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04-05-2026

दिल्ली सरकार के खजाने से 37.2 करोड़ रुपये की हेराफेरी, कोचिंग संस्थानों के नौ संचालक गिरफ्तार

  •  भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली सरकार की एक योजना से जुड़े 37.20 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सिलसिले में कोचिंग संस्थानों के नौ मालिकों, निदेशकों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह मामला 2025 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सूचीबद्ध किये गए कोचिंग संस्थानों ने 2018-19 में जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना के तहत सरकारी खजाने निधि प्राप्त करने के लिए व्यापक स्तर पर अनियमितता की। एसीबी के अनुसार, यह योजना 2017 में अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी, जिसकी प्रारंभिक अधिसूचना 9 जनवरी 2018 को जारी की गई थी। प्रथम चरण में आठ संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया था, जिनमें लगभग 5,000 छात्र नामांकित थे। कोचिंग शुल्क और छात्रों का वजीफा इन संस्थानों के माध्यम से दिया जाना था। वर्ष 2019-20 में, इस योजना का विस्तार करते हुए इसमें अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की श्रेणियों शामिल किया गया और 38 अतिरिक्त संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया। दोनों चरणों को मिलाकर लगभग 22,000 छात्र योजना में शामिल किये गए। बयान में कहा गया, ‘जांच से पता चला कि इन संस्थानों ने योजना के तहत सामूहिक रूप से लगभग 37.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए।’ जांच के निष्कर्ष योजना के दिशानिर्देशों के उल्लंघनों की ओर इशारा करते हैं। संस्थानों के लिए योजना की धनराशि के लिए अलग बैंक खाते रखना अनिवार्य था, लेकिन इस आदेश की कथित तौर पर अवहेलना की गई। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि संस्थानों द्वारा प्रस्तुत छात्रों की सूचियों में एक ही नाम की कई प्रविष्टियां थीं और दावों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के लिए कई नाम एक से अधिक संस्थानों की सूची में थे। जांच के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों से पूछताछ की गई। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने एक से अधिक संस्थानों में नामांकन नहीं कराया था, जिससे संकेत मिलता है कि पैसों की हेराफेरी के लिए फर्जी दाखिला रिकॉर्ड तैयार किये गए थे। एसीबी ने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई नियामक जांच अपर्याप्त पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में छात्रों के लिए निर्धारित वजीफे का वितरण नहीं किया गया। कुछ संस्थानों ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए नामांकित छात्रों को कोचिंग के लिए स्थानीय ट्यूशन सेंटरों में भेज दिया। कुछ मामलों में, संस्थानों ने मामला दर्ज होने के बाद छात्रों के खातों में वजीफे की राशि स्थानांतरित की। इन नौ आरोपियों को 29 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।

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दिल्ली सरकार के खजाने से 37.2 करोड़ रुपये की हेराफेरी, कोचिंग संस्थानों के नौ संचालक गिरफ्तार

 भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली सरकार की एक योजना से जुड़े 37.20 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सिलसिले में कोचिंग संस्थानों के नौ मालिकों, निदेशकों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह मामला 2025 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सूचीबद्ध किये गए कोचिंग संस्थानों ने 2018-19 में जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना के तहत सरकारी खजाने निधि प्राप्त करने के लिए व्यापक स्तर पर अनियमितता की। एसीबी के अनुसार, यह योजना 2017 में अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी, जिसकी प्रारंभिक अधिसूचना 9 जनवरी 2018 को जारी की गई थी। प्रथम चरण में आठ संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया था, जिनमें लगभग 5,000 छात्र नामांकित थे। कोचिंग शुल्क और छात्रों का वजीफा इन संस्थानों के माध्यम से दिया जाना था। वर्ष 2019-20 में, इस योजना का विस्तार करते हुए इसमें अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की श्रेणियों शामिल किया गया और 38 अतिरिक्त संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया। दोनों चरणों को मिलाकर लगभग 22,000 छात्र योजना में शामिल किये गए। बयान में कहा गया, ‘जांच से पता चला कि इन संस्थानों ने योजना के तहत सामूहिक रूप से लगभग 37.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए।’ जांच के निष्कर्ष योजना के दिशानिर्देशों के उल्लंघनों की ओर इशारा करते हैं। संस्थानों के लिए योजना की धनराशि के लिए अलग बैंक खाते रखना अनिवार्य था, लेकिन इस आदेश की कथित तौर पर अवहेलना की गई। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि संस्थानों द्वारा प्रस्तुत छात्रों की सूचियों में एक ही नाम की कई प्रविष्टियां थीं और दावों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के लिए कई नाम एक से अधिक संस्थानों की सूची में थे। जांच के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों से पूछताछ की गई। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने एक से अधिक संस्थानों में नामांकन नहीं कराया था, जिससे संकेत मिलता है कि पैसों की हेराफेरी के लिए फर्जी दाखिला रिकॉर्ड तैयार किये गए थे। एसीबी ने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई नियामक जांच अपर्याप्त पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में छात्रों के लिए निर्धारित वजीफे का वितरण नहीं किया गया। कुछ संस्थानों ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए नामांकित छात्रों को कोचिंग के लिए स्थानीय ट्यूशन सेंटरों में भेज दिया। कुछ मामलों में, संस्थानों ने मामला दर्ज होने के बाद छात्रों के खातों में वजीफे की राशि स्थानांतरित की। इन नौ आरोपियों को 29 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।


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