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04-05-2026

यंग पॉपुलेशन! फिर भी मिडल इनकम चैलेंज

  •  विकसित भारत 2047 तक प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) को कम से कम 15 हजार डॉलर तक पहुंचाने का टार्गेट है। अभी भारत की पर कैपिटा इनकम 2900 डॉलर है। यदि भारत 15 हजार डॉलर के लेवल को फांद जाता है तो हाई इनकम देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। वल्र्ड बैंक के अनुसार 13845 डॉलर की पर कैपिटा इनकम वाले देश हाई इनकम माने जाते हैं। अब दो सवाल हैं। क्या चीन हायर मिडल इनकम से हाई इनकम कंट्री बन गया है? अभी चीन की पर कैपिटा इनकम करीब 14 हजार डॉलर है। दूसरा सवाल यह है कि क्या भारत 2047 तक इस लिस्ट में शामिल हो सकता है? हाल ही वल्र्ड बैंक ने एक रिपोर्ट...मिडल इनकम ट्रैप...रिलीज की है। इसमें मिडल इनकम वाले देशों को एक ट्रैप में फंसा बताया गया है और इनके हाई इनकम ग्रुप में शामिल हो पाने की उम्मीद बहुत कम है। आप जानते हैं भारत सरकार ने हाल ही वित्त वर्ष 2022-23 को बेस ईयर मानकर जीडीपी की नई सिरिज लॉन्च की है। साथ ही जीडीपी कैल्कुशन के फॉर्मूला में भी वल्र्ड बैंक के आधार पर बदलाव किया है। नतीजा वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 4.1 ट्रिलियन डॉलर रही और टॉप-5 इकोनॉमिस्ट की लिस्ट से बाहर होकर छठी रैंक तक फिसल गया। फिर भी सरकार का कहना है कि जीडीपी कैल्कुलेशन का नया फ्रेमवर्क लागू होने के कारण ग्रोथ में थोड़ा करेक्शन आता ही है। वर्ष 2031 तक यूके, जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। मिडल इनकम ट्रैप को फांदने का जो सबसे कामयाब उदाहरण है वह है साउथ कोरिया जिसने मैन्युफैक्चरिंग के दम पर यह कामयाबी हासिल की है। भारत सरकार भी मिडल-इनकम ट्रैप में फंसने के रिस्क को देखते हुए एक स्ट्रेटेजी तैयार कर रही है। भारत के पास इस ट्रैप से बाहर निकलने के लिए लगभग 20 साल हैं। इसलिए सरकार उन देशों का गहराई से स्टडी कर रही है जो इस फंदे से निकलकर हाई-इनकम कैटेगरी में एंट्री करने में कामयाब रहे। रिपोर्ट के अनुसार 1990 के दशक के बाद केवल 34 मिडल-इनकम देश ही हाई-इनकम कैटेगरी में शामिल हो पाए। वल्र्ड बैंक ने अपनी मिडल इनकम ट्रैप रिपोर्ट में कहा है कि चीन, भारत, ब्राजील और साउथ अफ्रीका समेत 100 से अधिक देश मिडल-इनकम ट्रैप में फंसे हुए हैं और इनके हाई इनकम कैटेगरी में एंट्री कर पाने की उम्मीद कम है। रिपोर्ट के अनुसार,  जिन देशों की प्रति व्यक्ति जीडीपी 11136 से 13845 डॉलर के बीच होती है, उन्हें मिडल-इनकम कैटेगरी में रखा जाता है। वर्तमान में भारत की प्रति व्यक्ति आय $3 हजार डॉलर से कम है। रिपोर्ट के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट, लेबर पार्टिसिपेशन और कैपिटल का विस्तार करते हैं जिससे शुरुआत में इनका तेज विकास होता है लेकिन एक लेवल के बाद इन पारंपरिक ग्रोथ ड्राइवर्स का इकोनॉमी पर असर गम होने लगता है। नेक्स्ट लेवल तक पहुंचने के लिए टेक्नोलॉजीे, इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी की जरूरत होती है। जहां तक भारत की बात है तो डिजिटल इकोसिस्टम में अच्छी प्रगति हुई है लेकिन इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा छोटे और कम प्रोडक्टिविटी वाले वेंचर पर आधारित है।  रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि आज के ट्रेंड से भारत को अमेरिका के बराबर आने में करीब 75 साल लग सकते हैं। 

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यंग पॉपुलेशन! फिर भी मिडल इनकम चैलेंज

 विकसित भारत 2047 तक प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) को कम से कम 15 हजार डॉलर तक पहुंचाने का टार्गेट है। अभी भारत की पर कैपिटा इनकम 2900 डॉलर है। यदि भारत 15 हजार डॉलर के लेवल को फांद जाता है तो हाई इनकम देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। वल्र्ड बैंक के अनुसार 13845 डॉलर की पर कैपिटा इनकम वाले देश हाई इनकम माने जाते हैं। अब दो सवाल हैं। क्या चीन हायर मिडल इनकम से हाई इनकम कंट्री बन गया है? अभी चीन की पर कैपिटा इनकम करीब 14 हजार डॉलर है। दूसरा सवाल यह है कि क्या भारत 2047 तक इस लिस्ट में शामिल हो सकता है? हाल ही वल्र्ड बैंक ने एक रिपोर्ट...मिडल इनकम ट्रैप...रिलीज की है। इसमें मिडल इनकम वाले देशों को एक ट्रैप में फंसा बताया गया है और इनके हाई इनकम ग्रुप में शामिल हो पाने की उम्मीद बहुत कम है। आप जानते हैं भारत सरकार ने हाल ही वित्त वर्ष 2022-23 को बेस ईयर मानकर जीडीपी की नई सिरिज लॉन्च की है। साथ ही जीडीपी कैल्कुशन के फॉर्मूला में भी वल्र्ड बैंक के आधार पर बदलाव किया है। नतीजा वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 4.1 ट्रिलियन डॉलर रही और टॉप-5 इकोनॉमिस्ट की लिस्ट से बाहर होकर छठी रैंक तक फिसल गया। फिर भी सरकार का कहना है कि जीडीपी कैल्कुलेशन का नया फ्रेमवर्क लागू होने के कारण ग्रोथ में थोड़ा करेक्शन आता ही है। वर्ष 2031 तक यूके, जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। मिडल इनकम ट्रैप को फांदने का जो सबसे कामयाब उदाहरण है वह है साउथ कोरिया जिसने मैन्युफैक्चरिंग के दम पर यह कामयाबी हासिल की है। भारत सरकार भी मिडल-इनकम ट्रैप में फंसने के रिस्क को देखते हुए एक स्ट्रेटेजी तैयार कर रही है। भारत के पास इस ट्रैप से बाहर निकलने के लिए लगभग 20 साल हैं। इसलिए सरकार उन देशों का गहराई से स्टडी कर रही है जो इस फंदे से निकलकर हाई-इनकम कैटेगरी में एंट्री करने में कामयाब रहे। रिपोर्ट के अनुसार 1990 के दशक के बाद केवल 34 मिडल-इनकम देश ही हाई-इनकम कैटेगरी में शामिल हो पाए। वल्र्ड बैंक ने अपनी मिडल इनकम ट्रैप रिपोर्ट में कहा है कि चीन, भारत, ब्राजील और साउथ अफ्रीका समेत 100 से अधिक देश मिडल-इनकम ट्रैप में फंसे हुए हैं और इनके हाई इनकम कैटेगरी में एंट्री कर पाने की उम्मीद कम है। रिपोर्ट के अनुसार,  जिन देशों की प्रति व्यक्ति जीडीपी 11136 से 13845 डॉलर के बीच होती है, उन्हें मिडल-इनकम कैटेगरी में रखा जाता है। वर्तमान में भारत की प्रति व्यक्ति आय $3 हजार डॉलर से कम है। रिपोर्ट के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट, लेबर पार्टिसिपेशन और कैपिटल का विस्तार करते हैं जिससे शुरुआत में इनका तेज विकास होता है लेकिन एक लेवल के बाद इन पारंपरिक ग्रोथ ड्राइवर्स का इकोनॉमी पर असर गम होने लगता है। नेक्स्ट लेवल तक पहुंचने के लिए टेक्नोलॉजीे, इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी की जरूरत होती है। जहां तक भारत की बात है तो डिजिटल इकोसिस्टम में अच्छी प्रगति हुई है लेकिन इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा छोटे और कम प्रोडक्टिविटी वाले वेंचर पर आधारित है।  रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि आज के ट्रेंड से भारत को अमेरिका के बराबर आने में करीब 75 साल लग सकते हैं। 


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