मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे सस्ता, प्रभावी और स्थायी विकल्प है। राजस्थान आज सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों से राजस्थान को ऊर्जा का पावरहाउस बनाने में भागीदारी निभाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कहा कि निवेश की दृष्टि से भी राजस्थान देश के सबसे अनुकूल राज्यों में शामिल है। सरकार उद्योगों और निवेशकों को हर संभव सहयोग एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रगतिशील नीतियों का ही परिणाम है कि राज्य में सौर, पवन, बायो ऊर्जा, पंप स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन की परियोजनाओ में निवेश के प्रस्ताव मिले हैं, जो कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि राज्य में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा की संभावनाएं मौजद हंै। अब तक राज्य में 47 गीगावाट से अधिक की अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और राजस्थान सौर परियोजना स्थापना में देश में अग्रणी है। हमारी सरकार के कार्यकाल में 24 हजार 410 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा, बायो फ्यूल, ऊर्जा भंडारण एवं ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 जारी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुसुम योजना के तहत 4 हजार मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं तथा 6500 मेगावाट की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। साथ ही, राज्य में राजकीय उपक्रमों एवं संयुक्त उपक्रमों द्वारा 4 हजार 670 मेगावाट के सोलर पार्क स्थापित हो चुके है। 12 हजार मेगावाट से अधिक के सोलर पार्क निर्माणाधीन हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में 1000 से अधिक राजकीय भवनों पर सौर्यकरण किया जा चुका है। वर्चुअल एवं नेट मीटरिंग के माध्यम से 600 मेगावाट के प्लांट लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा तथा 10 गीगावाट की ऊर्जा भंडारण परियोजना स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे वर्ष 2047 तक 290 गीगावाट किया जाएगा। 6 हजार मेगावाट बैट्री स्टोरेज क्षमता का आवंटन किया जा चुका है और 6 हजार 400 मेगावाट की परियोजना प्रक्रिया में हैं।