भारतीय आईटी सेक्टर इस समय जबरदस्त दबाव में नजर आ रहा है। वजह है दुनिया की सबसे चर्चित एआई कंपनी OpenAI की नई चाल। कंपनी ने अब सीधे सॉफ्टवेयर सर्विसेज बिजनेस में उतरने का ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली और निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया। मंगलवार को बाजार खुलते ही आईटी स्टॉक्स में तगड़ी बिकवाली शुरू हो गई। Tata Consultancy Services करीब 4 प्रतिशत टूट गया, जबकि Infosys, HCL Technologies और Tech Mahindra के शेयर भी लाल निशान में फिसल गए। इतना ही नहीं, मिड-कैप आईटी कंपनियों में भी अफरा-तफरी मच गई। Coforge, Persistent System और Mphasis जैसे शेयरों में 3 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। असल में OpenAI ने "OpenAI Deployment Company" लॉन्च करने का ऐलान किया। यह नई यूनिट कंपनियों के सिस्टम में सीधे एआई टूल्स इंस्टॉल करेगी और बिजनेस ऑपरेशन्स को AI-powered बनाएगी। आसान भाषा में कहें तो जो काम अब तक भारतीय आईटी कंपनियां करती थीं, वही काम अब OpenAI खुद करने जा रही है। सबसे बड़ी टेंशन की बात यह है कि OpenAI सिर्फ टेक्नोलॉजी बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अब अपने इंजीनियर सीधे क्लाइंट कंपनियों में भेजेगी और उनके सिस्टम में एआई को इंटीग्रेट करेगी। इसके लिए OpenAI ने "Tomoro" नाम की एआई इंजीनियरिंग फर्म भी खरीद ली है, जिससे करीब 150 एक्सपर्ट इंजीनियर उसके साथ जुड़ गए हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम भारतीय आईटी इंडस्ट्री के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। क्योंकि अब क्लाइंट कंपनियां सीधे AI कंपनियों के साथ डील कर सकती हैं और बीच से पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों की भूमिका कम हो सकती है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट साफ दिखाई दे रही है। दिलचस्प बात यह भी है कि सिर्फ OpenAI ही नहीं, बल्कि Anthropic जैसी दूसरी AI कंपनियां भी तेजी से इस मार्केट में उतर रही हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि Anthropic अभी सिस्टम इंटीग्रेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है, लेकिन OpenAI पूरी तरह खुद का सर्विस नेटवर्क तैयार कर रही है। यही वजह है कि Open AI का मॉडल ज्यादा आक्रामक माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या AI आने वाले समय में भारतीय आईटी कंपनियों का गेम बदल देगा? हालांकि कई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स अभी भी मानते हैं कि बड़ी कंपनियों में AI लागू करना इतना आसान नहीं है। हर कंपनी का सिस्टम अलग होता है और उसे समझने के लिए अनुभव और गहरी टेक्निकल समझ की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि आईटी कंपनियों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इंफोसिस के चेयरमैन नन्दन निलेकनी ने भी पहले कहा था कि AI टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन कंपनियों को इसे सही तरीके से लागू करने के लिए आईटी पार्टनर्स की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल एक बात साफ है — AI अब सिर्फ चैटबॉट या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रहा। अब यह सीधे अरबों डॉलर की आईटी इंडस्ट्री को चुनौती दे रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारतीय आईटी दिग्गज इस नए AI वार के खिलाफ क्या रणनीति अपनाते हैं।
