तेजी से डिजिटल होती वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए समय के साथ तकनीकी रूप से खुद को सशक्त करना और अपडेट रखना जरूरी है। इसी क्रम में राजस्थान अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी नई पहचान स्थापित कर रहा है। भिवाड़ी में प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर क्लस्टर की शुरुआत राजस्थान के लिए केवल एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि ‘विकसित राजस्थान-2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। राजस्थान की इंडस्ट्रीयल हिस्ट्री में माइल स्टोन : राजस्थान की इंडस्ट्रीयल हिस्ट्री में 15 मई 2026 का दिन एक माइल स्टोन है। इस दिन गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान भी राष्ट्रीय तकनीकी अभियान का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। भिवाड़ी के सलारपुर-खुशखेड़ा क्षेत्र में एल्सीना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित एवं 20 कंपनियों द्वारा मिलकर विकसित ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर ना केवल राजस्थान का पहला सेमीकंडक्टर क्लस्टर है, बल्कि देश की पहली एसएमई सेमीकंडक्टर फैसिलिटी भी है। यहां अब तक एक हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। वहीं, सहस्रा सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, सहस्रा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड और ई-पैक ड्यूरेबल लिमिटेड जैसी 11 कंपनियों ने 900 करोड़ के निवेश के साथ संचालन शुरू भी कर दिया है। जिससे 2 हजार 700 लोगों को रोजगार प्राप्त हो चुका है। इस अत्याधुनिक क्लस्टर में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, आरएफआईडी, ईवी कंपोनेंट्स एवं एयर कंडीशनर निर्माण से जुड़ी इंडस्ट्री कार्यरत हैं। इसकी वार्षिक पैकेजिंग क्षमता वर्तमान में लगभग 6 करोड़ सेमीकंडक्टर यूनिट्स है, जिसे अगले 2-3 वर्षों में बढ़ाकर 40 से 60 करोड़ यूनिट्स तक करने की योजना है। ग्लोबल मार्केट की डिजिटल इकॉनोमी में मजबूत दस्तक : आज के दौर में मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल तक, इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, लगभग हर आधुनिक तकनीक का मुख्य आधार सेमीकंडक्टर है। अब तक अमेरिका, चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देशों का ही इस क्षेत्र में वर्चस्व रहा है। ऐसे में भारत द्वारा आत्मनिर्भरता की दिशा में दिसंबर 2021 में ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन 1.0’ की शुरुआत एक दूरदर्शी कदम था। वहीं, केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ के लिए 1,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अनुमान है कि भारत वर्ष 2029 तक घरेलू जरूरतों के लगभग 70-75 प्रतिशत चिप्स के डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल कर लेगा। साथ ही, वर्ष 2035 तक विश्व के अग्रणी सेमीकंडक्टर राष्ट्रों में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। इन्वेस्टमेंट, स्किल डवलपमेंट और एम्पलॉयमेंट : केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्किल डवलपमेंट कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत 10 वर्षों में 85 हजार से अधिक सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें देश ने केवल 4 वर्षों में ही उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। देशभर के 323 शैक्षणिक संस्थानों में युवा सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। राजस्थान के 9 संस्थानों में भी इस कार्यक्रम के तहत विश्व स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा मार्च 2026 में जारी ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति’ के चलते प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आदर्श गंतव्य साबित हो रहा है। राज्य में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र, कांकणी औद्योगिक क्षेत्र एवं अन्य क्लस्टर प्राथमिक सेमीकंडक्टर कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।