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21-05-2026

आपराधिक अवमानना मामले में दोषी यूट्यूबर को अदालत ने 6 माह जेल की सजा सुनाई

  •  दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक यूट्यूबर को कुछ न्यायिक अधिकारियों पर ‘‘व्यक्तिगत हमला’’ करने और न्यायिक प्रणाली की गरिमा को ‘ठेस पहुंचाने’ वाले अपने वीडियो को लेकर अवमानना के मामलों में छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि यूट्यूबर गुलशन पाहूजा ने अपने व्यवहार से न तो कोई पछतावा दिखाया और न ही उनमें किसी ‘सुधार’ की उम्मीद नजर आ रही है। पीठ ने कहा कि इस प्रकार यदि उन्हें दंडित नहीं किया जाता है तो उनका हौसला बढ़ सकता है।  पीठ ने पाया, ‘‘वास्तव में, उनका (पाहूजा का) मानना है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह न्यायिक प्रणाली को सुधारने के इरादे से किया था। वह इस अदालत के समक्ष और अधिक अपमानजनक दलीलें पेश करके अपनी अवमानना को और बढ़ा रहे हैं तथा इस प्रकार, स्पष्ट रूप से, न तो उन्हें कोई पछतावा है और न ही वह किसी दया के पात्र हैं।’’ अदालत ने 16 मई को दिये गये अपने आदेश में कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ये मामले अवमाननाकर्ता पर अधिकतम सजा लगाने के लायक हैं। इसलिए, हम अवमाननाकर्ता यानी श्री गुलशन पाहूजा पर इनमें से प्रत्येक मामले में छह-छह महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास के साथ 2000 रुपये का जुर्माना लगाते हैं। हालांकि, यह सजा साथ-साथ चलेगी।’’ चूंकि अवमाननाकर्ता इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं इसलिए अदालत उन्हें उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में सक्षम बनाने के वास्ते 60 दिनों के लिए सजा निलंबित करती है। अदालत ने पाहूजा से कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय उसके फैसले पर रोक नहीं लगाता है तो पाहूजा 60 दिनों के बाद महापंजीयक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दें। पीठ ने यूट्यूबर को अदालत की आपराधिक अवमानना का दोषी पाते हुए 21 अप्रैल को कहा था कि उनके चैनल ‘‘फाइट 4 ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स’’ की विषय-वस्तु संविधान के तहत ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के रूप में संरक्षित नहीं थी।

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आपराधिक अवमानना मामले में दोषी यूट्यूबर को अदालत ने 6 माह जेल की सजा सुनाई

 दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक यूट्यूबर को कुछ न्यायिक अधिकारियों पर ‘‘व्यक्तिगत हमला’’ करने और न्यायिक प्रणाली की गरिमा को ‘ठेस पहुंचाने’ वाले अपने वीडियो को लेकर अवमानना के मामलों में छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि यूट्यूबर गुलशन पाहूजा ने अपने व्यवहार से न तो कोई पछतावा दिखाया और न ही उनमें किसी ‘सुधार’ की उम्मीद नजर आ रही है। पीठ ने कहा कि इस प्रकार यदि उन्हें दंडित नहीं किया जाता है तो उनका हौसला बढ़ सकता है।  पीठ ने पाया, ‘‘वास्तव में, उनका (पाहूजा का) मानना है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह न्यायिक प्रणाली को सुधारने के इरादे से किया था। वह इस अदालत के समक्ष और अधिक अपमानजनक दलीलें पेश करके अपनी अवमानना को और बढ़ा रहे हैं तथा इस प्रकार, स्पष्ट रूप से, न तो उन्हें कोई पछतावा है और न ही वह किसी दया के पात्र हैं।’’ अदालत ने 16 मई को दिये गये अपने आदेश में कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ये मामले अवमाननाकर्ता पर अधिकतम सजा लगाने के लायक हैं। इसलिए, हम अवमाननाकर्ता यानी श्री गुलशन पाहूजा पर इनमें से प्रत्येक मामले में छह-छह महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास के साथ 2000 रुपये का जुर्माना लगाते हैं। हालांकि, यह सजा साथ-साथ चलेगी।’’ चूंकि अवमाननाकर्ता इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं इसलिए अदालत उन्हें उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में सक्षम बनाने के वास्ते 60 दिनों के लिए सजा निलंबित करती है। अदालत ने पाहूजा से कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय उसके फैसले पर रोक नहीं लगाता है तो पाहूजा 60 दिनों के बाद महापंजीयक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दें। पीठ ने यूट्यूबर को अदालत की आपराधिक अवमानना का दोषी पाते हुए 21 अप्रैल को कहा था कि उनके चैनल ‘‘फाइट 4 ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स’’ की विषय-वस्तु संविधान के तहत ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के रूप में संरक्षित नहीं थी।


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