TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

11-05-2026

एसबीआई ने की अफोर्डेबल होम्स की परिभाषा में बदलाव की वकालत

  •  भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की वकालत की है। बैंक ने कहा है कि हाल के वर्षों में आवास की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे मौजूदा मानदंडों की समीक्षा जरूरी हो गई है। एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने नतीजों के बाद संवाददाताओं से कहा कि बैंक का औसत आवासीय ऋण आकार पिछले कुछ वर्षों में बढक़र लगभग 51 लाख रुपये हो गया है, जबकि दो वर्ष पहले यह करीब 35 से 40 लाख रुपये था। उन्होंने कहा, किफायती घरों की परिभाषा में बदलाव की आवश्यकता है। हम यह बात सरकार से लगातार कह रहे हैं। शेट्टी ने कहा कि देश में आवास की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए यह दोबारा तय करना जरूरी है कि किन घरों को किफायती आवास की श्रेणी में रखा जाए। वर्तमान में, 45 लाख रुपये तक की लागत वाले और निर्धारित आकार के कारपेट एरिया वाले घरों को किफायती आवास माना जाता है। इस श्रेणी के तहत दिए जाने वाले ऋणों को प्राथमिक क्षेत्र ऋण में शामिल किया जाता है, जिससे बैंकों को कर लाभ भी मिलता है। एसबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने आवास ऋण पोर्टफोलियो में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। शेट्टी ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ोतरी का बैंक के शुद्ध ब्याज मार्जिन पर कोई बड़ा असर पडऩे की संभावना नहीं है।

Share
एसबीआई ने की अफोर्डेबल होम्स की परिभाषा में बदलाव की वकालत

 भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की वकालत की है। बैंक ने कहा है कि हाल के वर्षों में आवास की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे मौजूदा मानदंडों की समीक्षा जरूरी हो गई है। एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने नतीजों के बाद संवाददाताओं से कहा कि बैंक का औसत आवासीय ऋण आकार पिछले कुछ वर्षों में बढक़र लगभग 51 लाख रुपये हो गया है, जबकि दो वर्ष पहले यह करीब 35 से 40 लाख रुपये था। उन्होंने कहा, किफायती घरों की परिभाषा में बदलाव की आवश्यकता है। हम यह बात सरकार से लगातार कह रहे हैं। शेट्टी ने कहा कि देश में आवास की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए यह दोबारा तय करना जरूरी है कि किन घरों को किफायती आवास की श्रेणी में रखा जाए। वर्तमान में, 45 लाख रुपये तक की लागत वाले और निर्धारित आकार के कारपेट एरिया वाले घरों को किफायती आवास माना जाता है। इस श्रेणी के तहत दिए जाने वाले ऋणों को प्राथमिक क्षेत्र ऋण में शामिल किया जाता है, जिससे बैंकों को कर लाभ भी मिलता है। एसबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने आवास ऋण पोर्टफोलियो में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। शेट्टी ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ोतरी का बैंक के शुद्ध ब्याज मार्जिन पर कोई बड़ा असर पडऩे की संभावना नहीं है।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news