चीन की कार कंपनियां अपना खुद का यारिस मोमेंट खोज रही हैं। यारिस टोयोटा का वह मॉडल है जिसे कंपनी ने यूरोप की जरूरतों को ध्यान में रखकर लोकेलाइज किया था और जो सेल्स वॉल्यूम के लिहाज के काफी फायदेमंद रहा। चीन की कार कंपनियां भी लोकल जरूरतों के अनुसार तैयार मॉडल के रास्ते पर आगे चलकर एक्सपोर्ट पावरहाउस बनने के प्लान पर काम कर रही हैं। चीन की कंपनियां आमतौर पर मामूली डिजाइन ट्वीकिंग (मामूली बदलाव) कर एक्सपोर्ट करती रही हैं लेकिन अब ऑटोमेकर विदेशी ग्राहकों के लिए गाडिय़ों को पूरी तरह से नए सिरे से डिजाइन कर रहे हैं। चीन में कार बाजार भयंकर क्राइसिस में है। डिमांड स्लोडाउन खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं दूसरी ओर जबरदस्त कंपीटिशन के कारण डीप डिस्काउंटिंग के चलते कंपनियों को बहुत घाटा हो रहा है। अपने डोमेस्टिक मार्केट में चीनी कंपनियां जहां डबल व्हैमी यानी दोहरी मार की शिकार हैं वहीं एक्सपोर्ट मार्केट्स में उन्हें बिलियन डॉलर अपॉर्चुनिटी नजर आ रही हैं। चीन के डोमेस्टिक ऑटो मार्केट बहुत क्राउडेड भी है और यहां सालों में प्राइस वॉर चल रहा है। जबकि एक्सपोर्ट मार्केट्स में सेल्स वॉल्यूम और प्रोफिटेबिलिटी और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन आदि तीनों एजेंडा पूरे हो रहे हैं। लेकिन चीन की कंपनियों को यह साबित करना होगा कि वे विदेशी कस्टमर की जरूरत और पसंद को ठीक से समझती हैं। बड़ी कार कंपनियां जैसे बीवाईडी, चेरी, चांगन, साइक मोटर (एमजी ब्रांड) और एफएडब्ल्यू ग्रुप का प्रीमियम होंगकी ब्रांड—सभी के पास ऐसे मॉडल पाइपलाइन में हैं जो खासतौर पर एक्सपोर्ट बाजारों के लिए डिजाइन किए गए हैं, जैसे यूरोप के लिए छोटे हैचबैक और ऑस्ट्रेलिया व मैक्सिको के लिए पिकअप ट्रक। डोमेस्टिक मार्केट में चीनी कंपनियां कंपीटिशन में बने रहने के लिए फीचर रिच कारों को डिस्काउंट पर बेचती हैं। लेकिन यूरोप जैसे पश्चिमी मार्केट्स में दोगुनी कीमत के बाद भी यूरोपीय और अमेरिकी ब्रांड्स के मुकाबले चीनी कार सस्ती पड़ती हैं। अप्रैल के अंत में हुए बीजिंग ऑटो शो में होंगकी ने एक स्मॉल ग्लोबल एसयूवी पेश की थी जिसे 80 देशों में बेचने का लक्ष्य है। कंपनी के डिजाइन प्रमुख गाइल्स टेलर के अनुसार, इसे अर्बन बायर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। बीवाईडी की डॉल्फिन जी हैचबैक खासतौर पर यूरोप के लिए डिजाइन की गई है और जून में लॉन्च होगी। कंपनी की सीनियर एक्जेक्टिव स्टेला ली के अनुसार यह मॉडल महत्वपूर्ण है क्योंकि साउथ यूरोप के कुछ हिस्सों में हैचबैक का शेयर 40 परसेंट से अधिक है। उन्होंने कहा, सही हैचबैक कार के बिना कंपनी का जीत पाना मुश्किल है। कई चीनी कार कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट अब अस्तित्व का सवाल बन गया है। विश्लेषकों के अनुसार चीन में 100 से ज्यादा कार कंपनियां हैं लेकिन 10 से कम ही टिक पाएंगी। बाकी या तो बंद हो जाएंगे या फिर इन्हें बड़ी शार्क निगल लेंगी। चीन में प्रोडक्शन कैपेसिटी कितनी सरप्लस है इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि 2024 में जापान को पछाड़ चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऑटो एक्सपोर्टर बन गया। गार्टनर के एनेलिस्ट पेड्रो पाचेको के अनुसार एक्सपोर्ट के लिए नई कार डिजाइन करने की यह स्ट्रेटेजी चीनी कंपनियों का यारिस मोमेंट है। यारिस को टोयोटा ने यूरोप के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया था जिससे 1999 के बाद के दशकों में टोयोटा को यूरोप में बड़ा फायदा हुआ है। ब्रिटेन में, चीनी ब्रांड्स का पहली तिमाही में मार्केट शेयर दोगुना होकर 14.2 परसेंट तक बढ़ गया है। पूरे यूरोप में, इनका शेयर लगभग दोगुना होकर 3.5 से बढक़र 6 परसेंट हो गया है। निसान के ग्लोबल डिजाइन वीपी अल्फोंसो अल्बाइसा के अनुसार चीन में कलर और मैटीरियल के साथ काफी एक्सपेरिमेंट किए जाते हैं। हां इतना जरूर है चीन में कार बायर ज्यादातर यंग हैं जबकि यूरोप मे ऐसा नहीं है। वे कहते हैं कार में कराओके यंग बायर को पसंद आ सकता है लेकिन यह बुजुर्ग ग्राहकों के लिए नहीं। यूरोप में स्मॉल हैचबैक का बड़ा मार्केट होने के कारण चेरी यूरोप के लिए नया मॉडल लेपास 2 ला रही है। इसी तरह साइक भी एमजी ब्रांड के तहत एमजी2 हैचबैक बना रही है। बीवाईडी 2030 तक अपनी आधी सेल्स एक्सपोर्ट मार्केट्स से जेनरेट करना चाहती है और इसके लिए यूरोप के लिए खास मॉडल लॉन्च करेगी।