देश के शीर्ष आठ शहरों में कार्यालयों को पट्टे पर लेने की शुद्ध मांग जनवरी-मार्च तिमाही में 24 प्रतिशत घटकर 1.151 करोड़ स्क्वायर फीट रह गई। कम मांग और आपूर्ति संबंधी बाधाएं इसकी मुख्य वजह रही। रियल एस्टेट सलाहकार कुशमैन एंड वेकफील्ड के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 1.508 करोड़ स्क्वायर फीट था। कुशमैन एंड वेकफील्ड ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कॉरपोरेट के विस्तार की गति आगे धीमी हो सकती है, हालांकि भारत में मध्यम से दीर्घकालिक मांग का परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। जनवरी-मार्च तिमाही में कार्यालय परिसरों के निर्माण में देरी के कारण पहले से तय मांग का वास्तविक क्रियान्वयन सीमित रहा। देश के आठ प्रमुख शहरों में सकल पट्टा मांग 13 प्रतिशत बढक़र 2.189 करोड़ स्क्वायर फीट हो गई जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 1.93 करोड़ स्क्वायर फीट थी। ये आठ शहर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद हैं। कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यालय एवं खुदरा के मुख्य कार्यकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका तथा एशिया-प्रशांत) अंशुल जैन ने कहा कि भारत का कार्यालय बाजार 2025 की गति को इस वर्ष की पहली तिमाही में भी बनाए हुए है।