फास्ट एक्शन लेते हुए भारत सरकार ने बुधवार के केबिनेट के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स हटाने के फैसले को लेकर अध्यादेश जारी कर उसे नोटिफाई भी कर दिया है। फॉरेन इंवेस्टमेंट को आकर्षित करने और भारत के सरकारी बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एफआईआई को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली आय और पूंजीगत लाभ पर पुरानी तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से कर छूट प्रदान कर दी है। यह कदम भारतीय डैट मार्केट में विदेशी गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज में भागीदारी बढ़ाने और फॉरेन इंवेस्टर्स के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के तहत गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज पर अर्जित इंटरेस्ट इनकम तथा इनकी सेल, एक्सचेज और ट्रांसफर से होने वाले कैपिटल गेन्स को टेक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत सरकार ने यह छूट रिट्रोस्पेक्टिव (पुरानी तारीख) से लागू की है और यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी यानी इसका लाभ पूरे वित्त वर्ष 2026-27 पर लागू होगा। सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब फॉरेन इंवेस्टर भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। चालू वर्ष में अब तक फॉरेन इंवेस्टर्स ने भारतीय शेयर बाजारों से लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं, जो पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है। जून के पहले तीन कारोबारी दिनों में ही फॉरेन इंवेस्टर्स ने लगभग 34 हजार करोड़ रुपये निकाले हैं। अध्यादेश के अनुसार इस कर छूट का लाभ एफआईआई के अलावा बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) को भी मिलेगा। बीआईएस को अक्सर सेेंट्रल बैंक फोर सेंट्रल बैंक्स (केंद्रीय बैंकों का केंद्रीय बैंक) कहा जाता है। हालांकि इस छूट का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप और प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारी सरकार को उपलब्ध करानी होगी। तय कंप्लायंस शर्तें पूरा करने के बाद ही इंवेस्टर्स इस टेक्स रिबेट को क्लेम कर सकेंगे। एनेलिस्ट्स का मानना है कि इस कदम से फॉरेन इंवेस्टर्स कर-पश्चात आय (पोस्ट-टैक्स रिटर्न) में सुधार होगा, जिससे भारतीय सरकारी बॉन्ड की ओर उनका रुझान बढ़ेगा। हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए रिफॉम्र्स के कारण जी-सैक (गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज) को ग्लोबल बॉन्ड सूचकांकों में शामिल किया गया है। एनेलिस्ट्स का मानना है कि इस टेक्स छूट से सरकार को 1500 से 3500 करोड़ रुपये तक का घाटा सकता है लेकिन इससे सेंटिमेंट बदलने में मदद मिलेगी। साथ में लगी टेबल के अनुसार इससे गवर्नमेंट बॉन्ड में 40 हजार से 1.20 लाख करोड़ रुपये तक एफआईआई का इनफ्लो हो सकता है। वर्तमान में एफआईआई को एक वर्ष से अधिक समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों और बॉन्ड पर 12.5 परसेंट लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी सिक्यॉरिटी पर हुई इंटरेस्ट इनकम पर 20 परसेंट टीडीएस ( विदहोल्डिंग टैक्स) भी लागू होता है। विदेशी निवेशकों को पहले उपलब्ध 5 परसेंट की रियायती कर दर को वर्ष 2023 में समाप्त कर दिया गया था।
