अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने देश के सभी दिग्गज ऑटो इंडस्ट्ेरी लीडर के साथ बैठक कर राइट-टू-रिपेयर (मरम्मत का अधिकार) जैसे खतरनाक मुद्दे पर चर्चा की। आमतौर पर राइट टू रिपेयर को होर्नेट्स वेब यानी बर्र का छत्ता माना जाता है क्योंकि इस मामले पर दुनिया की सभी ऑटो कंपनियां एक जाजम पर बैठी हैं। बैठक के बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि वह वेहीकल ओनर्स को अपनी गाडिय़ों की मरम्मत कराने के अधिक अधिकार देने के पक्ष में हैं और ऑटो कंपनियों की मौजूदा नीतियों पर सवाल उठाए। बैठक में जनरल मोटर्स की सीईओ मैरी बारा, फोर्ड मोटर के सीनियर एक्जेक्टिव एंड्रू फ्रिक, नेशनल ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन और अलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन के प्रतिनिधि मौजूद थे। रिपब्लिकन सीनेटर बेमी मोरेनो जो पहले ऑटो डीलर रह चुके हैं, भी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, ऑटो इंडस्ट्री के लोग मेरे पास आए थे। वे नहीं चाहते कि लोग अपनी कार खुद ठीक कर सकें। मैंने कहा, ‘यह तो अजीब बात है।’ उनके यहां एक व्यवस्था है कि किसी और को आपकी कार ठीक करने की अनुमति नहीं है (यानी कंपनी के ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर के अलावा गाड़ी कोई रिपेयर नहीं कर सकता क्योंकि खुले मार्केट में पार्ट्स ही नहीं मिलते)। राइट-टू-रिपेयर का मुद्दा अमेरिका में कई वर्ष से विवाद का विषय बना हुआ है। इंडिपेंडेंट गैराज और रिपेयर सेंटर का आरोप है कि ऑटो मेकर नई कारों के सॉफ्टवेयर, डायग्नोस्टिक डेटा और तकनीकी जानकारी अपने कंट्रोल में रखते हैं जिससे कार यूजर को ऑथोराइज्ड डीलर पर निर्भर रहना पड़ता है। अमेरिका का ऑटो सर्विस और रिपेयर मार्केट लगभग 200 बिलियन डॉलर का है। पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एक समिति ने एक विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत ऑटो इंडस्ट्री और स्वतंत्र गैराजों के बीच पहले से मौजूद समझौतों को कानूनी रूप दिया जाएगा। साथ ही फेडरल ट्रेड कमिशन को इन समझौतों को लागू कराने की पावर दी जाएंगी।
ऑटो इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाला अलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है। संगठन का कहना है कि वारंटी समाप्त होने के बाद लगभग 75 परसेंट मेंटीनेंस पहले ही स्वतंत्र गैराजों द्वारा की जाती है। इंडस्ट्री का यह भी दावा है कि 2014 से ऑटोमेकर कंपनियां मेंटीनेंस से संबंधित मैन्युअल (गाइडलाइन्स), कंपोनेंट्स, डायग्नोस्टिक कोड और टूल्स स्वतंत्र गैराजों को उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि कई सांसदों और गैराजों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि मॉडर्न कारों में बड़ी तादाद मेंं डिजिटल डेटा और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है जिसके बिना सही तरह से मेंटीनेंस व रिपेयर संभव नहीं है। वे चाहते हैं कि अमेरिकी कांग्रेस कानून बनाकर कार ओनर और गैराज को डायग्नोस्टिक डेटा, कैलिब्रेशन और री-कैलिब्रेशन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराने के लिए बाध्य करे। प्रस्तावित कानून के अनुसार ऑटो मेकर को कार ओनर और गैराज को डायग्नोस्टिक, रिपेयर, कैलिब्रेशन और री-कैलिब्रेशन डेटा मिल पाएगा। जिससे कंपीटिशन बढ़ेगा और मेंटीनेंस की लागत घटेगी। सांसदों का आरोप है कि डेटा को अपने कंट्रोल में रखकर ऑटोमेकर कार मेंटीनेंस को महंगा कर रही हैं। गैराजों को जरूरी सॉफ्टवेयर और तकनीकी जानकारी लेने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। हालांकि ऑटो डीलर संगठनों का कहना है कि इस तरह के कानून से आफ्टरमार्केट कंपोनेंट मेंकर और ऑरिजनल इक्विपमेंट मेकर (ऑटो कंपनी) में कोई फर्क नहीं रहेगा। इससे बीमा कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है और वे मेंटीनेंस में अनावश्यक दखल देंगीें। यदि व्हाइट हाउस और कांग्रेस राइट-टू-रिपेयर के पक्ष में आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री को अपने बिजनस मॉडल और टेक्नीकल डेटा पॉलिसी में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

