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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

23-05-2026

‘कुशल श्रमिकों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बढ़ाने के लिए दस्तावेजों को मानकीकृत बनाने की जरूरत’

  •  नीति आयोग ने कहा है कि कुशल भारतीय कामगारों के लिए विदेश जाने की व्यवस्था को सुगम बनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए सरकार को अनुबंध और पारदर्शिता उपायों को संस्थागत रूप देना चाहिए और द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से सामूहिक वीजा आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए। आयोग ने दस्तावेजों और पूर्व-सत्यापन प्रणालियों को मानकीकृत करने का भी सुझाव दिया है। नीति आयोग ने ‘राज्य रूपरेखा: कुशल कामगारों के लिए अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को बढ़ावा’ शीर्षक से जारी शोध पत्र में कहा कि सरकार को भारतीय कुशल कामगारों के वीजा आवेदन की मानकीकृत प्रक्रिया में सहायता के लिए गंतव्य-देश के दूतावासों के साथ संपर्क व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए। शोध पत्र में फॉर्म जमा करने, मिलने का समय निर्धारित करने, बायोमेट्रिक आवश्यकताओं और दस्तावेज संकलन के लिए संरचनात्मक सहायता प्रदान करने का भी आह्वान किया गया है। इसमें यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि वीजा प्रक्रिया से पहले सभी रोजगार अनुबंधों की समीक्षा, पंजीकरण और सत्यापन किया जाए। शोध पत्र में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत का जनसंख्या संबंधी लाभ 2030 में उच्चतम स्तर पर होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रवासी अब विश्व स्तर पर श्रम आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण जरिया है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ताजा अनुमानों के अनुसार, 2022 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की वैश्विक संख्या 28.45 करोड़ थी, जिनमें से 25.57 करोड़ कामकाजी उम्र (15 से अधिक) के थे। इनमें से 16.77 करोड़ प्रवासी वैश्विक श्रम शक्ति का हिस्सा थे। इनमें से 15.56 करोड़ कार्यरत थे, जबकि 1.21 करोड़ बेरोजगार थे लेकिन काम के लिए उपलब्ध थे। कुल मिलाकर, 2022 में प्रवासियों की हिस्सेदारी वैश्विक श्रम शक्ति का 4.7' थी। शोध पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रयास इंटरनेशनल माइग्रेशन एंड मोबिलिटी मैपिंग रिपोर्ट (2026) से पता चलता है कि विदेशों में रोजगार के लिए औपचारिक रूप से कौशल प्रशिक्षण के रास्ते विभिन्न क्षेत्रों और श्रमिक श्रेणियों में असमान बने हुए हैं।  कम और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए, विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों जैसे अनौपचारिक सामाजिक नेटवर्क अक्सर सूचना का पहला स्रोत होते हैं। वहीं 33% इच्छुक श्रमिक नौकरी दिलाने, वीजा प्रक्रिया और प्रस्थान से पहले मार्गदर्शन के लिए निजी भर्ती एजेंसियों पर निर्भर रहते हैं। शोध पत्र में कहा गया है कि विदेश में काम करने के लिए कौशल प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के लिए भाषा प्रवीणता, सांस्कृतिक मार्गदर्शन और प्रस्थान-पूर्व तैयारी सहित व्यापक प्रशिक्षण, गंतव्य देश की आवश्यकताओं के साथ सुचारू रूप से तालमेल बिठाने और एक सहज परिवर्तन सुनिश्चित करता है। इसमें कहा गया, ‘‘ऐसा दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय आवाजाही एक समानांतर या अनौपचारिक मार्ग के बजाय मजबूत कौशल प्रणालियों का परिणाम हो, जिससे श्रमिक कल्याण और राष्ट्रीय आर्थिक लाभ दोनों को बढ़ावा मिले।’’ प्रयास इंटरनेशनल माइग्रेशन एंड मोबिलिटी मैपिंग रिपोर्ट (2026) से पता चलता है कि भारत के कुशल और अर्ध-कुशल कामगारों के लिए विदेश जाने के निर्णय अभी भी वेतन से काफी हद तक प्रभावित हैं। भारत और गंतव्य देशों के बीच आय का अंतर मुख्य आकर्षण का कारण है, जबकि गरीबी, कर्ज और रोजगार की कमी अन्य कारक हैं। परंपरागत रूप से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। यहां लंबे समय से कम तथा अर्ध-कुशल श्रम की मांग से यह स्थिति बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में विविधता भी देखी गई है, जिसमें कामगार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और जापान जैसे तेजी से विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका कारण ये क्षेत्र सुरक्षित वातावरण, दीर्घकालिक करियर संभावनाओं और संरचनात्मक कौशल विकास उपलब्ध कराते हैं। निर्माण, देखभाल और विनिर्माण क्षेत्रों में कामगारों की नियुक्ति के कारण इजराइल, इटली, नीदरलैंड और पोलैंड सहित नए गंतव्य भी उभर रहे हैं।

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‘कुशल श्रमिकों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बढ़ाने के लिए दस्तावेजों को मानकीकृत बनाने की जरूरत’

 नीति आयोग ने कहा है कि कुशल भारतीय कामगारों के लिए विदेश जाने की व्यवस्था को सुगम बनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए सरकार को अनुबंध और पारदर्शिता उपायों को संस्थागत रूप देना चाहिए और द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से सामूहिक वीजा आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए। आयोग ने दस्तावेजों और पूर्व-सत्यापन प्रणालियों को मानकीकृत करने का भी सुझाव दिया है। नीति आयोग ने ‘राज्य रूपरेखा: कुशल कामगारों के लिए अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को बढ़ावा’ शीर्षक से जारी शोध पत्र में कहा कि सरकार को भारतीय कुशल कामगारों के वीजा आवेदन की मानकीकृत प्रक्रिया में सहायता के लिए गंतव्य-देश के दूतावासों के साथ संपर्क व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए। शोध पत्र में फॉर्म जमा करने, मिलने का समय निर्धारित करने, बायोमेट्रिक आवश्यकताओं और दस्तावेज संकलन के लिए संरचनात्मक सहायता प्रदान करने का भी आह्वान किया गया है। इसमें यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि वीजा प्रक्रिया से पहले सभी रोजगार अनुबंधों की समीक्षा, पंजीकरण और सत्यापन किया जाए। शोध पत्र में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत का जनसंख्या संबंधी लाभ 2030 में उच्चतम स्तर पर होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रवासी अब विश्व स्तर पर श्रम आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण जरिया है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ताजा अनुमानों के अनुसार, 2022 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की वैश्विक संख्या 28.45 करोड़ थी, जिनमें से 25.57 करोड़ कामकाजी उम्र (15 से अधिक) के थे। इनमें से 16.77 करोड़ प्रवासी वैश्विक श्रम शक्ति का हिस्सा थे। इनमें से 15.56 करोड़ कार्यरत थे, जबकि 1.21 करोड़ बेरोजगार थे लेकिन काम के लिए उपलब्ध थे। कुल मिलाकर, 2022 में प्रवासियों की हिस्सेदारी वैश्विक श्रम शक्ति का 4.7' थी। शोध पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रयास इंटरनेशनल माइग्रेशन एंड मोबिलिटी मैपिंग रिपोर्ट (2026) से पता चलता है कि विदेशों में रोजगार के लिए औपचारिक रूप से कौशल प्रशिक्षण के रास्ते विभिन्न क्षेत्रों और श्रमिक श्रेणियों में असमान बने हुए हैं।  कम और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए, विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों जैसे अनौपचारिक सामाजिक नेटवर्क अक्सर सूचना का पहला स्रोत होते हैं। वहीं 33% इच्छुक श्रमिक नौकरी दिलाने, वीजा प्रक्रिया और प्रस्थान से पहले मार्गदर्शन के लिए निजी भर्ती एजेंसियों पर निर्भर रहते हैं। शोध पत्र में कहा गया है कि विदेश में काम करने के लिए कौशल प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के लिए भाषा प्रवीणता, सांस्कृतिक मार्गदर्शन और प्रस्थान-पूर्व तैयारी सहित व्यापक प्रशिक्षण, गंतव्य देश की आवश्यकताओं के साथ सुचारू रूप से तालमेल बिठाने और एक सहज परिवर्तन सुनिश्चित करता है। इसमें कहा गया, ‘‘ऐसा दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय आवाजाही एक समानांतर या अनौपचारिक मार्ग के बजाय मजबूत कौशल प्रणालियों का परिणाम हो, जिससे श्रमिक कल्याण और राष्ट्रीय आर्थिक लाभ दोनों को बढ़ावा मिले।’’ प्रयास इंटरनेशनल माइग्रेशन एंड मोबिलिटी मैपिंग रिपोर्ट (2026) से पता चलता है कि भारत के कुशल और अर्ध-कुशल कामगारों के लिए विदेश जाने के निर्णय अभी भी वेतन से काफी हद तक प्रभावित हैं। भारत और गंतव्य देशों के बीच आय का अंतर मुख्य आकर्षण का कारण है, जबकि गरीबी, कर्ज और रोजगार की कमी अन्य कारक हैं। परंपरागत रूप से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। यहां लंबे समय से कम तथा अर्ध-कुशल श्रम की मांग से यह स्थिति बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में विविधता भी देखी गई है, जिसमें कामगार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और जापान जैसे तेजी से विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका कारण ये क्षेत्र सुरक्षित वातावरण, दीर्घकालिक करियर संभावनाओं और संरचनात्मक कौशल विकास उपलब्ध कराते हैं। निर्माण, देखभाल और विनिर्माण क्षेत्रों में कामगारों की नियुक्ति के कारण इजराइल, इटली, नीदरलैंड और पोलैंड सहित नए गंतव्य भी उभर रहे हैं।


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