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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

05-05-2026

AI की एंट्री : US में बदल रहा है काम करने का तरीका

  •  अमेरिका में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है, और इस बदलाव की वजह है ्रढ्ढ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)। अब AI कोई दूर की चीज नहीं रही, बल्कि लोगों के रोज के काम का हिस्सा बनती जा रही है, लेकिन हर कोई इसका फायदा नहीं उठा पा रहा-यही इस कहानी का सबसे अहम हिस्सा है। जिन लोगों की कमाई ज्यादा है, वे AI का इस्तेमाल भी ज्यादा कर रहे हैं। $200,000 से ऊपर कमाने वाले लोगों में करीब 66' लोग AI यूज कर रहे हैं, जबकि $50,000 से कम कमाने वालों में यह सिर्फ करीब 16' है। इसका मतलब साफ है-जिसके पास ज्यादा पैसा और अच्छे संसाधन हैं, उसे नई तकनीक सीखने और इस्तेमाल करने का ज्यादा मौका मिल रहा है। पढ़ाई भी यहां बड़ा रोल निभा रही है। कॉलेज पास लोग AI का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जबकि जिनके पास डिग्री नहीं है, वे पीछे रह रहे हैं। आज के समय में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही स्किल्स और टेक्नोलॉजी की समझ भी जरूरी हो गई है। काम के प्रकार में भी फर्क दिखता है। फुल-टाइम नौकरी करने वाले लोग AI ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि पार्ट-टाइम काम करने वालों में यह कम है। इसका कारण यह है कि बड़ी कंपनियां और स्थिर नौकरियां नई तकनीक जल्दी अपनाती हैं। अच्छी बात यह है कि जो लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा है। ज्यादातर लोगों ने कहा कि इससे उनका काम आसान हो गया है और वे पहले से ज्यादा तेजी से काम कर पा रहे हैं। यानी AI काम छीनने के बजाय काम को बेहतर बना भी रहा है-लेकिन सिर्फ उनके लिए जो इसे सीख रहे हैं। यहीं सबसे बड़ा सवाल आता है-क्या AI सबको आगे बढ़ाएगा या सिर्फ कुछ लोगों को? अगर सभी लोगों को ्रढ्ढ सीखने का मौका नहीं मिला, तो अमीर और गरीब के बीच का फर्क और बढ़ सकता है। आखिर में बात सीधी है-AI अब भविष्य नहीं, आज की जरूरत है। जो लोग इसे सीखेंगे और अपनाएंगे, वही आगे बढ़ेंगे। और जो इसे नजरअंदाज करेंगे, उनके लिए आगे चलकर मुश्किल हो सकती है।

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AI की एंट्री : US में बदल रहा है काम करने का तरीका

 अमेरिका में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है, और इस बदलाव की वजह है ्रढ्ढ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)। अब AI कोई दूर की चीज नहीं रही, बल्कि लोगों के रोज के काम का हिस्सा बनती जा रही है, लेकिन हर कोई इसका फायदा नहीं उठा पा रहा-यही इस कहानी का सबसे अहम हिस्सा है। जिन लोगों की कमाई ज्यादा है, वे AI का इस्तेमाल भी ज्यादा कर रहे हैं। $200,000 से ऊपर कमाने वाले लोगों में करीब 66' लोग AI यूज कर रहे हैं, जबकि $50,000 से कम कमाने वालों में यह सिर्फ करीब 16' है। इसका मतलब साफ है-जिसके पास ज्यादा पैसा और अच्छे संसाधन हैं, उसे नई तकनीक सीखने और इस्तेमाल करने का ज्यादा मौका मिल रहा है। पढ़ाई भी यहां बड़ा रोल निभा रही है। कॉलेज पास लोग AI का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जबकि जिनके पास डिग्री नहीं है, वे पीछे रह रहे हैं। आज के समय में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही स्किल्स और टेक्नोलॉजी की समझ भी जरूरी हो गई है। काम के प्रकार में भी फर्क दिखता है। फुल-टाइम नौकरी करने वाले लोग AI ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि पार्ट-टाइम काम करने वालों में यह कम है। इसका कारण यह है कि बड़ी कंपनियां और स्थिर नौकरियां नई तकनीक जल्दी अपनाती हैं। अच्छी बात यह है कि जो लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा है। ज्यादातर लोगों ने कहा कि इससे उनका काम आसान हो गया है और वे पहले से ज्यादा तेजी से काम कर पा रहे हैं। यानी AI काम छीनने के बजाय काम को बेहतर बना भी रहा है-लेकिन सिर्फ उनके लिए जो इसे सीख रहे हैं। यहीं सबसे बड़ा सवाल आता है-क्या AI सबको आगे बढ़ाएगा या सिर्फ कुछ लोगों को? अगर सभी लोगों को ्रढ्ढ सीखने का मौका नहीं मिला, तो अमीर और गरीब के बीच का फर्क और बढ़ सकता है। आखिर में बात सीधी है-AI अब भविष्य नहीं, आज की जरूरत है। जो लोग इसे सीखेंगे और अपनाएंगे, वही आगे बढ़ेंगे। और जो इसे नजरअंदाज करेंगे, उनके लिए आगे चलकर मुश्किल हो सकती है।


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