TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

05-05-2026

‘सट्टेबाजी’: तरीके अनेक, काम एक!

  • कोई एक दिन के लिए ऑप्शन या फ्यूचर क्यों खरीदता है? वॉरेन बफे ने हाल ही में एक इंटरव्यू में यह पूछते हुए कहा कि सट्टेबाजी के मूड में जितने लोग आज कार्यरत हैं उतने इतिहास में कभी नहीं रहे। मोबाइल फोन पर खेलों से लेकर कमोडिटी, शेयर बाजार, सोना, चांदी जैसे कई प्रोडक्ट्स की खरीद-बेच इतनी आसान हो गई है कि यह युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का फेवरेट टाइमपास का माध्यम बन गई है। मिनटों या घंटों में खरीद-बेच करके कमाई करने का मौका देने वाले इस काम को ज्यादातर लोग ‘इंवेस्टमेंट’ कहते हैं पर वास्तव में यह तुरंत कमाई करने के लिए किया जाने वाला ऐसा काम है जिसमें कमाकर निकल जाने वाले ढूंढने से भी नहीं मिलते। ट्रेडिंग का यह नायाब खेल यानि सट्टेबाजी घर-घर में पहुंच चुकी है भले ही इसे किसी भी शानदार नाम से जाना जाए और यह समझने के लिए वैसी सुपर इंटेलिजेंस की जरूरत बिल्कुल नहीं होती जैसी आजकल हमें चारों ओर से घेरे हुए है। रीयल टाइम कीमतों पर ट्रेड के साथ-साथ फ्यूचर में क्या कीमतें हो सकती है या फ्यूचर में कीमतें ऊपर जाएगी या नीचे, ऐसे प्रोडक्ट भी दांव लगाने वालों के चहेते बन गए हैं जबकि वास्तव में इनकी शुरुआत कारोबारों के फायदे को ध्यान में रखकर हुई थी। निफ्टी जैसे प्रोडक्ट यानि यह ऊपर जाएगी या नीचे इस पर दांव लगाने को कोई क्या कहेगा यह किसी से छुपा नहीं है। निफ्टी एक नम्बर है जो कुछ भी पैदा नहीं करता और न बनाता है पर फिर भी इसके मूवमेंट को पकडऩे की इंटेलिजेंस होने का भरोसा रखने वाले लोग करोड़ों की संख्या में रोजाना इस पर दांव लगाते हैं। जिन लोगों ने केसिनो की विजिट की है, वे अच्छी तरह समझ सकते हैं कि संभावना (Probability) पर शॉर्ट-टर्म दांव लगाने को सट्टेबाजी कहा जाता है और ऐसे दांव पूंजी को बिना किसी उपयोग के एक हाथ से दूसरे हाथ में ट्रांसफर करने के अलावा कुछ हासिल नहीं कर सकते। मशहूर इंवेस्टर वॉरेन बफे ने सट्टेबाजी के बारे में एक बार कहा था कि अगर कोई आधे घंटे से पोकर (ताश का खेल) खेल रहा है और उसे तब भी यह पता न चले कि कौन हार रहा है तो यह तय है कि वह खुद ही हार रहा है। यही नियम सट्टेबाजी जिसे ट्रेडिंग कहा जाता है, पर लागू होता है जहां ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं रहता कि वास्तव में उन्होंने खोया है या कमाया है। सेबी का डेटा कहता है कि डेरिवेटिव में ट्रेडिंग करने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग नुकसान में रहते हैं यानि ट्रेडिंग के खेल में खोने वाले घर-घर में मिल जाएंगे पर फिर भी इसका नशा ऐसा है जो उतरता ही नहीं है।

    मोतीलाल ओसवाल अपने क्लाइंटो को ट्रेडिंग करने के कई Option देता है जिसमें Regular, MTF, T+5, SIP है और ऑर्डर लगाने के लिए SL Limit, Slice जैसी सुविधाएं है। इस तरह के या ज्यादा तरीके दूसरी कंपनियां भी देती है और मार्जिन यानि पूरा पैसा न होने पर भी क्षमता से ज्यादा ट्रेड करने की सुविधा तो सबसे बड़ा टूल है जिसके आकर्षण से लोग सभी हदो को भुलाकर दांव पर दांव खेलते रहते हैं। ट्रेडिंग से कमाई को अपने काबू में करने के लिए हाई स्पीड के नेटवर्क पर कई लोग वर्षों से काम कर रहे हैं जो Milliseconds (एक सैकंड का हजारवां हिस्सा) में ट्रेड करने की सुविधा देता है लेकिन अब सॉफ्टवेयर की कोडिंग से ऐसे Deep Learning मॉडल पर ट्रेडिंग होने लगी है जो Milli Seconds, मिनटों व घंटों में होने वाले कीमतों के मूवमेंट की पहले ही यानि एडवांस में जानकारी दे सकता है। ऐसे ही मॉडल की मदद से ट्रेडिंग करने वाली एक कंपनी स्टॉक, बांड, फॉरेन एक्सचेंज, डेरिवेटिव, क्रिप्टो जैसे कई प्रोडक्ट्स पर रोजाना 250 बिलियन डॉलर के ट्रेड करती है और करोड़ों-अरबों के कैश बैलेंस के साथ ऐसी कई कंपनियां हैं जो कहीं से भी किसी भी देश के बाजारों में रोजाना ट्रेड कर रही है और जिन्होंने कीमतों के मूवमेंट का पहले ही पता लगाने का मॉडल डवलप कर लिया है। ट्रेडिंग क्या किसी कंपनी के बारे में हमें कोई जानकारी देती है या कोई संकेत बताती है, शायद नहीं। ट्रेडिंग के रूप में हो रही सट्टेबाजी कोई भी इकोनोमिक वेल्यू क्रिएट नहीं करती क्योंकि यह पैसा किसी काम पर नहीं लगता। सिर्फ और सिर्फ लांग टर्म इंवेस्टमेंट ही एकमात्र तरीका है जिससे शेयर बाजारों से पैसा उगाहने वाली कंपनियां लोगों के लिए कोई वेल्यू क्रिएट कर सकती है और शेयर होल्डर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। यह सच है कि ट्रेडिंग की लत तेजी से फैलती जा रही है पर Common Sense के हिसाब से ट्रेडिंग में लगने वाला पैसा अगर कुछ नया बनाने में लगे तो समाज के लिए बेहतर रिजल्ट दे सकता है। सच यह भी है कि ट्रेडिंग Entertainment का ऐसा तरीका बन गई है कि जिसे हर कोई Experience करने से खुद को रोक नहीं पा रहा है। केसिनो की तरह ज्यादातर दांव फेल होने पर भी कभी न कभी सही दांव से नुकसान की भरपाई करते हुए कमाई कर पाने का भरोसा सिर्फ यही पर पूरा हो सकता है पर ऐसी किस्मत वाले लोग ज्यादा नहीं है जो साफ बताता है कि लोग एसी पॉवर से रोजाना भिड़ रहे हैं जिससे जीतना लगभग नामुमकिन होता है।

Share
‘सट्टेबाजी’: तरीके अनेक, काम एक!

कोई एक दिन के लिए ऑप्शन या फ्यूचर क्यों खरीदता है? वॉरेन बफे ने हाल ही में एक इंटरव्यू में यह पूछते हुए कहा कि सट्टेबाजी के मूड में जितने लोग आज कार्यरत हैं उतने इतिहास में कभी नहीं रहे। मोबाइल फोन पर खेलों से लेकर कमोडिटी, शेयर बाजार, सोना, चांदी जैसे कई प्रोडक्ट्स की खरीद-बेच इतनी आसान हो गई है कि यह युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का फेवरेट टाइमपास का माध्यम बन गई है। मिनटों या घंटों में खरीद-बेच करके कमाई करने का मौका देने वाले इस काम को ज्यादातर लोग ‘इंवेस्टमेंट’ कहते हैं पर वास्तव में यह तुरंत कमाई करने के लिए किया जाने वाला ऐसा काम है जिसमें कमाकर निकल जाने वाले ढूंढने से भी नहीं मिलते। ट्रेडिंग का यह नायाब खेल यानि सट्टेबाजी घर-घर में पहुंच चुकी है भले ही इसे किसी भी शानदार नाम से जाना जाए और यह समझने के लिए वैसी सुपर इंटेलिजेंस की जरूरत बिल्कुल नहीं होती जैसी आजकल हमें चारों ओर से घेरे हुए है। रीयल टाइम कीमतों पर ट्रेड के साथ-साथ फ्यूचर में क्या कीमतें हो सकती है या फ्यूचर में कीमतें ऊपर जाएगी या नीचे, ऐसे प्रोडक्ट भी दांव लगाने वालों के चहेते बन गए हैं जबकि वास्तव में इनकी शुरुआत कारोबारों के फायदे को ध्यान में रखकर हुई थी। निफ्टी जैसे प्रोडक्ट यानि यह ऊपर जाएगी या नीचे इस पर दांव लगाने को कोई क्या कहेगा यह किसी से छुपा नहीं है। निफ्टी एक नम्बर है जो कुछ भी पैदा नहीं करता और न बनाता है पर फिर भी इसके मूवमेंट को पकडऩे की इंटेलिजेंस होने का भरोसा रखने वाले लोग करोड़ों की संख्या में रोजाना इस पर दांव लगाते हैं। जिन लोगों ने केसिनो की विजिट की है, वे अच्छी तरह समझ सकते हैं कि संभावना (Probability) पर शॉर्ट-टर्म दांव लगाने को सट्टेबाजी कहा जाता है और ऐसे दांव पूंजी को बिना किसी उपयोग के एक हाथ से दूसरे हाथ में ट्रांसफर करने के अलावा कुछ हासिल नहीं कर सकते। मशहूर इंवेस्टर वॉरेन बफे ने सट्टेबाजी के बारे में एक बार कहा था कि अगर कोई आधे घंटे से पोकर (ताश का खेल) खेल रहा है और उसे तब भी यह पता न चले कि कौन हार रहा है तो यह तय है कि वह खुद ही हार रहा है। यही नियम सट्टेबाजी जिसे ट्रेडिंग कहा जाता है, पर लागू होता है जहां ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं रहता कि वास्तव में उन्होंने खोया है या कमाया है। सेबी का डेटा कहता है कि डेरिवेटिव में ट्रेडिंग करने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग नुकसान में रहते हैं यानि ट्रेडिंग के खेल में खोने वाले घर-घर में मिल जाएंगे पर फिर भी इसका नशा ऐसा है जो उतरता ही नहीं है।

मोतीलाल ओसवाल अपने क्लाइंटो को ट्रेडिंग करने के कई Option देता है जिसमें Regular, MTF, T+5, SIP है और ऑर्डर लगाने के लिए SL Limit, Slice जैसी सुविधाएं है। इस तरह के या ज्यादा तरीके दूसरी कंपनियां भी देती है और मार्जिन यानि पूरा पैसा न होने पर भी क्षमता से ज्यादा ट्रेड करने की सुविधा तो सबसे बड़ा टूल है जिसके आकर्षण से लोग सभी हदो को भुलाकर दांव पर दांव खेलते रहते हैं। ट्रेडिंग से कमाई को अपने काबू में करने के लिए हाई स्पीड के नेटवर्क पर कई लोग वर्षों से काम कर रहे हैं जो Milliseconds (एक सैकंड का हजारवां हिस्सा) में ट्रेड करने की सुविधा देता है लेकिन अब सॉफ्टवेयर की कोडिंग से ऐसे Deep Learning मॉडल पर ट्रेडिंग होने लगी है जो Milli Seconds, मिनटों व घंटों में होने वाले कीमतों के मूवमेंट की पहले ही यानि एडवांस में जानकारी दे सकता है। ऐसे ही मॉडल की मदद से ट्रेडिंग करने वाली एक कंपनी स्टॉक, बांड, फॉरेन एक्सचेंज, डेरिवेटिव, क्रिप्टो जैसे कई प्रोडक्ट्स पर रोजाना 250 बिलियन डॉलर के ट्रेड करती है और करोड़ों-अरबों के कैश बैलेंस के साथ ऐसी कई कंपनियां हैं जो कहीं से भी किसी भी देश के बाजारों में रोजाना ट्रेड कर रही है और जिन्होंने कीमतों के मूवमेंट का पहले ही पता लगाने का मॉडल डवलप कर लिया है। ट्रेडिंग क्या किसी कंपनी के बारे में हमें कोई जानकारी देती है या कोई संकेत बताती है, शायद नहीं। ट्रेडिंग के रूप में हो रही सट्टेबाजी कोई भी इकोनोमिक वेल्यू क्रिएट नहीं करती क्योंकि यह पैसा किसी काम पर नहीं लगता। सिर्फ और सिर्फ लांग टर्म इंवेस्टमेंट ही एकमात्र तरीका है जिससे शेयर बाजारों से पैसा उगाहने वाली कंपनियां लोगों के लिए कोई वेल्यू क्रिएट कर सकती है और शेयर होल्डर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। यह सच है कि ट्रेडिंग की लत तेजी से फैलती जा रही है पर Common Sense के हिसाब से ट्रेडिंग में लगने वाला पैसा अगर कुछ नया बनाने में लगे तो समाज के लिए बेहतर रिजल्ट दे सकता है। सच यह भी है कि ट्रेडिंग Entertainment का ऐसा तरीका बन गई है कि जिसे हर कोई Experience करने से खुद को रोक नहीं पा रहा है। केसिनो की तरह ज्यादातर दांव फेल होने पर भी कभी न कभी सही दांव से नुकसान की भरपाई करते हुए कमाई कर पाने का भरोसा सिर्फ यही पर पूरा हो सकता है पर ऐसी किस्मत वाले लोग ज्यादा नहीं है जो साफ बताता है कि लोग एसी पॉवर से रोजाना भिड़ रहे हैं जिससे जीतना लगभग नामुमकिन होता है।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news