भारत और ओमान के बीच लागू हुआ कम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सेपा) केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जीटीआरआई के अनुसार, इस समझौते का सबसे बड़ा महत्व ओमान की भौगोलिक स्थिति है। खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कतर से होने वाला समुद्री व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है, जबकि ओमान का बड़ा समुद्री तट इस जलडमरूमध्य के बाहर सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है। इस वजह से ओमान के प्रमुख बंदरगाह, जैसे सलाला और दुक्म ईरान वॉर जैसे हालातों में भी खुले रह सकते हैं। होर्मुज शिपिंग चैनल में खलल पडऩे के कारण भारत का प्रमुख खाड़ी देशों से इंपोर्ट अप्रैल 2025 के 15 बिलियन डॉलर से घटकर अप्रैल 2026 में 9.8 बिलियन डॉलर रह गया, जबकि एक्सपोर्ट 4.4 बिलियन डॉलर से गिरकर 2.7 बिलियन डॉलर पर आ गया। ओमान से भारत का इंपोर्ट 246.4' बढक़र 430 मिलियन डॉलर से 1.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इस ग्रोथ का बड़ा कारण क्रूड ऑइल और यूरिया की अधिक खरीद है। वहीं भारत का ओमान को एक्सपोर्ट केवल 10.3' घटा, जो अन्य खाड़ी देशों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन था। इससे पता चलता है कि क्राइसिस के हालातों में ओमान भारत के लिए पश्चिम एशिया का नया प्रवेश द्वार बन सकता है। ओमान ने लगभग 98' टैरिफ लाइनों पर तत्काल •ाीरो ड्यूटी कर दी है जिससे मूल्य के आधार पर भारत के लगभग 99 परसेंट एक्सपोर्ट को लाभ मिलेगा। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने ओमान को लगभग 4 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। जिसमें पेट्रोल, नैफ्था, कैल्साइन्ड एल्युमिना, आयरन एंड स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी और चावल प्रमुख रहे। पहले कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर ओमान में इंपोर्ट ड्यूटी 100' तक थी। हालांकि ओमान की मात्र 55 लाख की आबादी और लगभग 110 बिलियन डॉलर की इकोनॉमी के कारण एक्सपोर्ट की संभावनाएं सीमित रहेंगी।
