इस साल जनवरी-मार्च क्वार्टर में देश के नौ प्रमुख शहरों में को-वर्किंगस्पेस मुहैया कराने वाली फर्मों की तरफ से पट्टा देने में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रियल एस्टेट सलाहकार फर्म सीबीआरई ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। को-वर्किंग स्पेस मुहैया कराने वाली कंपनियां अपने केंद्र स्थापित करने के लिए संपत्ति मालिकों से किराये पर कार्यालय लेती हैं और फिर मुख्य रूप से कॉरपोरेट ग्राहकों को पट्टे पर देती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2025 तिमाही में देश के नौ प्रमुख बाजारों में 21.6 लाख वर्ग फुट वर्कस्पेस को पट्टे पर दिया गया। गत वर्ष की समान अवधि में को-वर्किंग स्पेस फर्मों ने 37.6 लाख वर्ग फुट क्षेत्र को किराये पर दिया था। आंकड़ों के मुताबिक, कुल वर्कस्पेस पट्टा लेनदेन में को-वर्क स्पेस सेवा प्रदाताओं की हिस्सेदारी घटकर इस मार्च तिमाही में 12 प्रतिशत रह गई जो गत वर्ष की समान अवधि में 22 प्रतिशत थी। कोविड महामारी के बाद लचीले प्रबंधित कार्यस्थलों की मांग बढऩे के बावजूद यह गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, जनवरी-मार्च, 2025 में नौ शहरों में कार्यालय स्थान का कुल सकल पट्टा पांच प्रतिशत बढक़र 180 लाख वर्ग फुट हो गया, जो गत वर्ष की समान अवधि में 171 लाख वर्गफुट था। सीबीआरई इंडिया के प्रबंध निदेशक (परामर्श एवं लेनदेन सेवाएं) राम चंदनानी ने कहा कि भारत वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है और 2025 में कुल कार्यालय स्थल मांग में जीसीसी का योगदान लगभग 35-40 प्रतिशत होने की उम्मीद है। चंदनानी ने कहा कि प्रौद्योगिकी और बैंकिंग एवं वित्त सेवा क्षेत्र इस मांग को आगे भी बढ़ाने का काम करेंगे।