टम से ही राशन खरीद सकते हैं। वर्तमान पायलट में टोकन की वैधता एक महीने की रखी गई है, जिसे जरूरत पडऩे पर बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सिद्धांत रूप में इसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक विस्तार पर विचार नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इससे स्टॉक मैनेजमेंट को भी बेहतर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी दुकानदार को 1 हजार टन अनाज मिला और उसने 980 टन बांट दिया तो अगला आवंटन बचे हुए स्टॉक को ध्यान में रखकर किया जा सकता है जिससे अनावश्यक स्टॉकिंग से बचा जा सकता है।

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राशन के बदले अब मिलेंगे डिजिटल कूपन

 सरकार अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित राशन योजना को जून तक चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, तथा दमन और दीव जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में विस्तार देने की तैयारी कर रही है। यह कदम गुजरात और पुडुचेरी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसके सफल क्रियान्वयन के बाद उठाया जा रहा है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को राशन अब सीधे अनाज के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल टोकन के रूप में दिया जाता है। यह टोकन आरबीआई के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) फ्रेमवर्क के तहत जारी डिजिटल वॉलेट में जमा होता है। सूत्रों के अनुसार, यदि इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह लगभग 4-5 परसेंट तक सब्सिडी बचत कर सकती है और राशन के सिस्टम को अधिक पारदर्शी, लक्षित और कुशल बना सकती है। यह खाद्य सब्सिडी वितरण के तरीके में एक क्रांतिकारी सुधार साबित हो सकता है। यह कदम वर्तमान वितरण प्रणाली की एक पुरानी समस्या को हल करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जहां लाभार्थियों को अक्सर राशन दुकानों पर स्टॉक की कमी का सामना करना पड़ता है या महीने के अंत में पहुंचने पर उन्हें पूरा कोटा नहीं मिल पाता। इससे वे दुकानदारों पर निर्भर हो जाते हैं और उनके पास शिकायत का सीमित विकल्प होता है। नेशनल फूड सेफ्टी एक्ट की धारा 12 में भी अधिक कुशल वितरण प्रणाली का प्रावधान किया गया है जिसमें कैश ट्रांसफर और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे विकल्प शामिल हैं।  हालांकि, सीधे नकद या डीबीटी के अपने जोखिम हैं क्योंकि इसमें नकद पैसा कहीं और खर्च हो जाने का खतरा हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो खाद्य सुरक्षा का एजेंडा फेल हो सकता है। ऐसे में डिजिटल कूपन को एक बीच का रास्ता रास्ता माना जा रहा है। चूंकि यह आरबीआई द्वारा जारी सोवरीन डिजिटल करेंसी है इसलिए इसका कानूनी दर्जा सामान्य मुद्रा जैसा ही है। लेकिन इसका इस्तेमाल केवल गेहूं और चावल जैसी खाद्यान्न खरीद के लिए ही प्रोग्राम किया जा सकता है। यह डिजिटल टोकन एक तरह के डिजिटल कूपन की तरह काम करता है। लाभार्थी इसका राशन दुकान या किसी अधिकृत केंद्र पर सामान्य रुपये की तरह पेमेंट करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। यह टोकन केवल तय वस्तु खरीदने के लिए ही मान्य होता है और इसका कहीं अन्य इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जिन लाभार्थियों के पास स्मार्टफोन हैं वे डिजिटल वॉलेट का उपयोग कर सकते हैं, फीचर फोन उपयोगकर्ताओं को रिडेम्प्शन कोड दिया जा सकता है, जबकि जिनके पास कोई डिजिटल डिवाइस नहीं है, वे पुराने सिस्टम से ही राशन खरीद सकते हैं। वर्तमान पायलट में टोकन की वैधता एक महीने की रखी गई है, जिसे जरूरत पडऩे पर बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सिद्धांत रूप में इसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक विस्तार पर विचार नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इससे स्टॉक मैनेजमेंट को भी बेहतर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी दुकानदार को 1 हजार टन अनाज मिला और उसने 980 टन बांट दिया तो अगला आवंटन बचे हुए स्टॉक को ध्यान में रखकर किया जा सकता है जिससे अनावश्यक स्टॉकिंग से बचा जा सकता है।


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