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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

20-05-2026

कीमत बढ़ोतरी से पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा कम होकर 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आया

  •  पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को होने वाले नुकसान में करीब एक-चौथाई की कमी आई है और यह घटकर लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। मूल्य वृद्धि के पहले ओएमसी का दैनिक घाटा करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण खुदरा ईंधन दरें अब भी लागत से कम पर ही बनी हुई हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार की तरफ से पेट्रोलियम कंपनियों को सब्सिडी देकर इसे घाटे की भरपाई करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनियों की ‘अंडर-रिकवरी’ यानी लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण होने वाला घाटा अब भी करीब 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष की वजह से तेल आपूर्ति पर असर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इस वजह से ओएमसी का घाटा बढक़र 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी कंपनियों को सीमित राहत ही देगी और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के बीच कंपनियों की लाभप्रदता पूरी तरह बहाल नहीं कर पाएगी। डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से मांग में कुछ कमी आ सकती है और इंपोर्ट बोझ घट सकता है। उन्होंने अनुमान जताया कि इससे मुद्रास्फीति पर 0.15 से 0.25' अंक का असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का अनुमान है कि उत्पाद शुल्क में राहत और हालिया बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल पर पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा कम होकर करीब 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर रह गया है। 

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कीमत बढ़ोतरी से पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा कम होकर 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आया

 पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को होने वाले नुकसान में करीब एक-चौथाई की कमी आई है और यह घटकर लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। मूल्य वृद्धि के पहले ओएमसी का दैनिक घाटा करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण खुदरा ईंधन दरें अब भी लागत से कम पर ही बनी हुई हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार की तरफ से पेट्रोलियम कंपनियों को सब्सिडी देकर इसे घाटे की भरपाई करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनियों की ‘अंडर-रिकवरी’ यानी लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण होने वाला घाटा अब भी करीब 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष की वजह से तेल आपूर्ति पर असर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इस वजह से ओएमसी का घाटा बढक़र 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी कंपनियों को सीमित राहत ही देगी और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के बीच कंपनियों की लाभप्रदता पूरी तरह बहाल नहीं कर पाएगी। डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से मांग में कुछ कमी आ सकती है और इंपोर्ट बोझ घट सकता है। उन्होंने अनुमान जताया कि इससे मुद्रास्फीति पर 0.15 से 0.25' अंक का असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का अनुमान है कि उत्पाद शुल्क में राहत और हालिया बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल पर पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा कम होकर करीब 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर रह गया है। 


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