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04-05-2026

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से राज्य में बनेंगे इंडस्ट्रीयल पार्क

  •  राज्य में विश्वस्तरीय इंडस्ट्रीयल विकास को बढ़ावा देने, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने तथा इन्वेस्टर्स को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राजस्थान इंडस्ट्रीयल पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 लागू की गई है। इस नीति के माध्यम से निजी डेवलपर्स, इंडस्ट्रीयल संस्थानों एवं वैश्विक इन्वेस्टर्स की पार्टनरशिप से प्रदेश में आधुनिक इंडस्ट्रीयल पार्कों का निर्माण किया जाएगा। नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में नवाचार को प्रोत्साहित करना, परिवर्तनकारी विकास सुनिश्चित करना तथा बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। इसके अंतर्गत निजी सहभागिता व पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (क्कक्कक्क) मॉडल के माध्यम से इंडस्ट्रीयल पार्क स्थापित किए जाएंगे। रीको इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तीव्र गति से कार्य कर रहा है।चार श्रेणियों में विकसित होंगे इंडस्ट्रीयल पार्क : नीति के अंतर्गत इंडस्ट्रीयल पार्कों को चार कैटेगरी ए, बी, सी एवं डी में वर्गीकृत किया गया है। कैटेगरी ए के अंतर्गत, रीको द्वारा चिन्हित स्थानों पर भूमि आवंटन के पश्चात प्राइवेट विकासकर्ता द्वारा परियोजनाओं का विकास किया जाएगा। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिसके उपरांत रीको प्रावधानों के अनुसार, प्रस्ताव की जांच कर भूमि का आवंटन नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। कैटेगरी बी में विकासकर्ता के पास कम से कम 80 प्रतिशत भूमि होना आवश्यक है, शेष 20 प्रतिशत भूमि रीको द्वारा आवंटित की जा सकेगी। कैटेगरी सी के अंतर्गत परियोजना पूर्णत: विकासकर्ता की भूमि पर ही विकसित की जायेगी। इसी प्रकार से कैटेगरी डी में इंडस्ट्रीयल पार्कों का विकास पब्लिक-प्राइवेट  पार्टनरशिप (क्कक्कक्क) मॉडल पर किया जाएगा, जिसमें रीको परियोजना के स्क्कङ्क या छ्वङ्क में भूमि को इक्विटी के रूप में योगदान करेगा तथा उसकी न्यूनतम इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रखेगा। इस मॉडल में परियोजना क्रियान्वयन में रीको की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इन्वेस्टर्स के लिए आकर्षक प्रोत्साहन:  नीति के तहत सामान्य आधारभूत संरचना के लिए 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान प्रदान किया जाएगा जिसकी अधिकतम 100 एकड़ तक के पार्कों के लिये अधिकतम 20 करोड़ रुपये, 100 से 250 एकड़ तक के पार्क हेतु अधिकतम 30 करोड़ रुपये तथा 250 एकड़ से अधिक के पार्क के लिये अधिकतम 40 करोड़ रूपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, निर्धारित शर्तों के अनुसार सीईटीपी हेतु ग्रीन इंसेंटिव, कॉमन यूटिलिटी सेंटर, प्लग-एंड-प्ले कार्यालय परिसरों के लिए सहायता तथा विद्युत शुल्क, स्टाम्प शुल्क एवं रूपांतरण शुल्क में छूट/प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, एप्रोच रोड के निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त सहायता विकास कर्ता को प्रदान की जाएगी। राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत औद्योगिक पार्क बनाये जाने हेतु रीको ने प्रारंभिक रूप से कुछ क्षेत्र चिन्हित किए हैं जिनमें कैटेगरी ए के अंतर्गत अजमेर (केकड़ी), धौलपुर (बिजौली), चित्तौडग़ढ़ (नर्बदिया), भीलवाड़ा (कोडिया), दौसा (राजाहेड़ा, गुडा अशीकपुरा, नोरपुर), बूंदी (मायेजा), डीडवाना-कुचामन (भखरी मोलास) तथा सीकर (बगडिय़ो का बास) सहित विभिन्न स्थानों को शामिल किया गया है। वहीं कैटेगरी डी के अंतर्गत अजमेर (कनई कलां), दौसा (कोटवालो का बास, नांगल झमरवारा, रालावता, सुधर्मपुरा) तथा कोटा (कसार) को सम्मिलित किया गया है।

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पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से राज्य में बनेंगे इंडस्ट्रीयल पार्क

 राज्य में विश्वस्तरीय इंडस्ट्रीयल विकास को बढ़ावा देने, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने तथा इन्वेस्टर्स को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राजस्थान इंडस्ट्रीयल पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 लागू की गई है। इस नीति के माध्यम से निजी डेवलपर्स, इंडस्ट्रीयल संस्थानों एवं वैश्विक इन्वेस्टर्स की पार्टनरशिप से प्रदेश में आधुनिक इंडस्ट्रीयल पार्कों का निर्माण किया जाएगा। नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में नवाचार को प्रोत्साहित करना, परिवर्तनकारी विकास सुनिश्चित करना तथा बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। इसके अंतर्गत निजी सहभागिता व पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (क्कक्कक्क) मॉडल के माध्यम से इंडस्ट्रीयल पार्क स्थापित किए जाएंगे। रीको इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तीव्र गति से कार्य कर रहा है।चार श्रेणियों में विकसित होंगे इंडस्ट्रीयल पार्क : नीति के अंतर्गत इंडस्ट्रीयल पार्कों को चार कैटेगरी ए, बी, सी एवं डी में वर्गीकृत किया गया है। कैटेगरी ए के अंतर्गत, रीको द्वारा चिन्हित स्थानों पर भूमि आवंटन के पश्चात प्राइवेट विकासकर्ता द्वारा परियोजनाओं का विकास किया जाएगा। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिसके उपरांत रीको प्रावधानों के अनुसार, प्रस्ताव की जांच कर भूमि का आवंटन नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। कैटेगरी बी में विकासकर्ता के पास कम से कम 80 प्रतिशत भूमि होना आवश्यक है, शेष 20 प्रतिशत भूमि रीको द्वारा आवंटित की जा सकेगी। कैटेगरी सी के अंतर्गत परियोजना पूर्णत: विकासकर्ता की भूमि पर ही विकसित की जायेगी। इसी प्रकार से कैटेगरी डी में इंडस्ट्रीयल पार्कों का विकास पब्लिक-प्राइवेट  पार्टनरशिप (क्कक्कक्क) मॉडल पर किया जाएगा, जिसमें रीको परियोजना के स्क्कङ्क या छ्वङ्क में भूमि को इक्विटी के रूप में योगदान करेगा तथा उसकी न्यूनतम इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रखेगा। इस मॉडल में परियोजना क्रियान्वयन में रीको की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इन्वेस्टर्स के लिए आकर्षक प्रोत्साहन:  नीति के तहत सामान्य आधारभूत संरचना के लिए 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान प्रदान किया जाएगा जिसकी अधिकतम 100 एकड़ तक के पार्कों के लिये अधिकतम 20 करोड़ रुपये, 100 से 250 एकड़ तक के पार्क हेतु अधिकतम 30 करोड़ रुपये तथा 250 एकड़ से अधिक के पार्क के लिये अधिकतम 40 करोड़ रूपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, निर्धारित शर्तों के अनुसार सीईटीपी हेतु ग्रीन इंसेंटिव, कॉमन यूटिलिटी सेंटर, प्लग-एंड-प्ले कार्यालय परिसरों के लिए सहायता तथा विद्युत शुल्क, स्टाम्प शुल्क एवं रूपांतरण शुल्क में छूट/प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, एप्रोच रोड के निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त सहायता विकास कर्ता को प्रदान की जाएगी। राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत औद्योगिक पार्क बनाये जाने हेतु रीको ने प्रारंभिक रूप से कुछ क्षेत्र चिन्हित किए हैं जिनमें कैटेगरी ए के अंतर्गत अजमेर (केकड़ी), धौलपुर (बिजौली), चित्तौडग़ढ़ (नर्बदिया), भीलवाड़ा (कोडिया), दौसा (राजाहेड़ा, गुडा अशीकपुरा, नोरपुर), बूंदी (मायेजा), डीडवाना-कुचामन (भखरी मोलास) तथा सीकर (बगडिय़ो का बास) सहित विभिन्न स्थानों को शामिल किया गया है। वहीं कैटेगरी डी के अंतर्गत अजमेर (कनई कलां), दौसा (कोटवालो का बास, नांगल झमरवारा, रालावता, सुधर्मपुरा) तथा कोटा (कसार) को सम्मिलित किया गया है।


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