भारत में क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ते कदम अब सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखने लगे हैं। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है—Piped Natural Gas (PNG), जो अब धीरे-धीरे रुक्कत्र सिलेंडर की जगह लेती जा रही है। इस बदलाव में राजस्थान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और हाल के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य में LPG कनेक्शन का विस्तार मजबूत गति से हो रहा है। अगर राजस्थान के कुल PNG कनेक्शनों पर नजर डालें, तो पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। मार्च 2024 तक राज्य में करीब 3.37 लाख क्कहृत्र कनेक्शन थे, जो मार्च 2025 में बढक़र लगभग 4.57 लाख हो गए और जनवरी 2026 तक यह संख्या बढक़र करीब 5.36 लाख तक पहुंच गई। यानी महज दो वर्षों में लगभग 60 पर्सेंट की वृद्धि... यह संकेत देता है कि क्कहृत्र अब शहरी घरों के लिए तेजी से एक पसंदीदा विकल्प बन रहा है। यह वृद्धि केवल एक या दो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई क्षेत्रों में समान रूप से दिखाई देती है। अजमेर, पाली और राजसमंद जैसे क्षेत्रों में क्कहृत्र कनेक्शनों की संख्या सबसे अधिक है, जहां जनवरी 2026 तक यह आंकड़ा 2.7 लाख से अधिक हो चुका है। वहीं कोटा क्षेत्र में भी स्थिर और मजबूत वृद्धि देखने को मिली है, जहां कनेक्शन लगभग दोगुने होकर 69 हजार के करीब पहुंच गए हैं। जयपुर और अलवर जैसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में क्कहृत्र ड्डस्रशश्चह्लद्बशठ्ठ की रफ्तार और भी तेज है। यहां 2024 में जहां कुछ हजार कनेक्शन थे, वहीं 2026 तक यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसी तरह उदयपुर और चित्तौडग़ढ़ जैसे क्षेत्रों में भी क्कहृत्र नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जो इस बात का संकेत है कि यह सुविधा अब बड़े शहरों से निकलकर अन्य शहरी क्षेत्रों में भी पहुंच रही है। PNG कनेक्शनों की इस वृद्धि के साथ-साथ PNG स्टेशन नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। राजस्थान में PNG स्टेशनों की संख्या मार्च 2024 में 417 थी, जो बढक़र जनवरी 2026 तक 569 हो गई। यह दर्शाता है कि राज्य में गैस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ विकसित हो रहा है, जिससे घरेलू और परिवहन दोनों क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है। अगर इस ट्रेंड की तुलना राष्ट्रीय स्तर से करें, तो राजस्थान की ग्रोथ और भी प्रभावशाली नजर आती है। पूरे भारत में क्कहृत्र कनेक्शन मार्च 2024 के लगभग 1.29 करोड़ से बढक़र जनवरी 2026 तक 1.62 करोड़ तक पहुंचे हैं । यानी राष्ट्रीय स्तर पर जहां लगभग 25 पर्सेंट की वृद्धि हुई है, वहीं राजस्थान में यह वृद्धि लगभग 60 पर्सेंट रही है। यह अंतर साफ दिखाता है कि राज्य PNG adoption के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
