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23-05-2026

भारत ने ब्रिटेन के नए इस्पात रक्षोपाय कदमों पर डब्ल्यूटीओ की बैठक में जताई चिंता

  •  भारत ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिटेन द्वारा इस्पात पर लगाए गए नए रक्षोपाय कदमों को लेकर चिंता जताई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ब्रिटेन एक जुलाई 2026 से शुल्क-मुक्त इस्पात आयात को सीमित करेगा और मौजूदा रक्षोपाय के तहत तय कोटा में 60 प्रतिशत की कटौती करेगा। इस सीमा से अधिक आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह नियम उन इस्पात उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें ब्रिटेन में भी बनाया जा सकता है। जिनेवा के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के अलावा ब्राजील, तुर्किये, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी ब्रिटेन के इस प्रस्तावित कदम पर चिंता व्यक्त की है। इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत करने वाले जापान और दक्षिण कोरिया ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इससे पहले भी ब्रिटेन में रक्षोपाय उपाय लागू थे, जिसके तहत आयात कोटा तय किया गया था, लेकिन नए उपायों से उस कोटे में भारी कटौती हो जाएगी। भारत का ब्रिटेन को लौह और इस्पात तथा उनके उत्पादों का निर्यात 2025-26 में 89.34 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो ब्रिटेन को होने वाले कुल 13.4 अरब डॉलर के निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मुद्दा 20-21 मई को हुई डब्ल्यूटीओ की वस्तु व्यापार परिषद की बैठक में उठाया गया। यह परिषद विश्व व्यापार संगठन के तहत वस्तु व्यापार से जुड़े सभी समझौतों के क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य करती है। ब्रिटेन ने कहा कि ये कदम वैश्विक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और सुरक्षा चिंताओं के कारण उद्योग की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उसने यह भी कहा कि इन उपायों के बिना ब्रिटेन जी-7 का पहला ऐसा देश बन सकता है, जिसके पास प्राथमिक इस्पात उत्पादन क्षमता नहीं बचेगी। ब्रिटेन ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह प्रभावित देशों से बातचीत जारी रखेगा।

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भारत ने ब्रिटेन के नए इस्पात रक्षोपाय कदमों पर डब्ल्यूटीओ की बैठक में जताई चिंता

 भारत ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिटेन द्वारा इस्पात पर लगाए गए नए रक्षोपाय कदमों को लेकर चिंता जताई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ब्रिटेन एक जुलाई 2026 से शुल्क-मुक्त इस्पात आयात को सीमित करेगा और मौजूदा रक्षोपाय के तहत तय कोटा में 60 प्रतिशत की कटौती करेगा। इस सीमा से अधिक आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह नियम उन इस्पात उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें ब्रिटेन में भी बनाया जा सकता है। जिनेवा के एक अधिकारी ने बताया कि भारत के अलावा ब्राजील, तुर्किये, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी ब्रिटेन के इस प्रस्तावित कदम पर चिंता व्यक्त की है। इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत करने वाले जापान और दक्षिण कोरिया ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इससे पहले भी ब्रिटेन में रक्षोपाय उपाय लागू थे, जिसके तहत आयात कोटा तय किया गया था, लेकिन नए उपायों से उस कोटे में भारी कटौती हो जाएगी। भारत का ब्रिटेन को लौह और इस्पात तथा उनके उत्पादों का निर्यात 2025-26 में 89.34 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो ब्रिटेन को होने वाले कुल 13.4 अरब डॉलर के निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मुद्दा 20-21 मई को हुई डब्ल्यूटीओ की वस्तु व्यापार परिषद की बैठक में उठाया गया। यह परिषद विश्व व्यापार संगठन के तहत वस्तु व्यापार से जुड़े सभी समझौतों के क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य करती है। ब्रिटेन ने कहा कि ये कदम वैश्विक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और सुरक्षा चिंताओं के कारण उद्योग की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उसने यह भी कहा कि इन उपायों के बिना ब्रिटेन जी-7 का पहला ऐसा देश बन सकता है, जिसके पास प्राथमिक इस्पात उत्पादन क्षमता नहीं बचेगी। ब्रिटेन ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह प्रभावित देशों से बातचीत जारी रखेगा।


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