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01-05-2026

यूनिटेक के 22,000 घर खरीदारों को घर दिलाना हमारा मकसद : कोर्ट

  •  सुप्रीम कोर्ट ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के करीब 22,000 घर खरीदारों को उनके घर दिलाने को अपना मुख्य उद्देश्य बताते हुए कंपनी के नवनियुक्त बोर्ड, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से इस लंबित विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सुझाव देने को कहा। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने घर खरीदारों और भूमि स्वामित्व एजेंसियों के वकीलों से भी एक सप्ताह के भीतर दो पन्नों का नोट दाखिल करने को कहा, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे के समाधान के सुझाव हों। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, हमारा उद्देश्य घर खरीदारों को घर मुहैया कराना है। पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामले का कोई न कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए। पीठ ने तीन परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) के अलावा सात बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी गतिरोध दूर करने के उपाय सुझाने को कहा। करीब 22,000 खरीदार यूनिटेक की परियोजनाओं में बुक किए गए घरों का कई वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड ने इस कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है। मामले में कंपनी पर कुल बकाया राशि करीब 14,129.85 करोड़ रुपये बताई गई है। शीर्ष अदालत ने घर खरीदारों की तरफ से जमा कराई गई रकम के बारे में सवाल पूछा। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि पूर्व प्रवर्तकों ने इस रकम को कर चोरी के लिहाज से सुरक्षित माने जाने वाले देशों में स्थानांतरित कर दिया था। उन्होंने कंपनी की वित्तीय चुनौतियों और परियोजना पूरे करने में आ रही बाधाओं का जिक्र करते हुए सुझाव दिया कि मौजूदा बोर्ड की जगह एक नया बोर्ड नियुक्त किया जाए, जो 22,000 घरों की आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर काम कर सके। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले में समाधान पर विचार कर रही है और एक सप्ताह बाद अगली सुनवाई में कोई आदेश पारित कर सकती है। यह मामला 2016 से ही लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी, 2020 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को यूनिटेक लिमिटेड का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति दी थी, ताकि अटकी परियोजनाओं को पूरा कर घर खरीदारों को राहत दी जा सके।

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यूनिटेक के 22,000 घर खरीदारों को घर दिलाना हमारा मकसद : कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के करीब 22,000 घर खरीदारों को उनके घर दिलाने को अपना मुख्य उद्देश्य बताते हुए कंपनी के नवनियुक्त बोर्ड, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से इस लंबित विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सुझाव देने को कहा। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने घर खरीदारों और भूमि स्वामित्व एजेंसियों के वकीलों से भी एक सप्ताह के भीतर दो पन्नों का नोट दाखिल करने को कहा, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे के समाधान के सुझाव हों। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, हमारा उद्देश्य घर खरीदारों को घर मुहैया कराना है। पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामले का कोई न कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए। पीठ ने तीन परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) के अलावा सात बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी गतिरोध दूर करने के उपाय सुझाने को कहा। करीब 22,000 खरीदार यूनिटेक की परियोजनाओं में बुक किए गए घरों का कई वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड ने इस कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है। मामले में कंपनी पर कुल बकाया राशि करीब 14,129.85 करोड़ रुपये बताई गई है। शीर्ष अदालत ने घर खरीदारों की तरफ से जमा कराई गई रकम के बारे में सवाल पूछा। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि पूर्व प्रवर्तकों ने इस रकम को कर चोरी के लिहाज से सुरक्षित माने जाने वाले देशों में स्थानांतरित कर दिया था। उन्होंने कंपनी की वित्तीय चुनौतियों और परियोजना पूरे करने में आ रही बाधाओं का जिक्र करते हुए सुझाव दिया कि मौजूदा बोर्ड की जगह एक नया बोर्ड नियुक्त किया जाए, जो 22,000 घरों की आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर काम कर सके। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले में समाधान पर विचार कर रही है और एक सप्ताह बाद अगली सुनवाई में कोई आदेश पारित कर सकती है। यह मामला 2016 से ही लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी, 2020 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को यूनिटेक लिमिटेड का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति दी थी, ताकि अटकी परियोजनाओं को पूरा कर घर खरीदारों को राहत दी जा सके।


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