सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऑथोरिटी (सीसीपीए) ने जेईई और नीट परीक्षा परिणामों से जुड़े भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के मामले में सीकर बेस्ड करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि जांच में पाया गया कि सीएलसी ने अपनी प्रचार सामग्री में सफल छात्रों की उपलब्धियों को प्रमुखता से दिखाया, लेकिन यह महत्वपूर्ण जानकारी छिपा ली कि इन छात्रों ने किस तरह के पाठ्यक्रम में हिस्सा लिया था। सीसीपीए की मुख्य कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा के आदेश में इस गतिविधि को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना गया। सीकर के कोचिंग संस्थान सीएलसी ने अपने विज्ञापनों में एमबीबीएस, आईआईटी एवं अन्य परीक्षाओं में 1650 से अधिक चयन का दावा किया था। संस्थान ने लिखित जवाब में इसे 1996 से अब तक का कुल चयन बताया, लेकिन सुनवाई के दौरान कहा कि यह केवल वर्ष 2024 का आंकड़ा है। उपभोक्ता प्राधिकरण ने इस विरोधाभास को दावा अप्रमाणित मानने के लिए पर्याप्त माना। सीसीपीए ने कहा कि सफल छात्रों के बारे में यह जानकारी छिपाना कि उन्होंने पूर्णकालिक कक्षा, ऑनलाइन कोर्स, क्रैश कोर्स या केवल टेस्ट सीरीज ली थी, भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है। सीएलसी को ऐसे विज्ञापन तत्काल वापस लेने और भविष्य में पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। सीएलसी ने आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में अपील की है। गौरतलब है कि प्राधिकरण ने अब तक कोचिंग संस्थानों को 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं और 31 संस्थानों पर कुल 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।